झीरम कांड में फंसी नक्सली प्रमिला, परिवार ने राष्ट्रपति से मांगी दया
झीरम घाटी कांड में मौत की सजा पा चुकी प्रमिला मोडियम के परिवार ने अब राष्ट्रपति से गुहार लगाई है। प्रमिला के पिता सोनू कड़ती ने राष्ट्रपति, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को पत्र भेजा है। इसमें बेटी को निर्दोष बताते हुए मामले की दोबारा समीक्षा और राहत की मांग की गई है।
कोर्ट ने सुनाई मौत की सजा
झीरम घाटी हमले के मामले में जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने 5 सितंबर को 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था। इनमें प्रमिला मोडियम भी शामिल थी। 16 सितंबर को अदालत ने सभी 10 दोषियों को मौत की सजा सुनाई। अब इस सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट पहुंच चुका है।
पहले ही छोड़ दिया था संगठन
पिता सोनू कड़ती का दावा है कि प्रमिला पहले नक्सल संगठन में थी। लेकिन झीरम हमले से काफी पहले उसने संगठन छोड़ दिया था। इसके बाद वह बीजापुर के गोरना गांव में अपने परिवार के साथ रह रही थी। उसकी शादी रमेश गोरना से हुई थी। परिवार का कहना है कि रमेश हमले में शामिल था, लेकिन प्रमिला का उससे कोई लेना-देना नहीं था।
घर से उठाने का आरोप
परिवार के मुताबिक 25 मई 2013 के हमले के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में गोरना पहुंची। इसी दौरान प्रमिला को उसके घर से हिरासत में लिया गया। पिता का आरोप है कि उसे दबाव में रखा गया और प्रताड़ित किया गया।
डर में कबूल किया जुर्म
परिवार का दावा है कि पुलिस के दबाव में प्रमिला ने अपने पति को बचाने के लिए अपराध कबूल किया। इसी कबूलनामे को बाद में उसके खिलाफ अहम सबूत बनाया गया। परिवार अब इसी बिंदु की दोबारा जांच की मांग कर रहा है। हालांकि, ये दावे परिवार की ओर से लगाए गए हैं; अदालत के फैसले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोष तय हुआ है।
इन 10 आरोपियों को मिली है सजा-ए-मौत
अनुच्छेद 21 का हवाला
परिवार ने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 21 का भी हवाला दिया है। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है। परिवार का सवाल है कि अगर किसी महिला की सजा एक कथित दबाव वाले इकबालिया बयान पर टिकी है, तो क्या मामले की दोबारा समीक्षा नहीं होनी चाहिए?
पुनर्वास नीति का भी जिक्र
पत्र में सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति का भी हवाला दिया गया है। परिवार का कहना है कि नक्सल हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वालों को सरकार मौका देती रही है। ऐसे में प्रमिला को भी परिवार के बीच लौटने का अवसर दिया जाना चाहिए।
राष्ट्रपति से आखिरी उम्मीद
सोनू कड़ती ने मानवीय आधार पर प्रमिला के मामले की फिर से समीक्षा, क्षमादान और परिवार के साथ जीवन बिताने का मौका देने की अपील की है। पत्र की प्रतियां प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को भी भेजी गई हैं। अब परिवार की नजर राष्ट्रपति स्तर पर होने वाली कार्रवाई और हाईकोर्ट में चलने वाली डेथ रेफरेंस प्रक्रिया पर है।
FAQ
- झीरम हत्याकांड क्या है?
झीरम हत्याकांड 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ के बस्तर की झीरम घाटी में हुआ नक्सली हमला था। नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला किया था, जिसमें प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत 29 लोगों की मौत हुई थी। - झीरम घाटी कांड का मामला अभी कहां है?
मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट पहुंच चुका है।
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