सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो की बढ़ी मुश्किलें; जाति प्रमाणपत्र पर हाईकोर्ट सख्त, कलेक्टर को 90 दिन का अल्टीमेटम!
NEWS IN SHORT
विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र पर हाईकोर्ट का फैसला जल्द आएगा
सीतापुर विधायक के जाति प्रमाणपत्र को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई हुई
याचिकाकर्ता ने जिला प्रशासन पर जांच में देरी का आरोप लगाया हैं
रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र में गड़बड़ी का आरोप लगा हैं
बिहारी लाल तिर्की ने हाईकोर्ट में फिर से याचिकादायर की हैं
NEWS IN DETAIL
SITAPUR : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीतापुर विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र से जुड़ी याचिका पर फौरन सुनवाई करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने रायगढ़ कलेक्टर और जिला स्तरीय सत्यापन समिति को 90 दिनों के अंदर
(अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र)मामले में फैसला लेने का निर्देश दिया है। याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन जानबूझकर मामले की सुनवाई टाल रहा था, जिस कारण उन्हें हाईकोर्ट का रुख करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता बिहारी लाल तिर्की ने 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
तिर्की ने विधायक रामकुमार टोप्पो के जाति प्रमाणपत्र को लेकर आपत्ति उठाई थी।
उनका आरोप है कि यह प्रमाणपत्र बिना सेटलमेंट के तैयार किया गया है।
विधायक के पिता गणेश राम ने 1980 में झारखंड से छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था, लेकिन उनके नाम पर कोई जमीन दर्ज नहीं है।
तिर्की ने आरोप लगाया कि सरलीकरण के नियमों का पालन नहीं किया गया और जिला प्रशासन इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए जांच में देरी कर रहा है।
सुनवाई में देरी पर हाईकोर्ट का ऐक्शन
बिहारी लाल तिर्की की याचिका पर पहले भी रायगढ़ की जिला स्तरीय छानबीन समिति को जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन दो साल से ज्यादा समय बीतने के बावजूद समिति ने कोई निर्णय नहीं लिया।
इसके बाद, तिर्की ने फिर से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधीश नरेश कुमार चंद्रवंशी ने इस मामले पर जल्द सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं और 90 दिनों के अंदर फैसला देने को कहा है।
जिला प्रशासन पर आरोप
तिर्की का आरोप है कि जिला प्रशासन जानबूझकर इस मामले को लंबित रखे हुए है, जिससे विधायक के जाति प्रमाणपत्र की जांच में देरी हो रही है।
जाति प्रमाणपत्र में अनियमितताएं
बिहारी लाल तिर्की ने आरोप लगाया हैं कि विधायक रामकुमार टोप्पो का जाति प्रमाणपत्र बिना सेटलमेंट के तैयार किया गया है, जो सरलीकरण के नियमों का उल्लंघन करता है।
उनका कहना है कि इस प्रमाणपत्र के लिए आवश्यक नियमों की अनदेखी की गई है, और जिला प्रशासन इस गड़बड़ी को छिपाने के लिए जांच में देरी कर रहा है।
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