हाईकोर्ट की शिक्षा विभाग को चेतावनी: 4 हफ्ते में करें आदेश का पालन, वरना भुगतें अवमानना का अंजाम!
News In Short
- हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग को चार हफ्ते में आदेश पालन का निर्देश दिया।
- आदेश न मानने पर विभाग के खिलाफ अवमानना कार्रवाई होगी।
- नंदिनी घृतलहरे 2013 में बर्खास्त, 2022 में दोषमुक्त हुईं।
- विभाग ने बर्खास्तगी अवधि को सेवा में शामिल नहीं किया।
- हाई कोर्ट ने पहले भी दो महीने में निर्णय का निर्देश दिया था।
News In Details
Raipur. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक एलबी नंदिनी घृतलहरे की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग और संचालक लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को चेतावनी दी है। जस्टिस ए.के. प्रसाद की सिंगल बेंच ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता शिक्षिका की याचिका पर पूर्व में दिए गए आदेश का चार सप्ताह के भीतर परिपालन किया जाए। कोर्ट ने साफ हिदायत दी कि तय समयावधि में आदेश का पालन नहीं होने पर विभाग के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।
मामला क्या है?
एलबी नंदिनी घृतलहरे रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक की शासकीय प्राथमिक शाला छतौना में शिक्षक हैं। उनकी पहली नियुक्ति 12 जुलाई 2008 को जनपद पंचायत गुरूर, जिला बालोद में हुई थी। वर्ष 2011 में उनके खिलाफ एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी, जिसके चलते 5 फरवरी 2013 को उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
हालांकि, वर्ष 2022 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें आपराधिक प्रकरण से दोषमुक्त कर दिया। दोषमुक्त होने के बाद नंदिनी घृतलहरे ने स्कूल शिक्षा विभाग को आवेदन देकर सेवा में बहाली की मांग की।
संविलियन गणना को लेकर विवाद
शिक्षा विभाग ने उन्हें बहाल करते हुए प्राथमिक शाला छतौना में पदस्थ किया। विभाग ने बर्खास्तगी से पुनः कार्यभार ग्रहण करने तक की अवधि को सेवा अवधि में शामिल न करने का निर्णय लिया और संविलियन तिथि 25 नवंबर 2024 से लागू की।
इस निर्णय को चुनौती देते हुए नंदिनी ने हाई कोर्ट (CG High Court) में याचिका दायर की और अपने अधिवक्ता के माध्यम से 1 जुलाई 2018 से संविलियन की मांग की। हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को दो महीने के भीतर निर्णय लेने और आदेश पारित करने का निर्देश दिया था।
आदेश की अवहेलना पर अवमानना याचिका
हालांकि, हाई कोर्ट के निर्देश के बावजूद विभाग ने आदेश का पालन नहीं किया। इसके बाद शिक्षिका ने न्यायालय में अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के बाद जस्टिस ए.के. प्रसाद ने स्पष्ट किया कि विभाग को आदेश का पालन चार सप्ताह के भीतर करना होगा, अन्यथा कानूनी कार्रवाई से बचना मुश्किल होगा।
निष्कर्ष
यह मामला शिक्षा विभाग के आदेशों की समय पर निष्पादन की अहमियत और शिक्षक संविलियन विवाद को उजागर करता है। हाई कोर्ट का यह सख्त रुख यह संकेत देता है कि सरकारी आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह खबरें भी पढ़ें...
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: टीचर संविलियन से पहले की सेवा भी मान्य,डेढ़ लाख शिक्षकों को मिलेगा फायदा
बीजेपी नेताओं को याद दिलाएंगे विधानसभा चुनाव के समय किया संविलियन का वादा