हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : सौतेली मां की जिम्मेदारी से नहीं भाग सकते तीनों बेटे
समझें क्या है पूरा मामला
- सौतेली मां को भी हक, बेटों को देना होगा खर्च
- 77 साल की मां के पक्ष में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
- सौतेला रिश्ता नहीं बनेगा जिम्मेदारी से बचने की वजह
- तीन बेटों को हर महीने देने होंगे 9 हजार रुपये
- हाईकोर्ट बोला, अकेली मां को नहीं छोड़ सकते बेटे
Bilaspur। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बुजुर्ग महिला के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि सिर्फ सौतेली मां होने से किसी महिला का भरण-पोषण पाने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता। हाईकोर्ट ने 77 साल की संतानहीन विधवा महिला को राहत देते हुए उसके तीन सौतेले बेटों को हर महीने खर्च देने का आदेश दिया है।
अदालत के आदेश के मुताबिक तीनों बेटों को सितंबर 2026 से हर महीने 3-3 हजार रुपये देने होंगे। यानी महिला को कुल 9 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
पति की मौत के बाद बदले हालात
यह मामला बिलासपुर की रहने वाली सनकैया बाई का है। महिला के पति पुरुषोत्तम सोनी की साल 2021 में मौत हो गई थी। पति की मौत के बाद महिला का कहना था कि तीनों सौतेले बेटों ने उसकी देखभाल करना बंद कर दिया।
महिला ने अदालत में बताया कि उसकी खुद की कोई संतान नहीं है। उसके पास कमाई का कोई साधन भी नहीं है। फिलहाल वह अपनी विधवा बेटी के साथ रहकर जीवन गुजार रही है।
बेटों की परवरिश का दिया हवाला
सनकैया बाई ने कोर्ट को बताया कि तीनों सौतेले बेटे बचपन से उसके साथ रहे हैं। उसने उनकी देखभाल और परवरिश की है। पति के रहते बेटे उसकी जिम्मेदारी उठाते थे, लेकिन पति की मौत के बाद स्थिति बदल गई।
महिला ने यह भी कहा कि बेटे परिवार की जमीन से होने वाली आय का फायदा उठा रहे हैं। उसने अपनी बात के समर्थन में कुछ दस्तावेज भी अदालत में पेश किए थे।
बेटों ने नहीं दिया जवाब
महिला ने भरण-पोषण के लिए फैमिली कोर्ट में आवेदन लगाया था। कोर्ट ने तीनों बेटों को नोटिस भेजा था, लेकिन उन्होंने अपना पक्ष नहीं रखा। इसके बाद फैमिली कोर्ट ने उन्हें एकतरफा कर दिया था। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा। वहां भी तीनों बेटों को सुनवाई का मौका दिया गया, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए।
हाईकोर्ट ने पलटा पुराना फैसला
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के 5 अप्रैल 2025 के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला की उम्र, विधवा होने की स्थिति और आर्थिक परेशानी को ध्यान में रखना जरूरी था। कोर्ट ने साफ किया कि केवल सौतेला रिश्ता होने के कारण किसी महिला को भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि संतानहीन सौतेली मां, जो अकेली है और जिसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है, उचित परिस्थितियों में सौतेले बेटे से भरण-पोषण मांग सकती है। हाईकोर्ट ने अपने पुराने फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें अकेली सौतेली मां को भरण-पोषण का अधिकार दिया गया था।
अब हर महीने देना होगा खर्च
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीनों बेटों को अब नियमित रूप से महिला को पैसे देने होंगे। इसके अलावा यदि कोई पुरानी राशि बाकी है तो उसका भुगतान भी नियमों के अनुसार करना होगा। इस फैसले से साफ संदेश गया है कि रिश्ते में सौतेलापन होने से बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती।
ये खबरें भी पढ़े....
MP हाईकोर्ट में 1174 पदों पर बंपर भर्ती: सहायक ग्रेड-III के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
सरकारी नौकरी पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला, नहीं मिलेगी अनुकंपा नियुक्ति
पथराव के बाद बिलासपुर में धारा 144 लागू, सोशल मीडिया कमेंट से सुलगा शहर
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद खत्म, अब बस्तर के नेताओं की घटेगी सुरक्षा