हसदेव के पेड़ काटने की अनुमति भूपेश बघेल ने दी, सीएम बोले अब गुमराह कर रहे हैं

Arun Tiwari | Jun 30, 2026, 17:16 IST
हसदेव में पेड़ काटने की अनुमति भूपेश बघेल ने दी
हसदेव में पेड़ों की कटाई को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि इसकी अनुमति भूपेश बघेल सरकार ने दी थी। कांग्रेस ने आरोप खारिज कर दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur: छत्तीसगढ़ में एक बार फिर हसदेव के पेड़ कटने का मुद्दा उठा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रामगढ़ में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि हसदेव में पेड़ कटने की अनुमति भूपेश बघेल सरकार ने ही दी थी। सीएम साय ने कहा कि जब भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे तो कहते थे कि पेड़ कटेंगे तभी तो बिजली मिलेगी। उन्होंने ही राजस्थान की बिजली के लिए कोयला खदान की स्वीकृति दी। सीएम बोले की अब भूपेश बघेल जनता को गुमराह कर सारा दोष हम पर डाल रहे हैं।



गुनाह उनका गुनहगार हम

सीएम ने कहा कि हसदेव में जो पेड़ कटने की बात हो रही है उसके दोषी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल हैं। सीएम रहते भूपेश बघेल ने राजस्थान को हसदेव की कोयला खदान आवंटित की। भूपेश कहते थे कि पेड़ कटेंगे तभी तो बिजली मिलेगी। उन्होंने ही हसदेव के पेड़ काटने की अनुमति दी।



सीएम साय रामगढ़ में लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आपको गुमराह करने आएंगे लेकिन आपको भ्रमित नहीं होना है। इन लोगों का काम ही यही है। जब पांच साल इनको मौका मिला था तो इन्होंने घोटाले किए। सीएम ने लोगों से दोबारा बीजेपी के लिए समर्थन मांगा।



कांग्रेस का पलटवार

सीएम के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है। संचार विभाग के प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि वे सीएम हैं कुछ भी कह सकते हैं। सीएम को अनुमति के दस्तावेज सामने रखने चाहिए। शुक्ला ने कहा कि भूपेश सरकार में तो पेड़ काटने की मनाही की गई थी। विधानसभा में संकल्प पारित कर केंद्र सरकार को भेजा गया था। अब यह सरकार इस संकल्प की अनदेखी कर अडानी के लिए पेड़ काटने की अनुमति दे रही है।



यह है मामला

केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए वन भूमि के उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह परियोजना राजस्थान सरकार को आवंटित की गई है और इसका खनन कार्य अडानी समूह द्वारा किया जाएगा।



मंत्रालय ने लगभग 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि को खनन के लिए डायवर्जन करने की अनुमति दी है। इस निर्णय के बाद हसदेव-अरण्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर जंगल कटाई की आशंका बढ़ गई है। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना के कारण लगभग 4.48 लाख पेड़ों की कटाई होगी। इनमें से लगभग 97,837 पेड़ पहले पांच वर्षों में ही काटे जाएंगे। पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों ने इस फैसले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।



सेंसटिव ज़ोन घोषित है हसदेव

वर्ष 2021 में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद द्वारा किए गए जैव विविधता अध्ययन में हसदेव-अरण्य को अत्यंत संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र बताया गया था। अध्ययन में सिफारिश की गई थी कि पहले से संचालित परसा ईस्ट केंटे बासन खदान को छोड़कर इस क्षेत्र में किसी नए खनन कार्य की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि यह क्षेत्र हाथियों के महत्वपूर्ण आवासों में से एक है और यहां खनन बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष में वृद्धि हो सकती है।



IMP FACTS

हसदेव में पेड़ कटाई को लेकर भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने हैं।


सीएम विष्णुदेव साय ने भूपेश बघेल सरकार पर अनुमति देने का आरोप लगाया।


कांग्रेस ने अनुमति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की।


केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक राजस्थान सरकार को आवंटित है।


खनन कार्य अडानी समूह द्वारा किया जाएगा।


करीब 1,742.6 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है।


परियोजना से लगभग 4.48 लाख पेड़ कटने की आशंका है।


पहले पांच वर्षों में करीब 97,837 पेड़ काटे जा सकते हैं।


हसदेव-अरण्य को संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्र माना गया है।


यह क्षेत्र हाथियों का महत्वपूर्ण प्राकृतिक आवास भी है।



FAQ

  1. हसदेव में पेड़ कटाई को लेकर विवाद क्यों है?
    केते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक के लिए वन भूमि के उपयोग को सैद्धांतिक मंजूरी मिली है। इससे करीब 4.48 लाख पेड़ कटने की आशंका है।
  2. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किस पर आरोप लगाया है?
    सीएम साय ने कहा कि हसदेव में पेड़ काटने की अनुमति पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने दी थी।
  3. कांग्रेस ने क्या जवाब दिया है?
    कांग्रेस ने आरोप खारिज करते हुए अनुमति से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। कांग्रेस का कहना है कि भूपेश सरकार ने पेड़ कटाई पर रोक लगाई थी।

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