नेतृत्व और सुशासन की मिसाल ...आईएएस रोहित यादव
Harrison Masih | Jul 03, 2026, 16:55 IST
आईएएस रोहित यादव
आईएएस रोहित यादव छत्तीसगढ़ कैडर के 2002 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्होंने एमबीबीएस से यूपीएससी पास कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। उन्होंने दंतेवाड़ा, सरगुजा, राजनांदगांव और रायपुर जैसे जिलों में कलेक्टर के रूप में काम किया।
छत्तीसगढ़ कैडर के वर्ष 2002 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रोहित यादव उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं, जिन्होंने जिला प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री सचिवालय, राज्य सरकार के प्रमुख विभागों और भारत सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों तक अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रभावशाली परिचय दिया है। करीब ढाई दशक लंबे प्रशासनिक जीवन में उन्होंने वित्त, ऊर्जा, शहरी विकास, सड़क अवसंरचना, सामान्य प्रशासन, जनसंपर्क और केंद्र-राज्य समन्वय जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काम किया है। यही कारण है कि आज उन्हें छत्तीसगढ़ के सबसे अनुभवी और बहुआयामी प्रशासनिक अधिकारियों में गिना जाता है। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग के सचिव हैं। इसके साथ ही जनसंपर्क विभाग और पेंशन निवारण समिति का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास है।
रोहित यादव का जन्म 7 जुलाई 1976 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुआ। बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रहे रोहित ने चिकित्सा क्षेत्र को अपना पहला लक्ष्य बनाया और एमबीबीएस (मेडिसिन) की पढ़ाई पूरी की। डॉक्टर बनने के बाद उनके सामने चिकित्सा क्षेत्र में उज्ज्वल भविष्य की संभावनाएं थीं, लेकिन उन्होंने अपने जीवन को एक अलग दिशा देने का निर्णय लिया। समाज और शासन व्यवस्था में व्यापक स्तर पर योगदान देने की इच्छा ने उन्हें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित किया। कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने वर्ष 2002 में आईएएस परीक्षा उत्तीर्ण की और भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए। उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर आवंटित किया गया, जिसके बाद से उनका पूरा प्रशासनिक जीवन इसी राज्य के विकास और सुशासन के लिए समर्पित रहा है।
प्रशासनिक सेवा की शुरुआत उन्होंने जमीनी स्तर से की। दंतेवाड़ा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के रूप में उन्होंने ग्रामीण विकास, पंचायत व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभाली। दक्षिण बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में कार्य करते हुए उन्हें आदिवासी समाज, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकास की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला। इसके बाद उन्होंने तकनीकी शिक्षा विभाग तथा रोजगार एवं प्रशिक्षण विभाग में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ कौशल विकास और संस्थागत सुधार पर भी विशेष ध्यान दिया। प्रशासन की बुनियादी इकाइयों में काम करने का यही अनुभव आगे चलकर उनके निर्णयों की सबसे बड़ी ताकत बना।
![IAS Rohit Yadav]()
रोहित यादव को छत्तीसगढ़ के तीन महत्वपूर्ण जिलों का कलेक्टर बनने का अवसर मिला। उन्होंने सरगुजा, राजनांदगांव और बाद में राजधानी रायपुर के कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दीं। तीनों जिलों की प्रशासनिक परिस्थितियां अलग-अलग थीं, लेकिन हर जगह उन्होंने बेहतर प्रशासनिक समन्वय, विकास कार्यों की निगरानी, कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। राजधानी रायपुर जैसे प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिले की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। जिला प्रशासन में उनका अनुभव उन्हें शासन की जमीनी जरूरतों को समझने वाला अधिकारी बनाता है।
जिला प्रशासन में सफल कार्यकाल के बाद रोहित यादव की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गईं। मुख्यमंत्री सचिवालय में संयुक्त सचिव के रूप में उन्होंने राज्य सरकार की अनेक महत्वपूर्ण नीतियों और निर्णयों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें ऊर्जा विभाग का सचिव बनाया गया, जहां उन्होंने ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रशासनिक कार्यों का नेतृत्व किया। सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव के रूप में उन्होंने शासन व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णयों के संचालन में योगदान दिया। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक के रूप में शहरी विकास योजनाओं की निगरानी की, जबकि रोड्स एंड ब्रिजेस डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध संचालक तथा स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के प्रबंध समन्वयक के रूप में सड़क और आधारभूत संरचना से जुड़ी अनेक परियोजनाओं का संचालन किया। अलग-अलग विभागों में कार्य करने के कारण उन्हें शासन की कार्यप्रणाली का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ।
रोहित यादव का प्रशासनिक अनुभव केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा। प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने भारत सरकार में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। नई दिल्ली स्थित इस्पात मंत्रालय में उन्होंने पहले निदेशक और बाद में संयुक्त सचिव के रूप में कार्य किया। इस दौरान इस्पात क्षेत्र से जुड़ी नीतियों, प्रशासनिक समन्वय और परियोजनाओं के संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसके अलावा उन्होंने सामान्य प्रशासन से जुड़े दायित्व भी निभाए। केंद्र सरकार में उनकी सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में नागरिक उड्डयन मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्य करना भी शामिल है। इस पद पर रहते हुए उन्हें केंद्र सरकार के उच्च स्तर पर निर्णय प्रक्रिया, मंत्रालयों के बीच समन्वय और नीतिगत कार्यों का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ। राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर कार्य करने का यह अनुभव उन्हें अन्य अधिकारियों से अलग पहचान दिलाता है।
वर्तमान में आईएएस रोहित यादव छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग के सचिव हैं। राज्य का बजट, वित्तीय अनुशासन, सरकारी व्यय, संसाधनों का प्रबंधन और विभिन्न विभागों की वित्तीय स्वीकृतियां उनके कार्यक्षेत्र का हिस्सा हैं। इसके साथ ही उन्हें जनसंपर्क विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, जिसके माध्यम से सरकार की योजनाओं और नीतियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का दायित्व भी वे निभा रहे हैं। पेंशन निवारण समिति का अतिरिक्त दायित्व संभालते हुए वे पेंशन संबंधी मामलों के त्वरित और प्रभावी समाधान की दिशा में भी कार्य कर रहे हैं। वर्तमान समय में वे राज्य शासन के सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल हैं।
रोहित यादव का प्रशासनिक जीवन इस बात का उदाहरण है कि एक अधिकारी की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके अनुभव और कार्यक्षेत्र की विविधता से बनती है। उन्होंने ग्रामीण विकास से लेकर जिला प्रशासन, शहरी विकास, ऊर्जा, सड़क अवसंरचना, सामान्य प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, जनसंपर्क और केंद्र सरकार के मंत्रालयों तक लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में कार्य किया है। नीति निर्माण से लेकर उसके प्रभावी क्रियान्वयन तक उन्होंने हर स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाई है। यही कारण है कि उन्हें छत्तीसगढ़ कैडर के सबसे अनुभवी और बहुआयामी वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों में गिना जाता है।
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