गांव के स्कूल से मजबूत पुलिसिंग तक...आईपीएस प्रभात कुमार की कहानी
प्रभात कुमार की कहानी सिर्फ एक आईपीएस अधिकारी की कहानी नहीं है। यह उस युवा की कहानी है, जिसने बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर आईआईटी तक का सफर तय किया, सात अलग-अलग नौकरियां कीं और आखिरकार भारतीय पुलिस सेवा में पहुंचकर अपनी अलग पहचान बनाई। आज वही प्रभात कुमार महासमुंद के एसपी हैं। इससे पहले वे छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले के पुलिस अधीक्षक भी रह चुके हैं और देश के सबसे कठिन अभियानों में से एक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
गांव की मिट्टी से मिली ताकत
14 मार्च 1987 को बिहार में जन्मे प्रभात कुमार का बचपन गांव के सादे माहौल में बीता। उनके पिता परिवहन व्यवसाय से जुड़े हुए थे। परिवार में शिक्षा को हमेशा सबसे अधिक महत्व दिया गया। प्रभात कुमार ने पहली कक्षा से लेकर बारहवीं तक की पढ़ाई गांव के ही स्कूल में पूरी की। साधारण माहौल में पले-बढ़े प्रभात कुमार ने कभी संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। यही कारण था कि उन्होंने शुरू से ही अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान केंद्रित किया और आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
आईआईटी तक पहुंचने का सफर
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रभात कुमार ने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को सफलतापूर्वक पास किया और आईआईटी खड़गपुर में दाखिला हासिल किया। यहां से उन्होंने इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एमएससी की पढ़ाई भी पूरी की। कॉलेज की पढ़ाई समाप्त होने के बाद उनका चयन एक बड़ी कंपनी में प्रोडक्ट मैनेजर के पद पर हुआ। वर्ष 2011 से 2013 तक उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र में काम किया। उनके सामने एक सुरक्षित और आकर्षक करियर था, लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने की इच्छा लगातार बनी रही।
सात नौकरियां और एक सपना
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रभात कुमार (IPS Prabhat Kumar) ने यूपीएससी में सफलता हासिल करने से पहले सात अलग-अलग नौकरियां हासिल की थीं। हर नौकरी उनके लिए एक नया अनुभव थी, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाना था। उन्होंने लगातार कई वर्षों तक मेहनत की और अंततः वर्ष 2018 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। इसके बाद उन्हें भारतीय पुलिस सेवा के लिए चुना गया और छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया।
पुलिस सेवा की शुरुआत
16 दिसंबर 2019 को प्रभात कुमार ने आधिकारिक तौर पर भारतीय पुलिस सेवा में प्रवेश किया। हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें रायगढ़ जिले में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। रायगढ़ में उन्होंने कोतरारोड़ थाना प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद उन्हें दुर्ग जिले में सीएसपी छावनी बनाया गया। यहां उन्होंने कानून-व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों को संभाला। बाद में उन्हें सुकमा जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर नियुक्त किया गया।
नारायणपुर में बड़ी चुनौती, महासमुंद में क्राइम कंट्रोल
फील्ड अनुभव के बाद प्रभात कुमार ने नारायणपुर जिले की पुलिस अधीक्षक के रूप में कमान संभाली। यह इलाका लंबे समय से नक्सली गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा। घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ियों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच काम करना किसी भी अधिकारी के लिए आसान नहीं होता। प्रभात कुमार के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कई सफल अभियान चलाए। नक्सलियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की। इसके साथ ही आत्मसमर्पण और पुनर्वास की योजनाओं को भी बढ़ावा दिया। इसके बाद प्रभात कुमार महासमुंद एसपी बनाए गए। यहां क्राइम कंट्रोल में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
किताबों और यात्राओं के शौकीन
पुलिस सेवा की व्यस्तताओं के बीच भी प्रभात कुमार अपने लिए समय निकालना नहीं भूलते। उन्हें नई जगहों पर घूमना और किताबें पढ़ना पसंद है। अर्थशास्त्र उनका पसंदीदा विषय है और उपन्यास पढ़ना उनका शौक है। उनका मानना है कि किताबें केवल जानकारी नहीं देतीं, बल्कि सोचने और समझने का नजरिया भी बदल देती हैं। आईआईटी के क्लासरूम से लेकर बस्तर के घने जंगलों से होते हुए महासमुंद तक का प्रभात कुमार का सफर यह साबित करता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत किसी भी व्यक्ति को उसकी मंजिल तक पहुंचा सकती है। गांव के एक साधारण स्कूल से निकलकर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों तक पहुंचने वाले प्रभात कुमार आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
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