शादीशुदा बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से नहीं कर सकते बाहर, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
समझें क्या है पूरा मामला
- शादीशुदा बेटी को नहीं रोक सकते नौकरी से
- अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
- विवाह नहीं, निर्भरता तय करेगी नौकरी का हक
- बेटियों के अधिकार पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
- पति पर निर्भर मानना गलत, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला
Blaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि किसी महिला को सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर नौकरी के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। शादी के बाद बेटी पति पर निर्भर होगी, यह केवल एक अनुमान है। उसकी वास्तविक आर्थिक स्थिति को देखकर ही फैसला लिया जाना चाहिए।
बैंक ने शादीशुदा होने के आधार पर खारिज किया था आवेदन
मामला एक महिला की याचिका से जुड़ा है, जिसने अपने पिता की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। उसके पिता बैंक ऑफ महाराष्ट्र में डिप्टी मैनेजर के पद पर कार्यरत थे। बैंक ने महिला का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह शादीशुदा है और उसे पति पर निर्भर माना जाएगा। इसलिए उसे दिवंगत कर्मचारी के आश्रित परिवार का सदस्य नहीं माना जा सकता। महिला ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उसने तर्क दिया कि बैंक की नीति में शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर रखने का कोई प्रावधान नहीं है।
कोर्ट ने कहा- निर्भरता साबित करनी होगी
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति की निर्भरता केवल वैवाहिक स्थिति देखकर तय नहीं की जा सकती। यह एक तथ्य है, जिसे सबूतों और परिस्थितियों के आधार पर जांचना जरूरी है। कोर्ट ने माना कि महिला ने अपने आवेदन में स्पष्ट किया था कि वह आर्थिक रूप से अपने पिता पर निर्भर थी। वहीं बैंक की ओर से ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया गया, जिससे यह साबित हो सके कि वह अपने पति पर ही निर्भर थी।
शादी होना नौकरी से वंचित करने का आधार नहीं
हाईकोर्ट ने कहा कि शादीशुदा होना अपने आप में अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्यता का कारण नहीं हो सकता। अगर किसी सरकारी या संस्थागत नीति में स्पष्ट रूप से ऐसा प्रावधान नहीं है, तो केवल विवाह के आधार पर किसी बेटी का दावा खारिज करना सही नहीं है। कोर्ट ने बैंक को निर्देश दिया कि वह महिला के आवेदन पर दोबारा विचार करे और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए 30 दिन के भीतर फैसला ले।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि शादीशुदा बेटियों को सिर्फ वैवाहिक स्थिति के आधार पर अलग करना लैंगिक भेदभाव वाली सोच को बढ़ावा देता है। कोर्ट ने कहा कि महिला की पहचान और अधिकार केवल उसके वैवाहिक दर्जे से तय नहीं किए जा सकते। संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) समानता और भेदभाव से सुरक्षा का अधिकार देते हैं।
अनुकंपा नियुक्ति में बेटियों के अधिकार पर बढ़ी स्पष्टता
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में बेटियों को लेकर केवल शादी के आधार पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता। संबंधित विभागों और संस्थानों को आवेदक की वास्तविक आर्थिक स्थिति और निर्भरता की जांच करनी होगी।हाईकोर्ट के इस निर्णय को महिलाओं के समान अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
FAQ
- हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर क्या फैसला दिया है?
हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी शादीशुदा बेटी को सिर्फ विवाह के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता। - बैंक ने महिला का आवेदन क्यों खारिज किया था?
बैंक ने शादीशुदा होने के कारण महिला को पति पर निर्भर मानते हुए अनुकंपा नियुक्ति का दावा खारिज कर दिया था। - कोर्ट ने निर्भरता को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि निर्भरता केवल वैवाहिक स्थिति से तय नहीं होगी। इसके लिए आर्थिक स्थिति और अन्य तथ्यों की जांच जरूरी है।
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