झीरम कांड पर सियासत : 10 दोषियों की सजा पर बघेल बोले- पूरा न्याय अभी बाकी
समझें क्या है पूरा मामला
- झीरम कांड के फैसले के बाद फिर उठे कई सवाल
- 10 दोषियों को सजा तय, राजनीतिक साजिश पर बहस जारी
- NIA के फैसले पर बघेल ने उठाई जांच की मांग
- झीरम हमले के पीड़ितों को पूरा न्याय कब मिलेगा?
- 13 साल बाद फैसला आया, लेकिन विवाद अभी बाकी है
Raipur। झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में NIA की विशेष अदालत के फैसले के बाद राजनीति तेज हो गई है। अदालत ने 10 आरोपियों को दोषी माना है। अब 16 सितंबर को दोषियों की सजा पर सुनवाई होगी। इस फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सवाल उठाते हुए इसे अधूरा न्याय बताया है।
बघेल ने कहा कि झीरम घाटी हमला सिर्फ एक नक्सली हमला नहीं था, बल्कि इसके पीछे बड़ी राजनीतिक साजिश की जांच भी होनी चाहिए। उनके मुताबिक जब तक इस पहलू की जांच नहीं होगी, तब तक पीड़ितों को पूरा न्याय नहीं मिल पाएगा।
बघेल ने कहा- सिर्फ 10 लोगों को सजा से न्याय पूरा नहीं
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि झीरम घाटी हमला लोकतंत्र के इतिहास की बड़ी राजनीतिक हिंसक घटनाओं में शामिल है। उनका कहना है कि इतने बड़े मामले में केवल 10 आरोपियों को सजा मिलना पर्याप्त नहीं है।
बघेल ने दावा किया कि NIA ने अपनी जांच में बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बात कही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं।
राजनीतिक षडयंत्र की जांच को लेकर उठाए सवाल
भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि झीरम कांड के पीछे कथित राजनीतिक षडयंत्र की जांच अब तक नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि जांच आयोग और आपराधिक जांच अलग-अलग विषय हैं।
उनके अनुसार जांच आयोग का काम सुरक्षा में हुई चूक की जांच करना था, जबकि अपराधियों तक पहुंचने के लिए अलग जांच जरूरी थी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और पीड़ित परिवार लंबे समय से इस मामले में व्यापक जांच की मांग करते रहे हैं।
दूसरी FIR का भी किया जिक्र
बघेल ने साल 2020 में शहीद उदय मुदलियार के बेटे जितेंद्र मुदलियार की शिकायत के बाद दर्ज हुई दूसरी FIR का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस FIR को लेकर NIA ने आपत्ति जताई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने NIA की आपत्ति खारिज कर दी थी।
बघेल ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी मामले में जांच आगे नहीं बढ़ी। उन्होंने कहा कि कथित आपराधिक षडयंत्र की जांच होना जरूरी है।
ये 10 आरोपी ठहराए गए दोषी
NIA की विशेष अदालत ने जिन 10 आरोपियों को दोषी माना है, उनमें शामिल हैं—
प्रमिला मोडियम
चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम
मुक्का मांडवी
कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
आयता मरकाम
मदकामी देवा
जोगा मदकामी
बनजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा
महादेव नाग
मामले में पहले 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चल रही थी। इनमें से एक आरोपी की मौत हो चुकी है। अब 10 दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला होगा।
25 मई 2013 को हुआ था झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी हमला 25 मई 2013 को हुआ था। उस समय कांग्रेस परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। सुकमा की सभा के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला जगदलपुर लौट रहा था।
काफिले में करीब 25 गाड़ियां और लगभग 200 नेता-कार्यकर्ता शामिल थे। झीरम घाटी पहुंचने पर नक्सलियों ने रास्ता रोककर हमला कर दिया। करीब डेढ़ घंटे तक गोलीबारी चली।
इस हमले में कांग्रेस के कई बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी। इनमें तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और महेंद्र कर्मा जैसे नेता शामिल थे।
अब आगे क्या?
NIA कोर्ट के फैसले से मामले में कानूनी प्रक्रिया का एक चरण पूरा हुआ है। वहीं भूपेश बघेल के राजनीतिक षडयंत्र की जांच वाले बयान के बाद झीरम कांड एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का मुद्दा बन गया है।
FAQ
- झीरम घाटी हमले के मामले में कितने आरोपियों को दोषी माना गया है?
NIA की विशेष अदालत ने झीरम कांड में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। - भूपेश बघेल ने झीरम कांड के फैसले पर क्या कहा?
भूपेश बघेल ने फैसले को अधूरा न्याय बताया और राजनीतिक षडयंत्र की जांच की मांग की है। - झीरम घाटी हमला कब और कैसे हुआ था?
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर झीरम घाटी में नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौत हुई थी।
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