छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: TET रद्द होने पर नहीं रुकेगी अनुकंपा नौकरी
समझें क्या है पूरा मामला
- छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति मामले में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
- कोर्ट ने विभाग के 6 दिसंबर 2022 के पुराने आदेश को रद्द कर दिया।
- कोविड-19 महामारी के दौरान शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित नहीं हो सकी थी।
- इसके कारण एक अभ्यर्थी निर्धारित तीन वर्ष की समय-सीमा में परीक्षा पास नहीं कर सका।
- हाईकोर्ट ने प्रशासन को 45 दिनों के भीतर दावे पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बहुत ही मानवीय और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी तंत्र की वजह से परीक्षा नहीं हो पाती, तो इसका खामियाजा किसी उम्मीदवार को नहीं भुगतना चाहिए। इस फैसले से उन कई परिवारों को राहत मिलेगी जो आपदा के समय विपरीत परिस्थितियों का शिकार हुए थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला एक ऐसे अभ्यर्थी से जुड़ा है जिसके पिता सहायक शिक्षक (एलबी) के पद पर कार्यरत थे। साल 2017 में पिता की असमय मृत्यु हो गई। पिता के निधन के बाद परिवार ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। नियमों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए उम्मीदवार को तीन वर्ष के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टेट (TET) पास करना अनिवार्य था। याचिकाकर्ता ने साल 2019 में ही डीएलएड की परीक्षा पास कर ली थी। इसके बाद उसने 22 मार्च 2020 को होने वाली टेट परीक्षा के लिए अपना आवेदन भी दाखिल किया था।
कोविड-19 महामारी और परीक्षा पर असर
साल 2020 की शुरुआत में देश में कोविड-19 महामारी ने दस्तक दे दी। इस महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा दिया गया। इसी वजह से 22 मार्च 2020 को होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा को रद्द करना पड़ा। महामारी के लंबे दौर के बाद आखिरकार 9 जनवरी 2022 को इस परीक्षा का आयोजन हो सका। याचिकाकर्ता ने इस परीक्षा में भाग लिया और वह इसमें सफलतापूर्वक पास भी हो गया।
अधिकारियों ने खारिज किया था दावा
सफलता के बावजूद विभाग के अधिकारियों ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया। अधिकारियों का तर्क था कि अभ्यर्थी ने नियमों के तहत निर्धारित तीन साल की अवधि में यह परीक्षा पास नहीं की है। विभाग ने 6 दिसंबर 2022 को इस संबंध में एक आदेश जारी कर उसकी फाइल बंद कर दी थी। इसके बाद पीड़ित अभ्यर्थी ने न्याय के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और फैसला
मामले की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पाया कि साल 2017 से मार्च 2020 के बीच कोई टेट परीक्षा आयोजित ही नहीं की गई थी। इस संबंध में सरकारी रिकॉर्ड पर कोई भी साक्ष्य मौजूद नहीं था।
कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब परीक्षा आयोजित कराना प्रशासन का काम था और उसने परीक्षा नहीं कराई, तो इसकी सजा उम्मीदवार को नहीं दी जा सकती। प्रशासन अपनी खुद की विफलता का ठीकरा किसी जरूरतमंद अभ्यर्थी के सिर पर नहीं फोड़ सकता।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में देश की सर्वोच्च अदालत के एक पुराने निर्देश का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने कोविड महामारी के दौरान 15 मार्च 2020 से लेकर 28 फरवरी 2022 तक की अवधि को समय-सीमा की गणना से बाहर रखने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने कहा कि यही सिद्धांत इस अनुकंपा नियुक्ति के मामले पर भी पूरी तरह लागू होता है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे 45 दिनों के भीतर कानून के अनुसार याचिकाकर्ता के दावे पर नए सिरे से विचार करें।
FAQ
- अनुकंपा नियुक्ति किसे और क्यों दी जाती है?
Ans. किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर उसके आश्रित परिवार के पात्र सदस्य को यह नौकरी दी जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रभावित परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारना और राहत देना होता है। यह कोई नियमित भर्ती प्रक्रिया नहीं है। - छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने टेट (TET) परीक्षा को लेकर क्या आदेश दिया?
Ans. कोर्ट ने कहा कि यदि कोविड महामारी के कारण टेट परीक्षा समय पर आयोजित नहीं हो सकी, तो निर्धारित समय-सीमा में इसे पास न कर पाने के आधार पर उम्मीदवार को अनुकंपा नौकरी से वंचित नहीं किया जा सकता। देरी के लिए प्रशासन जिम्मेदार था, अभ्यर्थी नहीं। - कोर्ट ने अधिकारियों को अनुकंपा नियुक्ति याचिका पर निर्णय के लिए कितना समय दिया है?
Ans. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को 6 दिसंबर 2022 के खारिज करने वाले आदेश को रद्द करते हुए 45 दिनों के भीतर याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर कानून के अनुसार पुनर्विचार करने का निर्देश दिया है।
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