जंगलों की चुनौती से एनआईए तक: आईपीएस डी श्रवण की दिलचस्प कहानी

Harrison Masih | Jun 03, 2026, 17:57 IST
Share
ips-d-shravan-biography
ips-d-shravan-biography

आईपीएस अधिकारी डी. श्रवण को छत्तीसगढ़ पुलिस सेवा में जमीनी पुलिसिंग, नक्सल विरोधी अभियानों और नेतृत्व क्षमता का उदाहरण माना जाता है। बस्तर के घने जंगलों से लेकर एनआईए के आईजी के कार्यालय तक उनका सफर साहस, चुनौती और नेतृत्व से भरा रहा है।

छत्तीसगढ़ के पुलिस महकमे में कुछ अफसर ऐसे हैं, जिनकी पहचान केवल पद से नहीं बल्कि उनके काम और मैदान में बिताए गए समय से बनती है। 2008 बैच के आईपीएस अधिकारी डी. श्रवण भी उन्हीं अफसरों में शामिल हैं। नक्सल प्रभावित इलाकों में लंबे समय तक काम करने वाले डी. श्रवण ने अपने करियर में कई कठिन जिम्मेदारियां संभाली हैं। आज वे एनआईए में आईजी रैंक के अधिकारी हैं, लेकिन उनकी यात्रा किसी सीधी सड़क की तरह नहीं रही। इसमें संघर्ष, चुनौतियां, नेतृत्व और जमीनी अनुभव का लंबा सफर शामिल है।

आंध्रप्रदेश से शुरू हुआ सफर

डी. श्रवण का पूरा नाम दावुलुरी श्रवण है। उनका जन्म 23 फरवरी को आंध्र प्रदेश में हुआ। शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया और एमए के साथ-साथ एमफिल की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को पास करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की और आखिरकार सफलता हासिल करते हुए भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में चयनित हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला, जो उस समय देश के सबसे चुनौतीपूर्ण कैडरों में से एक माना जाता था।

जगदलपुर से शुरू हुई पुलिसिंग की असली पाठशाला

22 दिसंबर 2008 को आईपीएस सेवा ज्वाइन करने के बाद डी. श्रवण ने हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के रूप में जगदलपुर में हुई। यह वह दौर था जब बस्तर नक्सल गतिविधियों के कारण लगातार चर्चा में रहता था। जगदलपुर कोतवाली में थाना प्रभारी के रूप में काम करते हुए उन्होंने जमीनी पुलिसिंग को बेहद करीब से समझा। बाद में उन्हें केशकाल के एसडीओपी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई, जहां कानून-व्यवस्था और नक्सल चुनौती दोनों से एक साथ जूझना पड़ता था।



IPS D Shravan
IPS D Shravan


नक्सल मोर्चे पर साबित की नेतृत्व क्षमता

डी. श्रवण के करियर का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में उनकी तैनाती रही। सुकमा जैसे संवेदनशील जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में लगभग दो वर्षों तक उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। यह वही इलाका है जिसे देश के सबसे कठिन सुरक्षा क्षेत्रों में गिना जाता है। सुकमा में रहते हुए उन्होंने सुरक्षा अभियानों, स्थानीय लोगों के साथ संवाद और पुलिसिंग के नए तरीकों पर काम किया। नक्सल चुनौती से निपटने के लिए केवल हथियार ही नहीं, बल्कि भरोसा और रणनीति भी जरूरी होती है। इस संतुलन को बनाए रखने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।

कई जिलों की कमान संभाली

डी. श्रवण का प्रशासनिक अनुभव केवल बस्तर तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया। कोंडागांव, कोरबा, मुंगेली, राजनांदगांव और जगदलपुर जैसे जिलों में उन्होंने कानून-व्यवस्था की कमान संभाली। हर जिले की अपनी अलग चुनौतियां थीं। कहीं औद्योगिक गतिविधियां थीं, कहीं ग्रामीण समस्याएं और कहीं नक्सल प्रभाव। इन सभी परिस्थितियों में उन्होंने पुलिस प्रशासन को नेतृत्व दिया और अलग-अलग परिस्थितियों में काम करने की अपनी क्षमता साबित की।

मैदान से लेकर फोर्स मैनेजमेंट तक

जिलों में एसपी रहने के बाद डी. श्रवण ने रायगढ़ में छठवीं वाहिनी के सेनानी के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। यहां उनका काम केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि पुलिस बल के संचालन, प्रशिक्षण और संसाधनों के बेहतर उपयोग से भी जुड़ा था। यह भूमिका किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यहां नेतृत्व का दायरा पूरे बल के प्रबंधन तक पहुंच जाता है। इसके बाद डी. श्रवण डीआईजी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (सीएएफ), हेड क्वार्टर सेंटर, रायपुर के पद पर कार्यरत रहे। यह जिम्मेदारी राज्य की सशस्त्र पुलिस इकाइयों के संचालन और समन्वय से जुड़ी है। वर्तमान में वे एनआईए दिल्ली में आईजी के पद पर हैं। बस्तर के जंगलों से लेकर आईजी तक का यह सफर बताता है कि पुलिस सेवा में पहचान केवल रैंक से नहीं, बल्कि उन चुनौतियों से बनती है जिनका सामना एक अधिकारी मैदान में करता है। डी. श्रवण का करियर इसी जमीनी अनुभव और नेतृत्व की कहानी है।

यह खबरें भी पढ़ें...

सरकारी स्कूल से रायपुर पुलिस कमिश्नर तक…सादगी से भरी आईपीएस डॉ. संजीव शुक्ला की कहानी

रायपुर को मिला पहला पुलिस कमिश्नर, संजीव शुक्ला बने आयुक्त, 15 IPS अफसरों के तबादले

बस्तर से दिल्ली तक आईपीएस जितेंद्र सिंह मीणा का दमदार सफर

रेगिस्तान से रेड जोन तक: IPS बद्री नारायण मीणा की दमदार कहानी



Tags:
  • एनआईए
  • यूपीएससी
  • आईपीएस
  • छत्तीसगढ़ कैडर
  • आईपीएस डी श्रवण
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा