इंजीनियर से आईएएस तक… मयंक चतुर्वेदी की कहानी
Harrison Masih | Jun 30, 2026, 20:05 IST
आईएएस मयंक चतुर्वेदी
इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर यूपीएससी का सपना पूरा करने वाले आईएएस मयंक चतुर्वेदी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं। कई असफलताओं के बाद 2017 बैच के आईएएस बने और आज रायगढ़ जिले के कलेक्टर हैं।
यह कहानी सिर्फ एक आईएएस अफसर की नहीं, बल्कि उस युवा की है जिसने इंजीनियरिंग की, नौकरी की, असफलताएं देखीं, फिर सबकुछ दांव पर लगाकर यूपीएससी की लड़ाई जीती। छत्तीसगढ़ कैडर के 2017 बैच के आईएएस मयंक चतुर्वेदी आज रायगढ़ जैसे चुनौतीपूर्ण जिले के कलेक्टर हैं। शांत स्वभाव, ग्राउंड पर काम करने की शैली और प्रशासनिक पकड़ ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। उनकी यात्रा सीधी नहीं थी। इसमें संघर्ष भी था, रिस्क भी और सपनों के लिए नौकरी छोड़ने का साहस भी।
28 जनवरी 1991 को उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मे मयंक चतुर्वेदी एक संयुक्त परिवार में पले-बढ़े। घर में चार भाइयों का परिवार साथ रहता था। ऐसे माहौल में अनुशासन, सामंजस्य और सामूहिक जिम्मेदारी बचपन से ही उनके स्वभाव का हिस्सा बन गई। स्कूलिंग कानपुर से हुई और आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने प्रयागराज का रुख किया। यहां से उन्होंने इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। मयंक सिर्फ किताबों तक सीमित रहने वाले छात्र नहीं थे। कॉलेज लाइफ में वे खेलकूद और छात्र राजनीति दोनों में सक्रिय रहे। बास्केटबॉल, फुटबॉल और क्रिकेट जैसे खेलों में उन्होंने कॉलेज का राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व किया। मैदान में टीमवर्क सीखा और छात्र राजनीति से नेतृत्व। शायद यही वजह रही कि आगे चलकर प्रशासनिक सेवा में भी वे लोगों से सीधे जुड़ने वाले अफसर बने।
![IAS Mayank Chaturvedi]()
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद मयंक चतुर्वेदी ने नौकरी शुरू कर दी। आमतौर पर अच्छी नौकरी मिलने के बाद लोग स्थिर जिंदगी चुन लेते हैं, लेकिन उनके भीतर कहीं न कहीं सिविल सेवा का सपना लगातार जिंदा था। वे नौकरी के साथ यूपीएससी की तैयारी करते रहे। कई बार निराशा मिली, चयन नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आखिरकार उन्होंने बड़ा फैसला लिया। नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। यह वही मोड़ था जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। लगातार मेहनत और धैर्य के बाद उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास की और 2017 बैच के आईएएस अफसर बने।
28 अगस्त 2017 को आईएएस सेवा ज्वाइन करने के बाद मयंक चतुर्वेदी ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण लिया। ट्रेनिंग के दौरान उनकी पहली फील्ड पोस्टिंग रायगढ़ जिले में सहायक कलेक्टर के तौर पर हुई। इसके बाद उनका प्रशासनिक सफर लगातार आगे बढ़ता गया। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एसडीएम पेंड्रारोड और फिर अपर कलेक्टर के रूप में उन्होंने काम किया। यहां उन्होंने ग्रामीण प्रशासन और जमीनी व्यवस्था को करीब से समझा। फिर धमतरी जिला पंचायत के सीईओ बने, जहां पंचायत और विकास कार्यों में उनकी कार्यशैली की चर्चा रही। इसके बाद राजधानी रायपुर नगर निगम आयुक्त के रूप में उन्होंने शहरी प्रशासन संभाला। इसके बाद उन्हें दंतेवाड़ा जिले के कमान कलेक्टर के रूप में संभालने का मौका मिला।अब वे रायगढ़ जिले के कलेक्टर हैं। दंतेवाड़ा के बाद रायगढ़ जिला छत्तीसगढ़ का दूसरा संवेदनशील जिला है। दंतेवाड़ा में नक्सलवाद था तो रायगढ़ में भूअर्जन, पेड़ कटाई, उद्योगों के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध जैसा माहौल है। दंतेवाड़ा और रायगढ़ में काम करना सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि विश्वास जीतने की चुनौती भी माना जाता है।
![आईएएस मयंक चतुर्वेदी]()
कड़क प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बीच मयंक चतुर्वेदी का एक अलग पक्ष भी है। उन्हें गजल लिखने और सुनने का शौक है। व्यस्त सरकारी जीवन के बीच साहित्य और संगीत से उनका जुड़ाव उन्हें संतुलित बनाए रखता है। उनकी निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने अपनी कॉलेज की दोस्त से शादी की, जिनसे उनकी दोस्ती करीब दस साल पुरानी थी। उनकी पत्नी इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियर हैं और कॉर्पोरेट सेक्टर में काम कर चुकी हैं।
मयंक चतुर्वेदी उन युवा अफसरों में गिने जाते हैं जो प्रशासन को सिर्फ आदेश देने का माध्यम नहीं, बल्कि लोगों से संवाद का जरिया मानते हैं। इंजीनियरिंग बैकग्राउंड, खेलकूद का अनुभव, छात्र राजनीति की समझ और संघर्ष से निकली सफलता इन सभी ने उनकी प्रशासनिक शैली को अलग बनाया है। कानपुर से निकलकर रायगढ़ तक पहुंचने की यह यात्रा बताती है कि सपनों का रास्ता सीधा नहीं होता। कभी नौकरी छोड़नी पड़ती है, कभी असफलता झेलनी पड़ती है, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल आखिरकार मिल ही जाती है।
दंतेवाड़ा से दिल्ली, आईपीएस से आईएएस तक ....नम्रता जैन की प्रेरक यात्रा
9 जिलों में कप्तानी, चार रेंज की कमान संभालने वाले आईपीएस बीएन मीणा की कहानी
बस्तर का भरोसेमंद चेहरा अब एनआईए में, आईपीएस पी सुंदरराज की कहानी
इंजीनियर से आईएएस तक, अमृत विकास टोप्पो की कहानी
संयुक्त परिवार से निकला अफसर
IAS Mayank Chaturvedi
नौकरी भी… सपना भी
रायगढ़ से दंतेवाड़ा तक का सफर
आईएएस मयंक चतुर्वेदी
अफसर जो गजल भी लिखता है
नई पीढ़ी के अफसर की पहचान
ये खबरें भी पढ़ें...
9 जिलों में कप्तानी, चार रेंज की कमान संभालने वाले आईपीएस बीएन मीणा की कहानी
बस्तर का भरोसेमंद चेहरा अब एनआईए में, आईपीएस पी सुंदरराज की कहानी
इंजीनियर से आईएएस तक, अमृत विकास टोप्पो की कहानी
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari