आईएएस रोहित सिसोनिया का निलंबन एक महीने बढ़ा, यह है वजह

इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद आईएएस अधिकारी रोहित सिसोनिया को निलंबित कर दिया गया था। अब उनका निलंबन एक महीने के लिए बढ़ा दिया गया है, क्योंकि उन्होंने नोटिस का जवाब नहीं दिया था।

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Amresh Kushwaha
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ias rohit sisonia suspension extended

5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला

  1. इंदौर में गंदे पानी से हुई लोगों की मौतों के बाद IAS रोहित सिसोनिया को निलंबित किया गया था।

  2. उनकी निलंबन अवधि अब एक महीने के लिए बढ़ा दी गई है।

  3. सिसोनिया ने नोटिस का जवाब नहीं दिया था।

  4. अब उनका जवाब सिविल सर्विसेज बोर्ड के पास भेजा जाएगा।

  5. घटनास्थल के नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव को भी हटा दिया गया था।

INDORE. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी के चलते कई मौतें हो गई थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने आईएएस रोहित सिसोनिया को इंदौर नगर निगम के अपर आयुक्त के पद से निलंबित कर दिया था। अब उनका निलंबन एक महीने के लिए और बढ़ा दिया गया है।

सिसोनिया को जारी नोटिस का जवाब देने का समय समाप्त हो चुका था। इसके बाद उनका निलंबन बढ़ा दिया गया। सिसोनिया ने आखिरकार अपना जवाब सोमवार, 03 मार्च को सिविल सर्विसेज बोर्ड के सामने पेश किया है। इसके बाद उनका मामला बोर्ड के जरिए सुना जाएगा।

बता दें कि सिसोनिया को भागीरथपुरा घटना के तुरंत बाद निलंबित किया गया था, लेकिन जैसे-जैसे मौतों की संख्या बढ़ी, सरकार ने सख्त कदम उठाया और उनका निलंबन बढ़ा दिया।

क्या सिसोनिया को राहत मिलेगी?

सरकार के इस कदम के बाद, अब सिसोनिया के मामले पर फैसला सिविल सर्विसेज बोर्ड करेगा। इस प्रक्रिया के बाद ही यह तय होगा कि उनका निलंबन आगे जारी रहेगा या नहीं। इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप यादव को भी इस मामले में हटाया गया था। हालांकि उन्हें पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक के अहम पद पर नियुक्त किया गया है।

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जानें क्या है इंदौर का भागीरथपुरा कांड?

इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दिसंबर 2025 के आखिरी दिनों में दूषित पानी की वजह से एक बड़ा स्वास्थ्य संकट सामने आया। दरअसल, नर्मदा जल की पाइपलाइन में सीवेज और ड्रेनेज लाइन का पानी मिल गया था।

इससे फीकल कोलिफॉर्म और ई-कोलाई जैसे खतरनाक बैक्टीरिया फैल गए। इसके अलावा, इलाके के बोरवेल का गंदा पानी नर्मदा की पाइपलाइन में घुसकर पीने के पानी को जहरीला बना रहा था।

इस वजह से उल्टी और दस्त जैसी बीमारियां फैल गईं, और तीन हजार 500 से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए। इसे भागीरथपुरा में दूषित पानी की घटना के मुख्य कारण के तौर पर बताया जा रहा है।

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