भारत अब पूरी तरह माओवादी हिंसा से मुक्त, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया आधिकारिक ऐलान
RAIPUR : दशकों से देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में भारत ने एक ऐतिहासिक पड़ाव हासिल कर लिया है। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि देश का कोई भी जिला अब माओवादी हिंसा से प्रभावित नहीं है। गृह मंत्रालय द्वारा जारी यह सूचना आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़े बदलाव का प्रमाण मानी जा रही है।
पांच दशकों के संघर्ष का समापन:
'लाल आतंक ने पांच दशकों से अधिक समय तक भारत के विभिन्न हिस्सों में अपना प्रभाव बनाए रखा था। विकास कार्यों में बाधा, सुरक्षा बलों पर हमले और आम नागरिकों के जीवन को प्रभावित करने वाली यह समस्या अब समाप्त हो गई है। केंद्र सरकार ने राज्यों को आधिकारिक तौर पर सूचित किया है कि अब देश के किसी भी क्षेत्र को माओवादी हिंसा प्रभावित जिलों की सूची में शामिल नहीं किया गया है।
उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद एलान:
यह घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा इसी महीने आयोजित की गई एक उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक के बाद की गई है। इस निर्णय की पृष्ठभूमि में वर्ष 2015 में तैयार की गई 'वामपंथी उग्रवाद से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना' का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। केंद्र सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय की थी, जिसे 31 मार्च को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया।
संसद में अमित शाह का बड़ा बयान:
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को संसद में इस बात की पुष्टि की थी कि भारत अब माओवादी समस्या से मुक्त हो गया है। इसके बाद, 8 अप्रैल को गृह मंत्रालय ने सभी संबंधित राज्यों को एक पत्र जारी कर आधिकारिक रूप से सूचित किया कि 31 मार्च के बाद देश का कोई भी जिला माओवादी उग्रवाद से प्रभावित श्रेणी में नहीं आता है।
31 मार्च के बाद कि घटनाओं का आंकलन:
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि समीक्षा बैठक के दौरान सशस्त्र नक्सली कैडरों की वर्तमान स्थिति, उनकी हिंसा को अंजाम देने की क्षमता और मुक्त क्षेत्रों की मौजूदगी का विश्लेषण किया गया। 31 मार्च के बाद प्रभावित राज्यों में हुई घटनाओं का भी आंकलन किया गया, जिसके बाद C ने यह निष्कर्ष निकाला कि अब भारत में नक्सली हिंसा से प्रभावित जिलों का वर्गीकरण करने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
बदलाव का महत्व:
माओवादी हिंसा का खात्मा देश के उन क्षेत्रों के लिए विकास के नए द्वार खोलेगा जो लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण पिछड़ गए थे। शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के विकास में आने वाली बाधाएं अब दूर होंगी। यह उपलब्धि न केवल सुरक्षा बलों की वीरता और रणनीति का परिणाम है, बल्कि सरकार की 'नीति की भी जीत है। आने वाले समय में, इन क्षेत्रों में निवेश, रोजगार सृजन और मुख्यधारा की विकास योजनाओं का कार्यान्वयन और अधिक तेजी से किया जा सकेगा। यह भारत की आंतरिक सुरक्षा और अखंडता के लिए एक मील का पत्थर है।
सबसे ज्यादा प्रभावित था छत्तीसगढ़:
नक्सलवाद से सबसे जय पीड़ित छत्तीसगढ़ था। बस्तर के जिले लाल आतंक की पनाहगाह बने हुए थे। 31 मार्च को छत्तीसगढ़ में नक्सल मुक्ति का दावा किया गया। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बदिन संख्या में नक्सलियों ने सरेंडर किया। हिड़मा जैसे कुख्यात नक्सली मारे गए। अब बस्तर में विकास के काम तेजी से किये जा रहे हैं।
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