छत्तीसगढ़ में भीषण लू का तांडव, 150 चमगादड़ों की मौत, फसलें झुलसीं

Aishwarya Dwivedi | May 24, 2026, 10:30 IST
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छत्तीसगढ़ में नौतपा से पहले पारा 45 डिग्री पहुँचने से भीषण लू का प्रकोप है। अस्पतालों में मरीज बढ़ रहे हैं, फसलें झुलस गई हैं और कोरबा में 150 से अधिक चमगादड़ों की मौत हो गई।

NEWS IN SHORT

  • छत्तीसगढ़ में पारा 45 डिग्री तक पहुँचने से भीषण लू का प्रकोप।
  • कोरबा-पाली में हीट स्ट्रोक से 150 से अधिक चमगादड़ों की मौत।
  • प्रदेश के अस्पतालों में रोजाना 1200 से अधिक मरीज भर्ती।
  • दुर्ग 45 डिग्री तापमान के साथ राज्य का सबसे गर्म शहर।
  • भीषण धूप और भीषण गर्मी से खेतों में फसलें झुलसीं।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में नौतपा की शुरुआत से पहले ही सूर्यदेव के तीखे तेवरों ने हाहाकार मचा दिया है। पूरे प्रदेश में 43 डिग्री से 45 डिग्री सेल्सियस तक का 'टॉर्चर' जारी है, जिससे न सिर्फ इंसान बल्कि बेजुबान पशु-पक्षी और फसलें भी बुरी तरह झुलस रही हैं।



24 घंटे में 150 से अधिक चमगादड़ों की मौत

गर्मी का सबसे दर्दनाक असर कोरबा जिले के पाली में देखने को मिला है। यहाँ नौकोनिया तालाब के किनारे पेड़ों पर बसेरा करने वाले 150 से अधिक प्रवासी चमगादड़ों की हीट स्ट्रोक (लू) के कारण मौत हो गई है। मरने के बाद ये चमगादड़ लगातार पेड़ों से नीचे गिर रहे हैं।



विशेषज्ञ की राय : पशु चिकित्सा सेवा के उपसंचालक एस.एन. मिश्रा के अनुसार, चमगादड़ों का सामान्य शारीरिक तापमान करीब 38 डिग्री होता है। तापमान 40 डिग्री से ऊपर जाते ही वे असहज हो जाते हैं और 42 डिग्री पार करते ही यह उनके लिए जानलेवा साबित होता है। हर साल फरवरी-मार्च में यहाँ हजारों प्रवासी चमगादड़ आते हैं, लेकिन इस बार 43 डिग्री की भीषण गर्मी को ये सहन नहीं कर पा रहे हैं।



अस्पतालों में मरीजों की कतार

भीषण गर्मी और गर्म हवाओं (लू) के थपेड़ों के कारण इंसानी सेहत भी गंभीर खतरे में है। प्रदेशभर के अस्पतालों में रोजाना 1200 से अधिक लू और डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से पीड़ित मरीज पहुँच रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य महामारी नियंत्रण केंद्र ने अस्पतालों की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। रायपुर के सबसे बड़े अंबेडकर अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि शरीर से पसीने के रूप में अत्यधिक पानी और नमक निकल जाने से लोग 'हीट एग्जॉशन' का शिकार हो रहे हैं। यह स्थिति ठीक हीट स्ट्रोक (लू लगना) से पहले की होती है, जिसमें तुरंत इलाज और सावधानी बेहद जरूरी है।



दुर्ग सबसे गर्म, खेती-किसानी भी प्रभावित

इस समय पूरा छत्तीसगढ़ भट्टी की तरह तप रहा है। अधिकांश शहरों में पारा 40 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है:



  • दुर्ग: प्रदेश में सबसे गर्म रहा, जहाँ तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया।
  • रायपुर: राजधानी में तापमान 44.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जहाँ सुबह से शाम तक लू चल रही है।
  • जगदलपुर: यहाँ भी पारा सामान्य से 4.9 डिग्री अधिक यानी 43.1 डिग्री दर्ज किया गया।

किसानी पर मार: इस जानलेवा गर्मी का सीधा असर खेती पर भी पड़ा है। खेतों में खड़ी सब्जियां भीषण धूप के कारण सूखकर झुलस रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर में घरों से बाहर न निकलने और लगातार पानी पीते रहने की सलाह दी है।



निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में नौतपा से पहले का यह प्रचंड तापमान जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत दे रहा है। बेजुबानों की मौत, फसलों का नुकसान और अस्पतालों में बढ़ती भीड़ यह चेतावनी है कि हमें पर्यावरण संरक्षण और ग्रीष्मकालीन आपदा प्रबंधन को लेकर अब बेहद सतर्क और संवेदनशील होना पड़ेगा।



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