इंदौर भागीरथपुरा में 3 माह पहले विभाग संभालने वाले IAS रोहित सिसोनिया पर क्यों गिरी गाज, इसलिए रूकी थी टेंडर फाइल

भागीरथपुरा में गंदे पानी से हुई मौतों के बाद अधिकारी रोहित सिसोनिया को सस्पेंड कर दिया गया। महापौर ने भी उन्हें जिम्मेदार ठहराया, और काम में लापरवाही पर सवाल उठाए।

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Sanjay Gupta
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इंदौर भागीरथपुरा में हुए गंदे पानी के कांड में मौतों के बाद बैकफुट पर आई सरकार ने एक के बाद एक अधिकारियों को हटाने, सस्पेंड करने की कार्रवाई की है। इसमें एक नाम सबसे ज्यादा उछला वह था निगम में अपर आयुक्त 2017 बैच के आईएएस रोहित सिसोनिया का।

रोहित सिसोनिया के पास जल वितरण विभाग का भी जिम्मा था। इन्हें पहले ट्रांसफर किया गया और फिर सस्पेंड के आदेश हुए। इस टेंडर की फाइल भी दो तीन माह रूकी। उसका भी एक बड़ा टेक्निकल कारण सामने आया है।

महापौर ने भी उन्हें घेरा

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी उन्हें घेरा और भागीरथपुरा में 2.40 करोड़ की पाइपलाइन बदलने की फाइल अटकने के लिए उन्हें जिम्मेदार बताया।

साथ ही कहा कि अधिकारी सुनते नहीं है। महापौर पहले भी गणेशगंज में एक कार्रवाई को लेकर उन पर नाराज थे और जांच कमेटी बना चुके थे। जब इस मामले में नगर निगम और महापौर घिरे तो उन्होंने भी बैठक में अधिकारियों को घेर दिया। 

सिसोनिया के पास तो तीन माह पहले आया जिम्मा

जिस जल विभाग की बात हो रही है, वह सिसोनिया के पास पहले था ही नहीं। पहले यह विभाग किसी और अधिकारी के पास था। हाईकोर्ट में 6 जनवरी को हुई सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने यह बताया कि सिसोनिया ने भागीरथपुरा की फाइल को नवंबर 2022 से रोक रखा था, जबकि उस समय सिसोनिया इंदौर में थे ही नहीं।

जहां तक इस जल विभाग की बात है, तो यह तो कुछ महीने पहले ही सिसोनिया के पास आया है। इससे पहले वह कभी इस विभाग में थे ही नहीं। वहीं, भागीरथपुरा की घटना तो 29 दिसंबर को सामने आई थी।

अधिकारी फाइल रोक रहे थे तो फिर 10 करोड़ के काम कैसे हुए

अब एक और चौंकाने वाली बात आई है। द सूत्र ने ही महापौर पुष्यमित्र भार्गव का अगस्त-सितंबर 2025 का एक वीडियो का खुलासा किया।

महापौर बता रहे हैं-

भागीरथपुरा में तीन साल में 10 करोड़ के काम हुए हैं और आज दो-तीन करोड़ के काम के भूमिपूजन हो रहे हैं, आगे और भी पांच करोड़ के काम होंगे। इन दस करोड़ के काम से यहां सड़क, ड्रेनेज और जल लाइन का अच्छा काम हुआ है और पार्षदों को भागीरथपुरा आकर देखना चाहिए कैसे काम हुआ है। इस अच्छे काम का सर्टिफिकेट मैं देता हूं। अब यदि फाइल रूक रही थी और अधिकारी नहीं सुन रहे थे तो फिर वहां 10 करोड़ के काम कैसे हो गए।

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अब इस फाइल की कहानी जो अटकी हुई थी

भागीरथपुरा में पाइपलाइन बदलने के दो चरणों में काम हुए। पहले चरण में तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल के समय जुलाई 2022 में 2.40 करोड़ के काम से पाइपलाइन बिछाने का टेंडर हुआ। यह फाइल 23 नवंबर 2022 को टेंडर मंजूरी के लिए जल कार्य समिति को गई और 25 नवंबर 2022 में महापौर परिषद में संकल्प क्रमांक 106 के तहत इसे पास किया गया। 

इस फाइल पर  3 फरवरी 2023 में तत्कालीन अपर आयुक्त के और फिर 6 फरवरी 2023 में महापौर के हस्ताक्षर हुए। इसके बाद दूसरे चरण में 2.40 करोड़ की पाइपलाइन की बात हुई। इसकी भी फाइल तैयार तो 12 नवंबर 2024 को हो गई थी, लेकिन सुस्ती के चलते चली नहीं। इसके बाद 8 अगस्त 2025 में यानी नौ माह बाद इसके लिए टेंडर हुए, जिसकी मंजूरी साढे चार माह बाद 26 दिसंबर 2025 को हुई। 

क्यों रूकी थी टेंडर की फाइल यह है सही कारण

भागीरथपुरा में 2.40 करोड़ से पाइपलाइन बिछाने के टेंडर 8 अगस्त 2025 को होने के बाद इसके टेंडर 15 सितंबर को ओपन होना थे, जो नहीं हुए। इसकी वजह है अमृत 2.0 प्रोजेक्ट।

दरअसल भागीरथपूरा की डीपीआर अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत होकर टेंडर स्तर की कार्रवाई प्रचलन में होकर स्वीकृती की स्टेज पर थी। ऐसे में कार्य की डुप्लीसिटी ना हो ये देखने के लिए फाइल परीक्षण में थी। जब एसएलटीसी द्वारा नियमानुसार उक्त टेंडर को फिर बुलाने के लिए निर्देशित किया तो वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी विभाग द्वारा दी गई। इस पुरानी फाइल को आगे बढ़ाते हुए 26 दिसंबर को मंजूरी दी गई। वहीं भागीरथपुरा की घटना 29 दिसंबर को सामने आई। इंदौर के भागीरथपुरा में गंदे पानी।नगर निगम इंदौर 

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