नक्सल मोर्चे से आबकारी आयुक्त तक, आईएएस पदुम सिंह एलमा
छत्तीसगढ़ की नौकरशाही में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान केवल सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में किए गए कामों से बनती है। आईएएस पदुम सिंह एलमा उन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं। राज्य सिविल सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का उनका सफर संघर्ष, अनुभव और जमीनी प्रशासन की समझ का एक दिलचस्प उदाहरण है। धुर नक्सल प्रभावित नारायणपुर से लेकर कृषि प्रधान धमतरी और बेमेतरा तक, महिला एवं बाल विकास से लेकर जनजातीय विकास और अब आबकारी विभाग तक उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। मई 2026 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें आबकारी आयुक्त की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। यह नियुक्ति उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव और विभिन्न विभागों में निभाई गई जिम्मेदारियों का परिणाम मानी जाती है।
राज्य सेवा से आईएएस बनने तक का सफर
पदुम सिंह एलमा छत्तीसगढ़ कैडर के वर्ष 2010 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। वे सीधे संघ लोक सेवा आयोग के माध्यम से नहीं, बल्कि राज्य सिविल सेवा से पदोन्नत होकर भारतीय प्रशासनिक सेवा में पहुंचे हैं। राज्य सेवा में काम करने के दौरान उन्हें ग्रामीण प्रशासन, पंचायत व्यवस्था और स्थानीय विकास योजनाओं का व्यापक अनुभव मिला। यही अनुभव बाद में आईएएस अधिकारी के रूप में उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। प्रशासनिक हलकों में उन्हें शांत स्वभाव, जमीनी समझ और बिना अनावश्यक प्रचार के काम करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
पंचायतों से शुरू हुई प्रशासनिक जिम्मेदारी
अपने प्रशासनिक करियर के शुरुआती दौर में पदुम सिंह एलमा ने विभिन्न जिलों में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में काम किया। धमतरी जिला पंचायत सहित कई स्थानों पर उन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं और पंचायत व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। यहीं से उन्हें गांवों की वास्तविक समस्याओं, किसानों की जरूरतों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की गहरी समझ मिली। जिला स्तर के अनुभव के बाद उन्हें श्रम विभाग में अपर आयुक्त की जिम्मेदारी सौंपी गई। वर्ष 2018 तक वे इस पद पर कार्यरत रहे। इस दौरान उन्होंने श्रमिक कल्याण योजनाओं और विभागीय प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया।
नारायणपुर कलेक्टर भरोसे का सवाल
दिसंबर 2018 में छत्तीसगढ़ में नई सरकार बनने के बाद हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में पदुम सिंह एलमा को पहली बार नारायणपुर जिले का कलेक्टर बनाया गया। नारायणपुर केवल एक जिला नहीं, बल्कि देश के सबसे संवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाकों में से एक है। अबूझमाड़ के दुर्गम पहाड़, दूरस्थ गांव और विकास की चुनौतियां किसी भी अधिकारी के लिए कठिन परीक्षा होती हैं। कलेक्टर के रूप में उन्होंने सरकारी योजनाओं को दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने और प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच विश्वास बढ़ाने की दिशा में काम किया। उनके कार्यकाल में विकास कार्यों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया गया। करीब ढाई वर्ष तक उन्होंने इस चुनौतीपूर्ण जिले का नेतृत्व किया। जून 2021 में उन्हें धमतरी जिले का कलेक्टर बनाया गया। कृषि प्रधान इस जिले में उनकी प्राथमिकता किसानों से जुड़े मुद्दों, सिंचाई व्यवस्था, ग्रामीण विकास और प्रशासनिक सेवाओं को बेहतर बनाना रहा। धमतरी में उन्होंने स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने का प्रयास किया।
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक
दिसंबर 2022 में पदुम सिंह एलमा को छत्तीसगढ़ राज्य कृषि विपणन बोर्ड का प्रबंध संचालक बनाया गया। मंडी बोर्ड किसानों और कृषि विपणन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कृषि उपज के विपणन और मंडी व्यवस्था के संचालन की जिम्मेदारी संभाली। जिला प्रशासन के अनुभव ने उन्हें किसानों की समस्याओं को समझने और नीतियों को व्यावहारिक रूप देने में मदद की। वर्ष 2023 में उन्हें बेमेतरा जिले का कलेक्टर बनाया गया। इस दौरान जिले में सामाजिक, आर्थिक सर्वेक्षण, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी उनके पास रही। प्रशासनिक स्तर पर विभिन्न योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने का प्रयास उनके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा।
बड़े विभाग, बड़ी भूमिका
बेमेतरा कलेक्टर के बाद उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग का संचालक बनाया गया। इस विभाग में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, कुपोषण नियंत्रण और बच्चों से जुड़ी विभिन्न सरकारी योजनाओं के संचालन की जिम्मेदारी निभाई। सामाजिक विकास से जुड़े इस विभाग में उनका अनुभव प्रशासन के एक अलग आयाम को दर्शाता है। पदुम सिंह एलमा को बाद में छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड का प्रबंध संचालक बनाया गया। इसके साथ ही उन्हें स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया। इन संस्थाओं के माध्यम से राज्य की विपणन और वितरण व्यवस्था के संचालन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें अनुसूचित जनजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान में आयुक्त तथा सदस्य सचिव की जिम्मेदारी मिली।
जनजातीय विकास और अनुसंधान से जुड़े इस पद पर उन्होंने आदिवासी समुदायों के विकास से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का संचालन किया। वर्ष 2025 में भारत सरकार के धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के राज्य स्तरीय क्रियान्वयन और सामुदायिक वन अधिकारों से संबंधित कार्यशालाओं के संचालन में उनकी सक्रिय भूमिका रही।
आबकारी आयुक्त के रूप में नई पारी
मई 2026 में छत्तीसगढ़ शासन ने बड़े प्रशासनिक फेरबदल के दौरान पदुम सिंह एलमा को आबकारी आयुक्त नियुक्त किया। आबकारी विभाग राज्य सरकार के सबसे महत्वपूर्ण राजस्व विभागों में से एक माना जाता है। विभाग के माध्यम से शराब नीति, राजस्व संग्रह, लाइसेंस व्यवस्था और अवैध कारोबार पर नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का संचालन किया जाता है। एक ऐसे अधिकारी के रूप में जिनके पास जिला प्रशासन, कृषि, महिला एवं बाल विकास, जनजातीय विकास और विपणन संस्थाओं का अनुभव है, आबकारी विभाग की जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है।
दमदार कार्यशैली
आईएएस पदुम सिंह एलमा की कार्यशैली की कुछ प्रमुख विशेषताएं उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग बनाती हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करने का अनुभव उन्हें कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता देता है। ग्रामीण और किसान केंद्रित सोच उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। विभिन्न विभागों में काम करने के कारण उन्हें सामाजिक विकास, कृषि, जनजातीय कल्याण और राजस्व प्रशासन का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ है। प्रशासनिक हलकों में उनकी पहचान एक शांत, संतुलित और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी के रूप में की जाती है। राज्य सिविल सेवा से आईएएस बनने और लगातार चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने का उनका सफर यह बताता है कि प्रशासन में अनुभव, धैर्य और जमीनी समझ किसी भी अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी होती है। आज आबकारी आयुक्त के रूप में उनके सामने नई चुनौतियां और नई अपेक्षाएं हैं, लेकिन उनका अब तक का प्रशासनिक अनुभव इस नई जिम्मेदारी के लिए मजबूत आधार माना जा रहा है।
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