चूहे खा गए 690 क्विंटल धान, मैनेजर की याचिका बिलासपुर हाईकोर्ट में खारिज
NEWS IN SHORT
- कुम्हली केंद्र से 690.70 क्विंटल धान और बारदाने गायब मिले।
- प्रबंधक ने धान शॉर्टेज के लिए चूहों को जिम्मेदार ठहराया।
- जांच में कुल 23.54 लाख रुपये की गड़बड़ी उजागर हुई।
- बिलासपुर हाईकोर्ट ने प्रबंधक की FIR रद्द याचिका खारिज की।
- समय पर धान का उठाव न होना भी बना विवाद।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट में एक बेहद अजीबोगरीब मामला सामने आया है। दुर्ग जिले के एक धान उपार्जन केंद्र से 690.70 क्विंटल धान गायब होने के मामले में समिति प्रबंधक ने अजीब दलील दी है। प्रबंधक का कहना है कि इस शॉर्टेज (कमी) के लिए चूहे, कीड़े-मकोड़े और खुद राज्य सरकार जिम्मेदार है। हालांकि, हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधक की एफआईआर (FIR) रद्द करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला दुर्ग जिले के पाटन तहसील के अंतर्गत 'सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कुम्हली' का है। यहाँ के सोसायटी मैनेजर अतुल वर्मा के खिलाफ जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग के ब्रांच मैनेजर की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। इसी एफआईआर को चुनौती देते हुए अतुल वर्मा ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता (प्रबंधक) का तर्क था कि नियमानुसार खरीदे गए धान का उठाव मार्केटिंग फेडरेशन द्वारा 31 मार्च 2026 तक किया जाना था। बार-बार अनुरोध के बावजूद समय पर धान नहीं उठाया गया, जिससे धान लंबे समय तक केंद्र में डंप रहा। प्रबंधक ने धान की इस भारी कमी के लिए:
- चूहों और कीड़े-मकोड़ों को,
- मौसम और सूखत (नमी कम होना) को,
- तथा राज्य सरकार द्वारा दिए गए घटिया क्वालिटी के बारदानों को जिम्मेदार ठहराया।
भौतिक सत्यापन में खुली पोल
राज्य सरकार ने कोर्ट के सामने जांच रिपोर्ट पेश करते हुए इस 'चूहे वाली दलील' की पोल खोल दी। शासकीय रिपोर्ट के अनुसार:
खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान इस केंद्र में कुल 53,956.40 क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। रिकॉर्ड के मुताबिक, पूरा स्टॉक 1 अप्रैल 2026 तक परिवहन (शिफ्ट) कर दिया गया था। इसके बाद, 23 अप्रैल 2026 को खाद्य विभाग और समिति के अधिकारियों ने जब केंद्र का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) किया, तो वहां बड़ी गड़बड़ी मिली।
जांच में पाई गई कमी
धान की कमी : 690.70 क्विंटल (कीमत: 21 लाख 41 हजार 170)
बारदानों की कमी : 3,057 नग (कीमत: 2 लाख 13 हजार 645)
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि जब पूरा स्टॉक पहले ही भेजा जा चुका था, तो बाद में इतनी बड़ी कमी कैसे हुई? रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता समिति प्रबंधक ने कुल 23 लाख 54 हजार 815 रुपए की वित्तीय गड़बड़ी की है।
हाई कोर्ट का फैसला
छत्तीसगढ़ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सरकारी जांच रिपोर्ट को देखने के बाद समिति प्रबंधक को कोई राहत नहीं दी। कोर्ट ने चूहों और खराब बारदाने के तर्कों को दरकिनार करते हुए प्रबंधक की एफआईआर रद्द करने की याचिका को साफ तौर पर खारिज कर दिया। अब प्रबंधक को पुलिस जांच और कानूनी कार्रवाई का सामना करना होगा।
निष्कर्ष
मामले में समय पर धान का उठाव न होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में शॉर्टेज के लिए चूहों और खराब बारदाने को जिम्मेदार ठहराना गले नहीं उतरता। हाई कोर्ट द्वारा याचिका खारिज करना यह साफ करता है कि वित्तीय अनियमितताओं में ऐसी अजीब दलीलों को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
FAQ
- छत्तीसगढ़ का बिलासपुर हाई कोर्ट देश का कौन से नंबर का उच्च न्यायालय है?
उत्तर: बिलासपुर हाई कोर्ट देश का 19वां उच्च न्यायालय है। - 4. छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का प्रबंधन मुख्य रूप से कौन सी संस्था (फेडरेशन) संभालती है?
उत्तर: छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (मार्कफेड / Marketing Federation)। - छत्तीसगढ़ के किस विधानसभा क्षेत्र या तहसील के अंतर्गत 'कुम्हली' आता है, जहां यह धान घोटाला हुआ?
उत्तर: पाटन तहसील (यह छत्तीसगढ़ का बेहद हाई-प्रोफाइल राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है)। - छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक को किस नाम से जाना जाता है जो जिला बैंकों का संचालन करता है?
उत्तर: अपेक्स बैंक (Apex Bank), जो राज्य की सभी प्राथमिक और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों (DCCB) की शीर्ष संस्था है।
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