तीन आईएएस अधिकारियों के प्रभार में बदलाव, पुष्पा साहू की जगह रोक्तिमा यादव होंगी कोरिया कलेक्टर
Raipur. छत्तीसगढ़ सरकार ने दो दिन पहले जारी आईएएस अधिकारियों की पोस्टिंग सूची में बड़ा बदलाव करते हुए नया आदेश जारी कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने शुक्रवार को जारी आदेश में तीन आईएएस अधिकारियों के प्रभार बदल दिए। सबसे बड़ा बदलाव कोरिया कलेक्टर की पोस्टिंग को लेकर हुआ है। अब 2016 बैच की आईएएस अधिकारी रोक्तिमा यादव को अस्थायी रूप से कोरिया कलेक्टर बनाया गया है।
दरअसल, पहले जारी आदेश में 2012 बैच की आईएएस अधिकारी पुष्पा साहू को कोरिया कलेक्टर पद पर भेजा गया था। लेकिन आदेश जारी होने के बाद उन्होंने सरकार को आवेदन देकर अपनी पुरानी पदस्थापना पर ही बनाए रखने का निवेदन किया। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और बच्चों की देखभाल का हवाला दिया था। सरकार ने उनके आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए नया आदेश जारी कर दिया।
पुष्पा साहू ने खुद किया अनुरोध
आईएएस पुष्पा साहू ने द सूत्र से बातचीत में पुष्टि की कि उन्होंने स्वयं सरकार को आवेदन दिया था। उन्होंने कहा, “आदेश जारी होने के बाद मैंने पुरानी पदस्थापना पर ही रहने के लिए आवेदन दिया था। मैंने अपने स्वास्थ्य और बच्चों की देखभाल की परिस्थितियों के बारे में सरकार को बताया था। राज्य सरकार ने मेरे निवेदन को स्वीकार कर लिया।”
सरकार के इस फैसले को प्रशासनिक संवेदनशीलता से जोड़कर देखा जा रहा है। आमतौर पर आईएएस तबादलों में जारी आदेशों में इतनी जल्दी संशोधन कम देखने को मिलता है, लेकिन इस मामले में महज दो दिन के भीतर नया आदेश जारी कर दिया गया।
किन अधिकारियों के प्रभार बदले
नए आदेश के मुताबिक पुष्पा साहू को अब सचिव, माध्यमिक शिक्षा मंडल के पद पर पदस्थ किया गया है। उन्हें इस पद के साथ भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रवर श्रेणी वेतनमान के समकक्ष पद का दर्जा भी दिया गया है।
वहीं 2016 बैच की आईएएस रोक्तिमा यादव को कोरिया जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। रोक्तिमा यादव को प्रशासनिक रूप से तेज और फील्ड में सक्रिय अफसर माना जाता है।
इसके अलावा 2019 बैच की आईएएस रीता यादव को आयुक्त, उच्च शिक्षा बनाया गया है। साथ ही उन्हें राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के प्रबंध संचालक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
अफसरशाही में चर्चा का विषय बना फैसला
दो दिन के भीतर आदेश बदलने की इस पूरी कवायद ने मंत्रालय और अफसरशाही में नई चर्चा छेड़ दी है। आमतौर पर तबादला आदेशों में संशोधन के लिए लंबी प्रक्रिया और कई स्तरों की सहमति लगती है, लेकिन इस मामले में तेजी दिखाई गई।
माना जा रहा है कि सरकार अब अफसरों की व्यक्तिगत परिस्थितियों और पारिवारिक कारणों को भी महत्व देने लगी है। हालांकि राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि आवेदन पहले से लंबित था, तो मूल आदेश जारी करने से पहले उस पर फैसला क्यों नहीं लिया गया।
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