आईएएस प्रभात मलिक: कानपुर IIT से UPSC तक… ऐसे बना हरियाणा का बेटा छत्तीसगढ़ का युवा कलेक्टर
छत्तीसगढ़ के युवा आईएएस अफसरों की बात होती है तो प्रभात मलिक का नाम तेजी से उभरता है। शांत स्वभाव, तकनीकी बैकग्राउंड और प्रशासनिक समझ के कारण वे कम समय में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। हरियाणा के एक शिक्षित परिवार से निकलकर आईआईटी तक पहुंचना और फिर यूपीएससी में शानदार सफलता हासिल कर आईएएस बनना। प्रभात मलिक की कहानी मेहनत, अनुशासन और लगातार खुद को बेहतर बनाने की कहानी है। वर्तमान में वे उद्योग विभाग में डायरेक्टर है। इससे पहले वे रायपुर नगर निगम आयुक्त और इसके बाद गरियाबंद और महासमुंद जिले के कलेक्टर रहे हैं। प्रभात मलिक युवा अफसरों की उस नई पीढ़ी का चेहरा माने जाते हैं, जो तकनीक और प्रशासन दोनों को साथ लेकर चलना चाहती है।
हरियाणा के गांव से गुड़गांव तक का सफर
प्रभात मलिक मूलतः हरियाणा के सोनीपत जिले के भैंसवाल गांव के रहने वाले हैं। हालांकि उनके माता-पिता सरकारी सेवा में थे, इसलिए परिवार बाद में गुड़गांव शिफ्ट हो गया। वहीं के सिविल लाइंस इलाके में उनका बचपन बीता। 28 मार्च 1990 को जन्मे प्रभात मलिक बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज थे। परिवार का माहौल भी पूरी तरह शिक्षा और प्रशासन से जुड़ा हुआ था। यही कारण रहा कि बचपन से ही उनमें अनुशासन और प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित हो गई थी।
उनकी शुरुआती पढ़ाई डीपीएस मारुति कुंज से हुई। इसके बाद उन्होंने भिवानी के हलवासिया विद्या विहार स्कूल से आगे की शिक्षा पूरी की। गणित विषय में उनकी विशेष रुचि थी। 11वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली के हरियाणा शक्ति सीनियर सेकेंडरी स्कूल से की। स्कूल शिक्षा पूरी होने के बाद उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी कानपुर में हुआ, जहां से उन्होंने बीटेक की डिग्री हासिल की।आईआईटी का माहौल उनके व्यक्तित्व को नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
परिवार से मिली प्रशासनिक सोच
प्रभात मलिक ऐसे परिवार से आते हैं जहां शिक्षा और सरकारी सेवा को हमेशा महत्व दिया गया। उनके पिता एमएस मलिक भारतीय वन सेवा के अधिकारी रहे हैं। वहीं उनकी मां सुनीता मलिक अंग्रेजी की प्रोफेसर हैं। उनकी छोटी बहन प्रतिभा मलिक आर्किटेक्ट इंजीनियर हैं। परिवार के कई सदस्य उच्च शिक्षा और सरकारी सेवाओं से जुड़े रहे हैं। यही कारण था कि प्रभात मलिक के भीतर भी समाज और प्रशासन को करीब से समझने की सोच विकसित हुई।
पहली बार आईआरएस, दूसरी बार आईएएस
आईआईटी से बीटेक करने के बाद प्रभात मलिक ने कॉर्पोरेट दुनिया की बजाय यूपीएससी का रास्ता चुना। उन्होंने पूरी तैयारी के साथ सिविल सेवा परीक्षा दी और पहले ही प्रयास में शानदार सफलता हासिल की। अपने पहले अटेम्प्ट में उन्हें ऑल इंडिया 270वीं रैंक मिली और उनका चयन भारतीय राजस्व सेवा यानी आईआरएस के लिए हुआ। इसके बाद उन्होंने नागपुर में ट्रेनिंग शुरू कर दी, लेकिन उनका लक्ष्य इससे बड़ा था। आईआरएस की ट्रेनिंग के दौरान भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और दोबारा यूपीएससी परीक्षा दी। इस बार उन्होंने और बेहतर प्रदर्शन करते हुए देशभर में 68वीं रैंक हासिल की और उनका चयन आईएएस के लिए हो गया। यही वह मोड़ था जिसने प्रभात मलिक को भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचा दिया।
छत्तीसगढ़ कैडर और प्रशासनिक सफर
7 सितंबर 2015 को प्रभात मलिक ने आधिकारिक रूप से आईएएस सेवा ज्वाइन की। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला। मसूरी स्थित अकादमी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद वे छत्तीसगढ़ पहुंचे। उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग रायगढ़ जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में हुई। यहां उन्होंने जमीनी प्रशासन को करीब से समझा। इसके बाद केंद्र सरकार के नगरीय प्रशासन विभाग में अवर सचिव के रूप में भी उन्होंने प्रशिक्षण लिया। छत्तीसगढ़ में वे अलग-अलग जिम्मेदारियों पर काम करते रहे। एसडीएम रहते हुए उन्होंने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों को संभाला। बाद में रायपुर नगर निगम कमिश्नर के रूप में उन्होंने शहरी प्रशासन की जिम्मेदारी संभाली। बतौर कलेक्टर उनकी पहली पोस्टिंग गरियाबंद जिले में हुई। यहां उन्होंने ग्रामीण विकास, शिक्षा और प्रशासनिक मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान दिया। इसके बाद वे महासमुंद जिले के कलेक्टर रहे।
युवा अफसरों की नई पीढ़ी का चेहरा
प्रभात मलिक उन युवा आईएएस अफसरों में गिने जाते हैं जो प्रशासन में तकनीक और आधुनिक प्रबंधन को महत्व देते हैं। आईआईटी बैकग्राउंड होने की वजह से उनकी कार्यशैली में डेटा, मॉनिटरिंग और सिस्टम सुधार की झलक दिखाई देती है। कम उम्र में बड़ी जिम्मेदारियां संभालने वाले प्रभात मलिक की यात्रा यह दिखाती है कि लगातार मेहनत और स्पष्ट लक्ष्य के दम पर कोई भी युवा देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर सकता है। हरियाणा के एक साधारण परिवार से निकलकर छत्तीसगढ़ के कलेक्टर बनने तक का उनका सफर आज कई युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुका है।
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