झीरम कांड के दोषियों मो मिलेगी सज़ा, विशेष अदालत का फैसला आज
Raipur : देश को झकझोर देने वाले चर्चित झीरम घाटी हत्याकांड मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत बुधवार को अपना फैसला सुनाते हुए दोषियों की सजा का ऐलान करेगी। 5 सितंबर को जगदलपुर स्थित विशेष अदालत के न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सुनवाई पूरी करते हुए इस भीषण नरसंहार में शामिल 10 माओवादियों को दोषी करार दिया था। सजा के ऐलान को लेकर पूरे प्रदेश और देश की निगाहें जगदलपुर न्यायालय परिसर पर टिकी हुई हैं।
सजा की सीमा: उम्रकैद से लेकर मृत्युदंड तक का प्रावधान
लोक अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार, अभियुक्तों को जिन गंभीर और संगीन धाराओं के तहत एनआईए की विशेष अदालत ने दोषी ठहराया है, उनमें न्यूनतम आजीवन कारावास (उम्रकैद) से लेकर अधिकतम मृत्युदंड (फांसी) तक की सजा का प्रावधान है। अदालत में बंदियों की सुरक्षा को लेकर कड़े इंतजाम किए गए हैं।
ये 10 माओवादी करार दिए गए हैं दोषी
जिन 10 माओवादियों को अदालत ने दोषी ठहराया है, वे वर्तमान में जगदलपुर के केंद्रीय कारागार में बंद हैं। इनके नाम हैं:
प्रमिला मोडियाम
सुमित्रा पुनेम
मुक्का मांडवी
मड़कामी देवा
कोसा कवासी
आयत मरकाम
बेंजामी सेना
चैतू लेकाम
जोगा मड़कामी
महादेव नाग
मामले की सुनवाई के दौरान कुल 11 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला था, लेकिन ट्रायल की प्रक्रिया के दौरान ही एक आरोपी की मृत्यु हो चुकी है।
क्या था झीरम घाटी हत्याकांड?
यह खूनी वारदात 25 मई 2013 को घटी थी। उस दिन बस्तर जिले में जगदलपुर से करीब 42 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर स्थित दरभा की झीरम घाटी में नक्सलियों ने पूर्व-नियोजित रणनीति के तहत घात लगाकर हमला किया था। उस समय कांग्रेस पार्टी की ‘परिवर्तन यात्रा’ वहां से गुजर रही थी।
नक्सलियों ने अंधाधुंध गोलीबारी और आईईडी ब्लास्ट कर कांग्रेस के पूरे शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया था। इस भयावह हमले में कुल 32 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 38 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।
शहीद हुए प्रमुख नेता और जवान:
महेंद्र कर्मा: पूर्व नेता प्रतिपक्ष और सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरा।
नंद कुमार पटेल: तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष।
दिनेश पटेल: नंद कुमार पटेल के पुत्र।
विद्याचरण शुक्ल: देश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री (गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान निधन)।
उदय मुदलियार: पूर्व विधायक।
योगेंद्र शर्मा: कांग्रेस नेता।
इनके अलावा कई अन्य वरिष्ठ नेता, सुरक्षा बलों के जवान और निर्दोष नागरिक इस हमले में शहीद हुए थे।
1000 पन्नों की चार्जशीट और 101 गवाह
घटना की भयावहता को देखते हुए मामले की जांच एनआईए (NIA) को सौंपी गई थी। एनआईए ने गहन जांच के बाद वर्ष 2015 में कोर्ट के समक्ष लगभग 1000 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी। मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 101 गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराए गए, जिसके आधार पर कोर्ट ने इन 10 माओवादियों को दोषी पाया।
फैसले के बाद प्रदेश में गरमाई सियासत
अदालत द्वारा 5 सितंबर को आरोपियों को दोषी ठहराए जाने के बाद से ही छत्तीसगढ़ का राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है
भाजपा का रुख: प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था कि पिछले पांच वर्षों तक राज्य में कांग्रेस की सरकार रही, लेकिन उन्होंने इस मामले में न्याय दिलाने के लिए कुछ खास नहीं किया।
कांग्रेस का पलटवार: कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा कि एनआईए की जांच निष्पक्ष नहीं रही और एजेंसी ने कई बड़े माओवादी नेताओं को बचाने का काम किया है।
आज आने वाले सजा के फैसले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और न्यायालय परिसर के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
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