ICAR की रेटिंग में कृषि विश्वविद्यालय को बड़ी छलांग, मार्च 2029 तक मान्यता

VINAY VERMA | Sept 10, 2026, 14:59 IST
ICAR रैंकिंग में IGKV रायपुर का सुधार
ICAR रैंकिंग में IGKV रायपुर का सुधार
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय को ICAR रैंकिंग में 'ए' ग्रेड मिला है, जो मार्च 2029 तक मान्य रहेगा। इस उपलब्धि से संस्थान को बेहतर रिसर्च फंड और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान मिलने की उम्मीद है।

RAIPUR: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने अपनी रैंकिंग में बड़ा सुधार किया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय कृषि शिक्षा अधिमान्यता बोर्ड ने विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कॉलेजों व पढ़ाई के अलग-अलग कार्यक्रमों को ए ग्रेड दिया है। यह मान्यता मार्च 2024 से मार्च 2029 तक रहेगी। खास बात यह है कि 2019 की रेटिंग में विश्वविद्यालय को सिर्फ बी ग्रेड मिला था।



बी से ए तक का सफर: पांच साल में ग्रेड सुधरा, अब साख और फंडिंग की उम्मीद

2019 में बी ग्रेड मिलने के बाद विश्वविद्यालय ने शिक्षण, रिसर्च, कॉलेजों की सुविधाओं और किसानों तक तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया। अब उसी का असर अधिमान्यता में दिखाई दे रहा है।



कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल और उनकी टीम को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। हालांकि ए ग्रेड के साथ विश्वविद्यालय पर आगे इस स्तर को बनाए रखने की चुनौती भी रहेगी।



NIRF में भी पहचान: देश की रैंकिंग में 28वें नंबर पर पहुंच चुका है विश्वविद्यालय

विश्वविद्यालय के लिए यह पहली बड़ी उपलब्धि नहीं है। पिछले साल जारी एनआईआरएफ रैंकिंग में इसे देश में 28वां स्थान मिला था। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ से इस रैंकिंग में जगह बनाने वाला यह इकलौता विश्वविद्यालय है। अब ए ग्रेड मिलने से विश्वविद्यालय अपनी राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने का दावा कर रहा है।



ग्रेड से क्या फायदा: हॉस्टल, लैब और कॉलेजों के लिए ज्यादा पैसा मिलने की उम्मीद

ए ग्रेड का सीधा फायदा विश्वविद्यालय को आने वाले समय में मिल सकता है। बेहतर ग्रेड के आधार पर केंद्र और दूसरी संस्थाओं से पढ़ाई, रिसर्च और कॉलेजों की सुविधाओं के लिए ज्यादा मदद मिलने की संभावना है।



इसका इस्तेमाल कॉलेज भवन, हॉस्टल, लैब, लाइब्रेरी और खेल सुविधाओं जैसी जरूरतों पर किया जा सकता है। विदेशी संस्थानों और दूसरे विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करने के रास्ते भी खुलेंगे।



किस आधार पर नंबर मिले: पढ़ाई से लेकर किसानों तक तकनीक पहुंचाने की हुई जांच

अधिमान्यता सिर्फ कागजी दावों पर नहीं मिली है। टीम ने पढ़ाई का स्तर, शिक्षकों और छात्रों का अनुपात, क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी, हॉस्टल और दूसरी सुविधाओं को देखा।



रिसर्च, नए प्रयोग, छात्रों की नौकरी, स्कॉलरशिप, प्रवेश प्रक्रिया और मूल्यांकन व्यवस्था भी जांच के दायरे में रही। किसानों तक नई कृषि तकनीक कितनी पहुंच रही है, इसे भी अहम माना गया।



चार साल में बदला कैंपस: नए कॉलेज, स्मार्ट क्लास और स्टाफ भर्ती का असर

कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के करीब चार साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने कई बदलाव किए। नए कृषि कॉलेज शुरू हुए और छात्रों की संख्या बढ़ी। स्मार्ट क्लास, हॉस्टल और आधुनिक ऑडिटोरियम तैयार किए गए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को स्नातक पाठ्यक्रमों में लागू किया गया। शिक्षकों और सहायक कर्मचारियों की भर्ती भी हुई।



अब असली परीक्षा: ए ग्रेड मिल गया, इसे बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती

विश्वविद्यालय के लिए ए ग्रेड उपलब्धि जरूर है, लेकिन असली सवाल अब आगे का है। पांच साल बाद फिर इसी तरह की जांच होगी। तब सिर्फ भवन और सुविधाएं नहीं, बल्कि रिसर्च, किसानों को फायदा और छात्रों के बेहतर भविष्य का रिकॉर्ड भी सामने रखना होगा। बी से ए तक पहुंचने के बाद अब विश्वविद्यालय के सामने इस ग्रेड को ए प्लस की तरफ ले जाने की चुनौती है।



यह खबरें भी पढ़ें...

दो साल, चार नोटिस और नतीजा सिफर, निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी



मुश्किल में दुर्ग विश्वविद्यालय के कुलसचिव, सरकारी गाड़ी का किया निजी इस्तेमाल



राज्यपाल का आदेश, हर विश्वविद्यालय में होगा राजस्थानी भाषा केंद्र



फर्जी डिग्री मामले में दो विश्वविद्यालयों पर कसेगा शिकंजा, एसओजी करेगी जांच



Tags:
  • छत्तीसगढ़
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति
  • रैंकिंग
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद
  • राष्ट्रीय
  • ऑडिटोरियम
  • इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय