कड़ी मेहनत बनी सफलता की सीढ़ी.... आईपीएस उमेश प्रसाद गुप्ता की प्रेरक कहानी
साधारण परिवार से निकलकर देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवा तक का सफर तय करने वाले उमेश प्रसाद गुप्ता छत्तीसगढ़ कैडर के 2020 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी हैं। अपनी कड़ी मेहनत और अटूट संकल्प के दम पर विपरीत परिस्थितियों को मात देने वाले उमेश प्रसाद को हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में बीजापुर का एसपी बनाया है। इससे पहले वे रायपुर में पुलिस उपायुक्त के रुप में राज्य पुलिस के महत्वपूर्ण प्रशासनिक व मैदानी दायित्वों को संभाल रहे थे। बेहद सीमित संसाधनों के बीच छत्तीसगढ़ के एक सुदूर गांव से शुरू हुई उनकी यह यात्रा आज देश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक जीवंत उदाहरण बन चुकी है।
मेरिट लिस्ट से आईआईटी तक
उमेश प्रसाद गुप्ता का जन्म छत्तीसगढ़ के उत्तरी क्षेत्र में स्थित सूरजपुर जिले के एक सुदूर और छोटे से गांव मानपुर में हुआ था। उनका लालन-पालन एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता रामसेवक गुप्ता कोल इंडिया में कार्यरत थे, जिन्होंने अत्यंत सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। उनकी माता श्रीमती शिवमोहरी गुप्ता एक कुशल गृहणी हैं, जिन्होंने उमेश को जीवन में हमेशा अनुशासित रहने के संस्कार दिए। ग्रामीण परिवेश और हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उमेश बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। उनकी असाधारण प्रतिभा का पहला प्रमाण तब मिला जब उन्होंने कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षा में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य की मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल किया। इस बड़ी सफलता के बाद उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षा पास की और देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक, आईआईटी (बीएचयू) वाराणसी में दाखिला लिया। यहां से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की।
यूपीएससी में लगातार सफलता का सफर
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद उमेश ने देश सेवा का संकल्प लिया और संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं की तैयारी शुरू की। उनका प्रतियोगी परीक्षाओं का सफर अविश्वसनीय सफलताओं से भरा रहा है, जहां उन्होंने एक के बाद एक कई कठिन परीक्षाएं पास कीं। सबसे पहले उन्होंने यूपीएससी की भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) परीक्षा पास की और भारतीय रेलवे बिजली इंजीनियर सेवा (IRSEE) में अधिकारी बने। इसके बाद भी वे रुके नहीं और सिविल सेवा परीक्षा में अपने पहले बड़े प्रयास में 179वीं रैंक हासिल कर भारतीय राजस्व सेवा के लिए चुने गए। आयकर विभाग में ट्रेनिंग के दौरान उन्होंने अपनी कोशिशें जारी रखीं और यूपीएससी परीक्षा 2019 में फिर 162वीं रैंक हासिल की। इस शानदार रैंक के कारण उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हुआ और उन्हें अपना गृह राज्य छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया।
अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका
हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी से कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उमेश प्रसाद गुप्ता ने छत्तीसगढ़ में अपने पुलिस करियर की शुरुआत की। उन्होंने दुर्ग जिले में अपने प्रोबेशनरी पीरियड के दौरान कानून व्यवस्था को बारीकी से समझा। इसके बाद उनकी पहली पूर्ण पोस्टिंग बिलासपुर जिले में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) के रूप में हुई, जहां उन्होंने अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनवरी 2026 में जब छत्तीसगढ़ सरकार ने राजधानी रायपुर में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए पहली बार पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू की, तब उमेश प्रसाद गुप्ता को रायपुर के इतिहास में पहला पुलिस उपायुक्त (DCP सेंट्रल ज़ोन) नियुक्त होने का गौरव प्राप्त हुआ। इसके बाद वे हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में बीजापुर के एसपी बनाए गए हैं।
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