आईआईटी की लैब से आईएएस की कुर्सी तक... तन्मय खन्ना की दमदार कहानी

Harrison Masih | Jul 09, 2026, 15:20 IST
Share
आईएएस तन्मय खन्ना
आईएएस तन्मय खन्ना

छत्तीसगढ़ कैडर के 2023 बैच के IAS अधिकारी तन्मय खन्ना की प्रेरणादायक कहानी युवाओं के लिए मिसाल है। दिल्ली में जन्मे तन्मय ने रिसर्च और विदेशी नौकरी के आकर्षक अवसरों को छोड़कर UPSC की तैयारी की और पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 61 हासिल की।

देश के लाखों युवा बेहतर पैकेज और विदेशी नौकरी का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सुविधाओं से भरे करियर को छोड़कर समाज और देश के लिए काम करने का रास्ता चुनते हैं। छत्तीसगढ़ कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी तन्मय खन्ना ऐसे ही युवाओं में शामिल हैं। दिल्ली में जन्मे तन्मय ने तकनीक और शोध की दुनिया से निकलकर प्रशासनिक सेवा का रास्ता चुना और अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 61 हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादे किसी भी मंजिल को आसान बना सकते हैं। तन्मय हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में जिला पंचायत बस्तर के सीईओ बनाए गए हैं।

दिल्ली से शुरू हुआ सफर

तन्मय खन्ना का जन्म 1997 को दिल्ली में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में उनकी विशेष रुचि रही। उन्होंने पढ़ाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन किया। तकनीकी क्षेत्र में उनकी गहरी दिलचस्पी रही। इसी लगन ने उन्हें उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र तक पहुंचाया, जहां वे नई तकनीकों के जरिए शिक्षा को अधिक सुलभ बनाने के प्रयासों में जुट गए। 31 जुलाई 2023 को उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा जॉइन की। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर मिला और फील्ड ट्रेनिंग के लिए बिलासपुर जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया। यहीं से उनके प्रशासनिक जीवन की वास्तविक शुरुआत हुई।

रिसर्च लैब में बना भविष्य

यूपीएससी की तैयारी शुरू करने से पहले तन्मय का जीवन पूरी तरह शोध और तकनीक के इर्दगिर्द घूमता रहा। वे हैदराबाद स्थित ट्रिपल आईटी में भाषा आधारित तकनीक पर रिसर्च कर रहे थे। उनका उद्देश्य ऐसा सॉफ्टवेयर विकसित करना था, जिससे बच्चे अपनी मातृभाषा में बेहतर तरीके से पढ़ाई कर सकें। यह केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं थी, बल्कि शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में उनका गंभीर प्रयास था। इसी दौरान उन्होंने शिक्षा और तकनीक के मेल से समाज में बदलाव की संभावनाओं को करीब से समझा। कॉलेज में प्लेसमेंट का दौर शुरू हुआ तो उनके अधिकांश साथियों को विदेशों की प्रतिष्ठित कंपनियों से करोड़ों रुपए के सालाना पैकेज मिलने लगे। तन्मय स्वयं गोल्ड मेडलिस्ट थे, इसलिए उनके सामने भी शानदार करियर के कई अवसर मौजूद थे। उन्होंने वह रास्ता नहीं चुना। जहां दूसरे छात्र कॉरपोरेट दुनिया की ओर बढ़ रहे थे, वहीं तन्मय अपने जीवन का उद्देश्य तलाश रहे थे। उनके लिए सफलता का अर्थ केवल बड़ी तनख्वाह नहीं, बल्कि समाज पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ना था।

आईएएस तन्मय खन्ना
आईएएस तन्मय खन्ना


एक सरकारी परियोजना ने बदल दी सोच

तन्मय के जीवन में निर्णायक मोड़ तब आया, जब उन्हें भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण परियोजना पर काम करने का अवसर मिला। इस परियोजना का उद्देश्य देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों के व्याख्यानों को 12 भारतीय भाषाओं में तैयार करना था, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच सके। इस दौरान उन्होंने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली को करीब से देखा। उन्हें महसूस हुआ कि यदि नीति और प्रशासन सही दिशा में काम करें तो करोड़ों लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। यही अनुभव उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा बना। रिसर्च छोड़कर यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला आसान नहीं था। जब तन्मय ने अपने परिवार को बताया कि वे नौकरी करने के बजाय सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करेंगे, तो सभी कुछ पल के लिए चौंक गए। अच्छे संस्थान से पढ़ाई, उज्ज्वल करियर और शानदार नौकरी के अवसर छोड़कर एक अनिश्चित राह चुनना किसी के लिए भी बड़ा निर्णय होता है। हालांकि परिवार ने अंततः उनके फैसले का सम्मान किया और पूरा सहयोग दिया। तन्मय ने शोध कार्य के दौरान मिलने वाली लगभग 25 हजार रुपए की छात्रवृत्ति के सहारे अपनी तैयारी जारी रखी। जब घरवालों ने पूछा कि आगे सब कैसे होगा, तो उनका जवाब बेहद सादा था-हो जाएगा। उनका यही आत्मविश्वास बाद में उनकी सबसे बड़ी ताकत साबित हुआ।



IAS Tanmay Khanna
IAS Tanmay Khanna


पहली कोशिश में बड़ी सफलता

लगातार मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य का परिणाम यह रहा कि तन्मय ने लगभग डेढ़ वर्ष की तैयारी के बाद पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण कर ली। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 61 प्राप्त की और भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित हुए। यह उपलब्धि केवल उनकी बौद्धिक क्षमता का प्रमाण नहीं थी, बल्कि इस बात का भी उदाहरण थी कि सही दिशा में किया गया समर्पित प्रयास कम समय में भी असाधारण परिणाम दे सकता है।

जब इंटरव्यू में गूंजा फिल्मी गीत

तन्मय खन्ना के यूपीएससी इंटरव्यू से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी खूब चर्चित रहा। इंटरव्यू के दौरान गंभीर विषयों पर चर्चा के बाद बोर्ड ने अचानक उनसे पूछा कि क्या उन्हें गाना गाना पसंद है। तन्मय ने बिना झिझक शाहरुख खान की फिल्म का लोकप्रिय गीत मितवा गाकर सुनाया। उनका आत्मविश्वास, सहजता और परिस्थितियों के अनुसार खुद को प्रस्तुत करने की क्षमता इंटरव्यू बोर्ड को प्रभावित कर गई। बाद में उन्हें इंटरव्यू में भी अच्छे अंक प्राप्त हुए। प्रशिक्षण के बाद तन्मय खन्ना को बिलासपुर जिले में फील्ड ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। यहां सहायक कलेक्टर के रूप में उन्होंने प्रशासन की बारीकियों को व्यवहारिक रूप से समझा। वे स्वीकार करते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्हें प्रशासनिक कार्यशैली सीखने का बेहतरीन अवसर मिला। उनके अनुसार प्रशासन में सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती और हर दिन नए अनुभव लेकर आता है। इसके बाद वे अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कटघोरा बनाए गए। हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें जिला पंचायत बस्तर का सीईओ बनाया गया है।

संवेदनशील अधिकारी की पहचान

तन्मय खन्ना केवल एक कुशल प्रशासक बनने की दिशा में ही नहीं बढ़ रहे, बल्कि संवेदनशील इंसान के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखते हैं। उन्हें पशु-पक्षियों से विशेष लगाव है। उनके सोशल मीडिया पर अक्सर कुत्तों और बिल्लियों के साथ बिताए गए पल दिखाई देते हैं। यह उनके व्यक्तित्व का वह पक्ष है, जो बताता है कि प्रशासनिक कठोरता के साथ संवेदनशीलता भी एक अच्छे अधिकारी की महत्वपूर्ण पहचान होती है। तन्मय खन्ना की कहानी यह संदेश देती है कि जीवन में बड़ा निर्णय लेने के लिए केवल प्रतिभा नहीं, बल्कि साहस भी चाहिए।

ये खबरें भी पढ़ें...

आईआईटी से यूपीएससी तक का सफर... जानिए युवा आईएएस जयंत नाहटा की प्रेरक कहानी

तीसरी बार में बनीं IAS... जानिए भिलाई की नई कमिश्नर सुरुचि सिंह की दिलचस्प कहानी

तकनीक से कानून तक का सधा हुआ सफर...आईपीएस हिमांशु गुप्ता

नेतृत्व और सुशासन की मिसाल ...आईएएस रोहित यादव

Tags:
  • छत्तीसगढ़ कैडर
  • आईएएस अधिकारी
  • ऑल इंडिया रैंक
  • आईएएस तन्मय खन्ना
  • IAS Tanmay Khanna
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा