जशपुर में पानी पर जाति का पहरा, छुआछूत की शर्मनाक तस्वीर, लोकभवन पहुंची शिकायत

VINAY VERMA | May 23, 2026, 21:28 IST
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जशपुर के पत्थलगांव क्षेत्र के ग्राम बटुराबहार हर्रापारा में एक गंभीर सामाजिक भेदभाव का मामला सामने आया है, जहां एक दलित परिवार को सरकारी बोर के पानी के उपयोग से रोकने, ताला लगाने, जातिसूचक गालियां देने और धमकी देने के आरोप लगे हैं।

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक दलित परिवार को सरकारी बोर का पानी पीने से रोक दिया गया। आरोप है कि गांव के दबंग ने खुद को ऊंची जाति का बताते हुए बोर में ताला लगा दिया। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार को गालियां दी गईं। जान से मारने की धमकी भी दी गई।



डोम हो, पानी नहीं मिलेगा

मामला पत्थलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम बटुराबहार हर्रापारा का है। मामले में पीड़िता फूलवती बाई कान्ड्रा ने पुलिस से शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि गांव में तीन-चार परिवार शासकीय बोर का पानी पीते हैं। गांव के अन्य लोग उन्हें “नीच जाति” कहकर अलग रखते हैं। आरोप है कि गांव का मिथलेश नेताम उन्हें “डोम” कहकर अपमानित करता है।



सरकारी बोर पर लगाया ताला

शिकायत के मुताबिक आरोपी ने सरकारी बोर में ताला लगा दिया। जब ताला खोलने को कहा गया तो वह मारपीट पर उतारू हो गया। पीड़िता ने कहा कि गांव में दूसरे स्थानों से भी पानी लेने पर रोक लगा दी गई है। परिवार के सामने पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।



Jashpur untouchability case

मेरा गांव है, जो चाहूंगा वही होगा

पीड़िता ने शिकायत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आरोपी खुद को प्रभावशाली बताकर धमकी देता है। वह कहता है कि “मेरा गांव है, यहां वही होगा जो मैं चाहूंगा।” शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी खुद को थाना अध्यक्ष से जुड़ा बताकर डराता है। वह खुलेआम कहता है कि “कहीं भी शिकायत कर लो, मेरा कुछ नहीं होगा।”



संविधान पर सीधा हमला

यह मामला सिर्फ पानी रोकने का नहीं है। यह संविधान और बराबरी के अधिकार पर हमला है। एक तरफ सरकारें सामाजिक समानता की बात करती हैं। दूसरी तरफ गांवों में आज भी जाति के नाम पर पानी तक बांटा जा रहा है। सवाल यह है कि आखिर सरकारी बोर पर किसी व्यक्ति का कब्जा कैसे हो गया।



प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

पीड़ित परिवार ने 19 मई 2026 को शिकायत दी है। लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं होने के आरोप लग रहे हैं। गांव में भय का माहौल है। परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। प्रशासन की खामोशी भी कई सवाल खड़े कर रही है।



एससी-एसटी एक्ट में बनता है मामला

कानूनी जानकारों के मुताबिक यदि शिकायत सही पाई जाती है तो मामला गंभीर श्रेणी में आएगा। जातिसूचक गाली देना, सार्वजनिक संसाधनों से वंचित करना और धमकाना एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध है। पुलिस पर अब कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।



राष्ट्रपति के नाम राज्यपाल को ज्ञापन

इधर जशपुर का मामला अब लोकभवन तक पहुंच गया है। सामाजिक न्याय अधिकार कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने इस मामले को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन बताते हुए कार्रवाई की मांग की है। मामले को लेकर राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया है। प्रतिनिधिमंडल ने छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रामेन डेका को यह ज्ञापन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम दिया है।



दलितों को पानी से वंचित करना अपराध

विधिक मामलों के जानकार और अधिवक्ता भगवानू नायक के अनुसार सार्वजनिक बोर से पानी लेने से रोकना, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर अपमानित करना सामाजिक अन्याय है। कानून भी इसकी छूट नहीं देता। यह संविधान और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन भी है।



निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

प्रतिनिधिमंडल ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया कि दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवारों को सुरक्षा दी जाए। उन्हें सार्वजनिक जलस्रोतों के उपयोग का अधिकार तत्काल सुनिश्चित किया जाए।



सबसे बड़ा सवाल

आखिर आजादी के इतने साल बाद भी क्या दलितों को पानी के लिए लड़ना पड़ेगा? क्या सरकारी बोर पर भी जाति का ताला लगेगा? और क्या दबंगई के सामने प्रशासन यूं ही चुप रहेगा? जशपुर की यह घटना व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर खड़ी हो गई है।



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