सचिव को जवाब देने वाले IFS मनीष कश्यप बहाल, माफी से इंकार के बाद अब सुलह का 'क्लाइमेक्स'
CG News :छत्तीसगढ़ कैडर के IFS मनीष कश्यप के लिए राहत की खबर आई है। करीब दो महीने पहले निलंबित हुए IFSअधिकारी को बहाल कर दिया है।
उन्हें विभागीय सचिव अमरनाथ प्रसाद को गाली देने के आरोप में निलंबित किया गया था। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने गुरुवार को इसकी विधिवत आदेश जारी कर दिए।
क्या था पूरा मामला?
(छत्तीसगढ़ वन विभाग)विवाद की शुरुआत 9 फरवरी 2026 को हुई थी। उस वक्त मनीष कश्यप मनेंद्रगढ़ में उप वन संरक्षक (DFO) के पद पर तैनात थे। आरोप था
कि भारत सरकार द्वारा आयोजित 'डियर रेगुलेशन' (Deregulation) संबंधी एक महत्वपूर्ण बैठक की तैयारी को लेकर जब छत्तीसगढ़ शासन के सचिव ने उन्हें फोन किया, तो कश्यप ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया।
बात इतनी बढ़ गई थी कि इसे अखिल भारतीय सेवा के नियम का उल्लंघन माना गया। मर्यादा लांघने के इसी आरोप में सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था।
बहाली के पीछे की इनसाइड स्टोरी
निलंबन के बाद शासन ने मनीष कश्यप को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सूत्रों की मानें तो कश्यप ने अपने जवाब में परिस्थितियों का हवाला दिया।
'द सूत्र' से बातचीत में आईएफएस कश्यप ने बताया, शासन ने मुझसे जो स्पष्टीकरण मांगा था, मैंने उसका बिंदुवार जवाब दे दिया है। मेरे जवाब से संतुष्ट होने के बाद ही बहाली का यह आदेश जारी हुआ है।
जब गलती नहीं, तो माफी कैसी?
सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर आ रही है, वह बेहद दिलचस्प है। बताया जाता है कि निलंबन की कार्रवाई से ठीक पहले मंत्रालय के कुछ शुभचिंतकों ने मनीष कश्यप को बीच का रास्ता सुझाया था।
उन्हें सलाह दी गई थी कि वे सचिव अमरनाथ प्रसाद से मिलकर खेद जता दें या माफी मांग लें, ताकि मामला दब जाए।
लेकिन कश्यप ने कथित तौर पर माफी मांगने से साफ इंकार कर दिया।
उनका तर्क था कि जो बात हुई ही नहीं या जिस संदर्भ में हुई, उसके लिए झुकना उन्हें मंजूर नहीं।
कैसे बनी बहाली की बात?
करीब दो महीने के निलंबन के बाद आखिरकार सरकार नरम पड़ी या यूं कहें कि कश्यप के तर्कों में दम दिखा। निलंबन के बाद विभाग ने उन्हें 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था।
आदेश में क्या है खास?
अवर सचिव डी.आर. चन्द्रवंशी के हस्ताक्षर से जारी आदेश में साफ कहा गया है किमनीष कश्यप का निलंबन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है।
सस्पेंशन के दौरान की अवधि (9 फरवरी से 16 अप्रैल तक) का निराकरण नियमानुसार अलग से किया जाएगा। यानी इस दौरान का वेतन और अन्य भत्ते मिलेंगे या नहीं, इसका फैसला बाद में होगा।
अब आगे क्या?
मनीष कश्यप अब बहाल तो हो गए हैं, लेकिन उन्हें मनेंद्रगढ़ वापस नहीं भेजा जाएगा। आदेश के मुताबिक, फिलहाल वे मुख्यालय में रिपोर्ट करेंगे। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में होने वाली IFS की तबादला सूची में उन्हें पोस्टिंग दी जा सकती है।
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