फील्ड पोस्टिंग से प्रशासनिक अनुभव तक... आईएएस रणबीर शर्मा की कहानी
छत्तीसगढ़ की प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ अफसर ऐसे हैं, जिनके करियर में फील्ड प्रशासन से लेकर शासन के महत्वपूर्ण विभागों तक काम करने का अनुभव दिखाई देता है। आईएएस रणबीर शर्मा भी ऐसे ही अधिकारियों में शामिल हैं। हरियाणा से निकलकर छत्तीसगढ़ कैडर में पहुंचे रणबीर शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन मंजिल प्रशासनिक सेवा बनी। आज वे बेमेतरा जिले के कलेक्टर के रूप में जिले की प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
प्रशासनिक सेवा की राह पकड़ी
रणबीर शर्मा का जन्म 1981 को हुआ। वे मूल रूप से हरियाणा के रहने वाले हैं। उन्होंने भौतिकी विषय से बीएससी की पढ़ाई की। इसके बाद बीएड किया। यानी उनकी शुरुआती शैक्षणिक पृष्ठभूमि विज्ञान और शिक्षा से जुड़ी रही। आगे चलकर उन्होंने प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाया। रणबीर शर्मा ने वर्ष 2011 में संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की परीक्षा सफलतापूर्वक पास की। इसके बाद उन्हें 2012 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी के रूप में छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 3 सितंबर 2012 को आईएएस की सेवा ज्वाइन की।
बिलासपुर से शुरू हुआ फील्ड प्रशासन का सफर
आईएएस बनने के बाद रणबीर शर्मा को फील्ड ट्रेनिंग के लिए बिलासपुर जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में पहली पोस्टिंग मिली। प्रशासनिक सेवा के शुरुआती दौर में यह अनुभव उनके लिए महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि फील्ड पोस्टिंग किसी भी अधिकारी को सरकारी योजनाओं और नीतियों को जमीन पर लागू करने की वास्तविक चुनौतियों से रूबरू कराती है। इसके बाद उन्हें कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर अनुविभाग में एसडीएम की जिम्मेदारी मिली। यहां उन्होंने सीधे तौर पर अनुविभागीय प्रशासन की कमान संभाली। एसडीएम के रूप में काम करने का अनुभव उनके प्रशासनिक करियर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।
मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभाली
फील्ड प्रशासन के बाद रणबीर शर्मा की पोस्टिंग शासन स्तर पर हुई। वे रायपुर के स्कूल शिक्षा विभाग में अवर सचिव रहे। इस दौरान उन्हें विभागीय कामकाज और शासन स्तर पर नीतियों के क्रियान्वयन को करीब से समझने का अवसर मिला। यानी उनके करियर में एक तरफ ग्रामीण और मैदानी प्रशासन का अनुभव जुड़ता गया, तो दूसरी तरफ मंत्रालय में शासन की कार्यप्रणाली को समझने का अवसर भी मिला। यही अनुभव आगे की महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए उनकी प्रोफाइल को मजबूत करता गया।
सूरजपुर की कलेक्टरी ने बढ़ाया अनुभव
रणबीर शर्मा को बाद में सूरजपुर जिले का कलेक्टर बनाया गया। कलेक्टर के रूप में उन्हें जिले की कानून-व्यवस्था, विकास कार्यों, सरकारी योजनाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी व्यापक जिम्मेदारियां संभालने का मौका मिला। किसी जिले का कलेक्टर होना प्रशासनिक करियर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में माना जाता है। यहां अधिकारी को सरकार की योजनाओं और फैसलों को सीधे जमीन पर लागू कराने के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों और लोगों की समस्याओं से भी लगातार रूबरू होना पड़ता है।
डेयरी से कृषि और वाटरशेड तक का अनुभव
सूरजपुर कलेक्टर के बाद रणबीर शर्मा को छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ का प्रबंध संचालक बनाया गया। इस जिम्मेदारी ने उनके प्रशासनिक अनुभव में एक अलग आयाम जोड़ा। सहकारी दुग्ध क्षेत्र से जुड़ी संस्थागत व्यवस्था और उसके संचालन की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने शासन के दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी काम किया।
वे कृषि विभाग में संयुक्त सचिव भी रहे। इसके साथ ही उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य जल ग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इन पदों पर काम करते हुए उनका प्रशासनिक अनुभव फील्ड एडमिनिस्ट्रेशन से आगे बढ़कर कृषि, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों तक पहुंचा।
इसके बाद रणबीर शर्मा ने बेमेतरा जिले की कलेक्टरी भी संभाली। समाज कल्याण विभाग के संचालक पद पर रहने के बाद हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में अब उन्हें गरियाबंद जिले का कलेक्टर बनाया गया है। रणबीर शर्मा की प्रशासनिक यात्रा की खास बात यही है कि इसमें फील्ड और शासन दोनों स्तरों पर काम करने का अनुभव दिखाई देता है।
एक ओर उन्होंने एसडीएम और कलेक्टर के रूप में सीधे जिलों की प्रशासनिक चुनौतियों का सामना किया, वहीं दूसरी ओर मंत्रालय और विभिन्न विभागों में काम करके नीतिगत स्तर की कार्यप्रणाली को भी समझा। उनका यह सफर बताता है कि प्रशासनिक सेवा में एक अधिकारी का अनुभव केवल एक पद या एक जिले तक सीमित नहीं होता, बल्कि हर नई जिम्मेदारी उसके काम करने के तरीके और प्रशासनिक समझ में एक नया अध्याय जोड़ती जाती है।
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