वरिष्ठ IAS अधिकारी की फर्जी आईडी बनाकर लोगों को ठगने के सबूत मिले, 11 राज्यों में ठगी के तार; कानपुर से 2 आरोपी गिरफ्तार
उसके मोबाइल की जांच में दूसरे जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम से भी फर्जी फेसबुक आईडी बनाने के सबूत मिले हैं। पुलिस अब इन प्रोफाइल के पीछे छिपे लोगों की पड़ताल कर रही है।
रायपुर रेंज पुलिस ने ऑपरेशन साइबर शील्ड के तहत यह कार्रवाई की है। 19 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, दोनों मामलों में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ देश के अलग-अलग 11 थानों और साइबर सेल में शिकायतें दर्ज हैं। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि ये सभी शिकायतें IAS अधिकारी की फर्जी आईडी वाले मामले से जुड़ी हैं या दूसरे आरोपी के बैंक खाते से संबंधित हैं।
IAS के नाम पर फर्जी आईडी
पुलिस के मुताबिक, सुशांत पनका ने फेसबुक पर IAS अधिकारी सुबोध कुमार सिंह के नाम से फर्जी आईडी बनाए जाने की शिकायत की थी। इस मामले में राखी थाने में अपराध क्रमांक 153/26 दर्ज किया गया। बाद में जांच रेंज साइबर थाना रायपुर को सौंपी गई।
फेसबुक, गूगल और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से मिली जानकारी का तकनीकी विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर हमीरपुर निवासी अर्जुन कुमार जाटव की पहचान हुई। पुलिस का कहना है कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी फेसबुक आईडी बनाने और धोखाधड़ी में शामिल था।
दूसरे अधिकारियों के नाम भी
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के दूसरे महत्वपूर्ण जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के नाम से बनाई गई फर्जी फेसबुक आईडी के साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस ने कहा है कि इन मामलों में भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अब सवाल यह है कि इन फर्जी प्रोफाइल का इस्तेमाल केवल पहचान की नकल करने के लिए हुआ या इनके जरिए लोगों से पैसे भी मांगे गए। पुलिस ने इस संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है।
88 लाख की ठगी में दूसरी गिरफ्तारी
दूसरे मामले में रश्मि शर्मा ने शेयर ट्रेडिंग में मुनाफे का लालच देकर 88 लाख रुपए की धोखाधड़ी किए जाने की शिकायत की थी। जांच में कानपुर निवासी प्रवीण कुमार दीक्षित की पहचान हुई। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने साथी के साथ मिलकर 'दीक्षित एजेंसी' नाम से फर्जी कंपनी के जरिए बैंक खाते खोलता था और ठगी की रकम हासिल करता था।
दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की प्रक्रिया की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में अन्य आरोपियों के बारे में भी जानकारी मिली है।
फर्जी पहचान पर कितनी निगरानी?
IAS अधिकारी के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनने का मामला सरकारी पहचान और सोशल मीडिया पर भरोसे की सुरक्षा से जुड़ा है। पुलिस की जांच से दूसरे अधिकारियों के नाम पर फर्जी आईडी के संकेत मिले हैं। अब इन प्रोफाइल के इस्तेमाल, संभावित पीड़ितों और इनके पीछे सक्रिय नेटवर्क का खुलासा जांच के आगे बढ़ने पर ही हो सकेगा।