जनगणना ड्यूटी को मना नहीं कर सकते कर्मचारी, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, विकल्प समाप्त

VINAY VERMA | Apr 27, 2026, 13:55 IST
high-court-census-duty-order-bemetara
हाईकोर्ट ने जनगणना ड्यूटी को लेकर अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि, यह कार्य राष्ट्रीय महत्व का है और इससे बचा नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारियों की तैनाती पूरी तरह वैध है और कर्मचारियों को भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य को लेकर एक बड़ा और स्पष्ट आदेश दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जनगणना कोई सामान्य प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व का दायित्व है। इसलिए इस कार्य के लिए कर्मचारियों की तैनाती पूरी तरह वैध है। कोर्ट के इस रुख के बाद अब यह साफ हो गया है कि सरकारी कर्मचारी जनगणना ड्यूटी से बच नहीं सकते।



कर्मचारियों के लिए विकल्प खत्म

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि स्थानीय निकायों के कर्मचारियों को भी जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। अब तक कई कर्मचारी इस तरह की ड्यूटी से बचने के लिए कानूनी रास्ते तलाशते थे, लेकिन इस फैसले ने ऐसे सभी विकल्प लगभग खत्म कर दिए हैं। अदालत ने कहा कि प्रशासन के पास यह अधिकार है और इसका पालन करना कर्मचारियों की जिम्मेदारी है।



बेमेतरा से जुड़ा है मामला

पूरा विवाद बेमेतरा जिले से सामने आया। नवागढ़ जनपद पंचायत में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 मनीष जैन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने कलेक्टर द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें 9 अप्रैल 2026 को जनगणना शाखा में अटैच किया गया था। याचिकाकर्ता का आरोप था कि यह कदम दुर्भावनापूर्ण है और उन्हें परेशान करने के लिए उठाया गया है।



विशेष ड्यूटी, ट्रांसफर नहीं

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखा। शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह मामला ट्रांसफर या सामान्य अटैचमेंट का नहीं है। यह जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत दी गई विशेष ड्यूटी है। सरकार ने यह भी कहा कि आगामी जनगणना अभियान के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत है, इसलिए इस तरह की तैनाती जरूरी है।



1 मई से शुरू होगा बड़ा अभियान

प्रदेश में जनगणना का पहला चरण 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 मई 2026 तक चलेगा। इस दौरान करीब 62,500 कर्मचारी घर-घर जाकर मकान सूचीकरण का कार्य करेंगे। प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए व्यापक तैयारी की है। इसे एक बड़े प्रशासनिक अभ्यास के रूप में देखा जा रहा है।



डिजिटल सेल्फ-गणना का विकल्प

इस बार जनगणना (Chhattisgarh Census) प्रक्रिया में डिजिटल विकल्प भी जोड़ा गया है। नागरिक 30 अप्रैल तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसे स्व-गणना कहा जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी।



लापरवाही पर सख्त कार्रवाई के संकेत

हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने भी सख्त रुख अपना लिया है। साफ निर्देश दिए गए हैं कि यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी से गैरहाजिर रहता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। वहीं, यदि कोई अधिकारी अपने अधीनस्थ को कार्यमुक्त नहीं करता, तो उस पर भी कार्रवाई तय है।



छुट्टी पर भी लगा प्रतिबंध

जनगणना अभियान के दौरान छुट्टियों को लेकर भी सख्ती बरती जाएगी। स्पष्ट किया गया है कि बिना कलेक्टर की अनुमति के कोई भी कर्मचारी अवकाश नहीं ले सकेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभियान में किसी भी तरह की बाधा न आए।



राष्ट्रीय हित सर्वोपरि: कोर्ट

हाईकोर्ट ने अपने फैसले के जरिए यह आदेश दिया है कि राष्ट्रीय कार्यों के सामने व्यक्तिगत असुविधाएं मायने नहीं रखतीं। कर्मचारियों को अपने दायित्वों को समझना होगा और प्रशासनिक आदेशों का पालन करना होगा। यह फैसला आने वाले समय में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बन सकता है।



ये खबरें भी पढ़ें...

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027; 1 मई से शुरू होगा घर-घर सर्वे, पूछे जाएंगे 33 सवाल



छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज, डिजिटल होगी पूरी प्रक्रिया



छत्तीसगढ़ में डिजिटल जनगणना की नई पहल ; नो लोकल स्टोरेज मॉडल से डेटा सुरक्षा पर जोर



अब बिना कलेक्टर की इजाजत नहीं मिलेगी छुट्टी, 1 मई से शुरू हो रहा जनगणना 2027 का महाभियान



Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • जनगणना
  • जनगणना 2027
  • छत्तीसगढ़ में जनगणना
  • Chhattisgarh Census