बादाम कांड में फाइल दबाने वाले दो अधिकारी सस्पेंड, कमिश्नर ने की बड़ी कार्रवाई
NEWS IN SHORT
- बिलासपुर में अधिकारियों पर आयुक्त की ने की बड़ी कार्रवाई
- नामांतरण फाइल को सालभर तक दबाकर रखा गया था
- युवक का बादाम प्रदर्शन, वीडियो से खुला मामला
- आयुक्त ने दो अधिकारियों को तत्काल हटाया
- सोशल मिडिया ने सरकारी मनमानी को उजागर किया
NEWS IN DETAIL
Bilaspur। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल (Chhattisgarh Housing Board) में फाइलों को दबाकर रखने वाले अधिकारियों पर आयुक्त ने कड़ी कार्रवाई की है।
तिफरा अभिलाषा परिसर के एक फ्लैट के नामांतरण के मामले में कार्यपालन अभियंता (ईई) और एक वरिष्ठ सहायक को तत्काल प्रभाव से उनके पद से हटा (Suspended )दिया गया।
पीड़ित युवक ने किया अनोखा प्रदर्शन
यह कार्रवाई उस समय की गई जब पीड़ित युवक तोरण साहू ने अधिकारियों से (जमीनों का नामांतरण)नामांतरण के काम में हो रही देरी का विरोध करते हुए दफ्तर में एक अनोखा प्रदर्शन किया।
तोरण ने अधिकारियों की टेबल पर बादाम बिखेरते हुए कहा कि साहब, बादाम खाइए ताकि याददाश्त बढ़े और काम समय पर हो सके। वीडियो इंटरनेट पर(सोशल मीडिया वायरल वीडियो) वायरल होते ही विभाग में हड़कंप मच गया।
नामांतरण की फाइल एक साल से लटकी थी
(छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड)मामला तिफरा स्थित ईडब्ल्यूएस फ्लैट क्रमांक 41/483 से जुड़ा है। तोरण साहू ने 17 मार्च 2025 को फ्लैट का नामांतरण करने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन जांच में यह सामने आया
कि संबंधित पत्र 11 नवंबर 2025 को ही तैयार हो चुका था और उस पर संपदा अधिकारी के हस्ताक्षर भी हो गए थे। बावजूद इसके, अधिकारियों ने इस पत्र को फाइल में दबाकर रखा और हितग्राही को नहीं भेजा।
एक साल तक दफ्तर के चक्कर काटने के बाद, युवक ने किया विरोध
तोरण साहू एक साल से अधिक समय तक दफ्तर के चक्कर काटते रहे, लेकिन उनकी फाइल पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद, उन्होंने 17 अप्रैल 2026 को अधिकारियों को
बादाम भेंट कर उनकी याददाश्त बढ़ाने की नसीहत दी। इस प्रदर्शन के बाद इंटरनेट मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद रायपुर मुख्यालय ने मामले का संज्ञान लिया।
आयुक्त ने अधिकारियों को किया निलंबित
आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने 18 अप्रैल को इस मामले की जांच की और दोषी पाए गए प्रभारी संपदा अधिकारी (ईई) एलपी बंजारे और वरिष्ठ सहायक पूनम बंजारे को उनके पद से हटाकर नवा रायपुर स्थित मुख्यालय में अटैच कर दिया।
फाइल सिस्टम का खेल, डिजिटल युग में भी जारी
यह घटना इस बात की गवाही है कि जब शासन डिजिटल सेवाओं की बात करता है, तब भी कुछ सरकारी दफ्तरों में पुराने फाइल सिस्टम का खेल जारी रहता है। यह मामला यह साबित करता है
कि बिना इंटरनेट मीडिया के दबाव के शायद यह पत्र कभी बाहर न आता। आयुक्त ने अपने आदेश में यह साफ किया है कि पत्र जावक होने के बावजूद हितग्राही को न भेजना गंभीर लापरवाही है।
इंटरनेट मीडिया ने निभाई भूमिका
इस घटना से यह भी साबित होता है कि आज इंटरनेट मीडिया एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जो सरकारी दफ्तरों की मनमानी को उजागर करने में मदद करता है।
तोरण साहू के वीडियो ने बिलासपुर कार्यालय की अंदरूनी गड़बड़ी को सामने लाया और अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने के लिए मजबूर कर दिया।
यह खबरें भी पढ़े...
बिलासपुर मस्तूरी गोलीकांड : आधी रात कांग्रेस नेता के घर पुलिस की दबिश, पर मास्टरमाइंड अब भी फरार