दिल्ली जैसा प्रदूषण नहीं चाहिए... जंगलों के 10 KM दायरे में आरा मिलें बैन

Harrison Masih | Jul 07, 2026, 18:24 IST
आरा मिलें बैन 2026
हाईकोर्ट ने जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के 10 किलोमीटर दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने वाली सरकार की अधिसूचना को वैध ठहराया है। कोर्ट ने आरा मिल संचालकों की 19 याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि दिल्ली जैसी प्रदूषण की स्थिति नहीं चाहिए।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े एक अहम मामले में सरकार के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित करने वाली सरकारी अधिसूचना को सही ठहराया है। इस फैसले के बाद अब इस दायरे में संचालित सभी आरा मिलों (सॉ मिल) पर रोक जारी रहेगी।



हाईकोर्ट ने इस मामले में आरा मिल संचालकों की ओर से दायर की गई कुल 19 याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण और जंगलों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों में कोई अनुचितता नहीं है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य को दिल्ली जैसी प्रदूषण की स्थिति नहीं चाहिए।



सरकार ने सितंबर 2025 में जारी की थी अधिसूचना

राज्य सरकार ने 25 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम, 1984 की धारा 5(1) के तहत अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार अधिसूचित जंगलों, संरक्षित क्षेत्रों और वन क्षेत्रों की सीमा से हवाई दूरी के आधार पर 10 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया गया था।



इस फैसले का उद्देश्य वन क्षेत्रों के आसपास पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना और अवैध लकड़ी कटाई सहित वन संसाधनों के दोहन पर नियंत्रण करना बताया गया था।



वन विभाग ने आरा मिलों पर की कार्रवाई

अधिसूचना लागू होने के बाद वन विभाग ने 10 किलोमीटर के प्रतिबंधित दायरे में आने वाली आरा मिलों की जांच शुरू की थी। इसके बाद विभाग ने ऐसी आरा मिलों को बंद करने और उनके लाइसेंस के नवीनीकरण पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए थे।



सरकारी आदेश के बाद कई आरा मिल संचालकों को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इसके विरोध में संचालकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।



आरा मिल संचालकों ने उठाए थे सवाल

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि सरकार का यह फैसला उनके व्यवसाय और आजीविका को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने प्रतिबंधित क्षेत्र तय करने के तरीके और 10 किलोमीटर की सीमा को चुनौती दी थी।



आरा मिल संचालकों ने कोर्ट से मांग की थी कि सरकार के आदेश पर रोक लगाई जाए और उन्हें पहले की तरह संचालन की अनुमति दी जाए।



हाईकोर्ट ने माना पर्यावरण संरक्षण जरूरी

मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने माना कि वन क्षेत्रों के आसपास पर्यावरण संरक्षण के लिए बफर जोन बनाना आवश्यक है।



कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए जंगलों के आसपास की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए नियमों को गलत नहीं माना जा सकता।



अब 10 किमी क्षेत्र में नहीं चल सकेंगी आरा मिलें

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब अधिसूचित जंगलों और संरक्षित क्षेत्रों से 10 किलोमीटर की हवाई दूरी के भीतर आने वाली आरा मिलों को बंद रहना होगा। साथ ही ऐसे क्षेत्रों में नए लाइसेंस या पुराने लाइसेंस के नवीनीकरण पर भी रोक जारी रहेगी।



फैसले का असर

हाईकोर्ट के इस निर्णय से राज्यभर में संचालित कई आरा मिलों पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने इसे जंगलों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।



दूसरी ओर, प्रभावित आरा मिल संचालकों के सामने अब अपने कारोबार को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सरकार और वन विभाग के लिए आदेश को लागू करना आसान हो जाएगा।



निष्कर्ष:

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (CG High Court) का यह फैसला पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक गतिविधियों के बीच संतुलन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब जंगलों के आसपास 10 किलोमीटर के दायरे में आरा मिलों के संचालन पर पूरी तरह रोक लागू रहेगी।



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