बस्तर से दिल्ली तक आईपीएस जितेंद्र सिंह मीणा का दमदार सफर
देश में लाखों युवा यूपीएससी का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो लगातार असफलताओं के बावजूद हार नहीं मानते और आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुंचते हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी जितेंद्र सिंह मीणा उन्हीं अफसरों में गिने जाते हैं, जिनका सफर संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत की मिसाल माना जाता है। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग करने के बाद आरामदायक सरकारी नौकरी हासिल करना आसान उपलब्धि नहीं होती, लेकिन जितेंद्र सिंह मीणा ने वहीं रुकने के बजाय खुद को और बड़ी चुनौती के लिए तैयार किया। दो बार इंटरव्यू तक पहुंचकर असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और तीसरे प्रयास में यूपीएससी क्रैक कर भारतीय पुलिस सेवा में जगह बनाई। आज वे देश के महत्वपूर्ण पुलिस संस्थाओं में से एक, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी बीपीआरएंडडी, नई दिल्ली में पदस्थ हैं। इससे पहले वे प्रतिनियुक्ति पर सीबीआई में डीआईजी जैसी अहम जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में एसपी रहते हुए उन्होंने फील्ड पुलिसिंग, नक्सल चुनौती और प्रशासनिक नेतृत्व का लंबा अनुभव हासिल किया।
रेलवे कर्मचारी के बेटे से आईआईटी तक का सफर
आईपीएस जितेंद्र सिंह मीणा का जन्म 24 मई 1980 को राजस्थान के भरतपुर जिले में हुआ। उनका परिवार सामान्य पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा। उनके पिता भारतीय रेलवे में कार्यरत थे। परिवार में शिक्षा को हमेशा महत्व दिया गया और यही कारण रहा कि बचपन से ही जितेंद्र सिंह मीणा पढ़ाई में काफी गंभीर माने जाते थे।उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा भरतपुर से ही पूरी की। स्कूल के दिनों से ही वे गणित और तकनीकी विषयों में तेज माने जाते थे। आगे चलकर उन्होंने देश की सबसे कठिन प्रवेश परीक्षाओं में से एक आईआईटी-जेईई परीक्षा पास की और आईआईटी दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग ब्रांच में प्रवेश लिया। उस दौर में आईआईटी में चयन होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता था। आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने भारतीय अभियांत्रिकी सेवा यानी इंडियन इंजीनियरिंग सर्विस की परीक्षा भी पास कर ली। इसके बाद उनकी नियुक्ति केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्ल्यूडी में हुई। जिंदगी स्थिर हो चुकी थी, अच्छा करियर सामने था, लेकिन उनके भीतर कुछ बड़ा करने की इच्छा अभी बाकी थी।
नौकरी के साथ शुरू हुई यूपीएससी की तैयारी
सीपीडब्ल्यूडी में नौकरी करते हुए जितेंद्र सिंह मीणा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। नौकरी के साथ इतनी कठिन परीक्षा की तैयारी करना आसान नहीं माना जाता, क्योंकि समय और मानसिक संतुलन दोनों बनाए रखना बड़ी चुनौती होती है। लेकिन उन्होंने यह चुनौती स्वीकार की। उन्होंने यूपीएससी में जियोग्राफी और साइकोलॉजी को ऑप्शनल विषय के रूप में चुना। पहले दो प्रयासों में वे इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन अंतिम चयन सूची में जगह नहीं बना पाए। कई लोग ऐसी स्थिति में हार मान लेते हैं, लेकिन जितेंद्र सिंह मीणा ने असफलता को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। तीसरे प्रयास में उन्होंने पूरी ताकत के साथ तैयारी की। अनुभव, आत्मविश्वास और मेहनत का परिणाम आखिरकार सामने आया और उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली। वर्ष 2007 बैच में उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस के लिए हुआ और उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला।
आईपीएस बनने के बाद शुरू हुआ असली मैदान
10 दिसंबर 2007 को जितेंद्र सिंह मीणा ने आधिकारिक रूप से आईपीएस सेवा ज्वाइन की। प्रशिक्षण के बाद उनकी पहली पोस्टिंग प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी के रूप में जगदलपुर में हुई। बस्तर क्षेत्र में शुरुआती पुलिसिंग किसी भी युवा आईपीएस अधिकारी के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यहां कानून व्यवस्था के साथ नक्सल समस्या भी बड़ी चुनौती होती है। इसके बाद वे राजनांदगांव जिले के मानपुर सब डिवीजन में एसडीओपी बनाए गए। मानपुर क्षेत्र लंबे समय से नक्सल गतिविधियों के कारण संवेदनशील माना जाता रहा है। यहां काम करते हुए उन्होंने फील्ड पुलिसिंग, ऑपरेशन और स्थानीय नेटवर्क को समझने का अनुभव हासिल किया। कुछ समय बाद वे बिलासपुर में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यानी एडिशनल एसपी बने। प्रशासनिक अनुभव बढ़ने के साथ उन्हें जिलों की जिम्मेदारी मिलने लगी और फिर वे एसपी के रूप में अपनी पहचान बनाने लगे।
कई जिलों के एसपी रहे, फील्ड पुलिसिंग में बनाई पहचान
जितेंद्र सिंह मीणा की पहली एसपी पोस्टिंग बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हुई। इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई महत्वपूर्ण जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में काम किया। वे कांकेर, जशपुर, कोरबा, बालोद और जगदलपुर जैसे जिलों के एसपी रहे। इन जिलों में काम करते हुए उन्होंने कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, सामुदायिक पुलिसिंग और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा रणनीति पर काम किया। विशेष रूप से बस्तर और उत्तर छत्तीसगढ़ के क्षेत्रों में उनकी पोस्टिंग को चुनौतीपूर्ण माना गया। पुलिस मुख्यालय में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। वे तकनीकी सेवा यातायात शाखा में एआईजी के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने पुलिसिंग में तकनीक और आधुनिक प्रबंधन को लेकर काम किया।
जगदलपुर से सीबीआई और फिर दिल्ली तक
जगदलपुर एसपी के रूप में कार्यकाल के दौरान उनके काम की काफी चर्चा हुई। इसी दौरान उन्हें प्रतिनियुक्ति पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई में जाने का अवसर मिला। सीबीआई में उन्होंने डीआईजी के पद पर जिम्मेदारी संभाली। सीबीआई जैसी देश की प्रमुख जांच एजेंसी में काम करना किसी भी आईपीएस अधिकारी के करियर का महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। यहां उन्होंने जटिल जांच, संवेदनशील मामलों और केंद्रीय स्तर की कार्यप्रणाली का अनुभव हासिल किया। वर्तमान में आईपीएस जितेंद्र सिंह मीणा नई दिल्ली स्थित ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट यानी बीपीआरएंडडी में पदस्थ हैं। यह संस्था देशभर की पुलिस व्यवस्था, प्रशिक्षण, रिसर्च और आधुनिक पुलिसिंग से जुड़े विषयों पर काम करती है। यहां उनकी भूमिका नीति, रिसर्च और पुलिस सुधारों से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में मानी जाती है।
असफलता से हार नहीं मानने वाले अफसर
जितेंद्र सिंह मीणा की कहानी केवल एक आईपीएस अधिकारी की जीवनी नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी है जो बार-बार असफल होने के बाद खुद पर शक करने लगते हैं। उन्होंने यह साबित किया कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि लगातार प्रयास और धैर्य से मिलती है। आईआईटी से इंजीनियरिंग, फिर इंजीनियरिंग सेवा, उसके बाद यूपीएससी की तैयारी, दो बार असफलता और अंततः आईपीएस बनना। उनका सफर यह दिखाता है कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिन रास्तों से गुजरने का साहस रखते हैं। आज छत्तीसगढ़ कैडर के अनुभवी आईपीएस अधिकारियों में गिने जाने वाले जितेंद्र सिंह मीणा को एक शांत, तकनीकी समझ रखने वाले और फील्ड अनुभव वाले अधिकारी के रूप में देखा जाता है। राजस्थान के भरतपुर से शुरू हुआ उनका सफर अब देश की शीर्ष पुलिस संस्थाओं तक पहुँच चुका है।
यह खबरें भी पढ़ें...
रेगिस्तान से रेड जोन तक: IPS बद्री नारायण मीणा की दमदार कहानी
गांव के सरकारी स्कूल से छत्तीसगढ़ के डीजीपी तक… आईपीएस अरुण देव गौतम की कहानी
रायपुर के नए निगम आयुक्त… जानिए तेजतर्रार आईएएस संबित मिश्रा की कहानी
छत्तीसगढ़ की ताकतवर महिला अफसरों में क्यों गिनी जाती हैं आईएएस निहारिका बारिक सिंह