सीएम कन्या विवाह योजना में 5 हजार की वसूली, घर जाकर लगा रहीं पुकार
NEWS IN SHORT:
- मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 5 हजार वसूली के आरोप
- रायपुर की 28 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने की लिखित शिकायत
- 8 मई से शिकायत लंबित, अब तक कार्रवाई नहीं
- नकद लेकर खाते में डाले जा रहे योजना के पैसे
- धरने की चेतावनी के बाद जांच कमेटी बनाने की तैयारी
NEWS IN DETAIL:
छत्तीसगढ़ के महिला एवं बाल विकास विभाग में एक नया घोटाला सामने आया है।आरोप बेहद गंभीर हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के नाम पर शादीशुदा जोड़ों से 5 हजार रुपए की वसूली की जा रही है। यह पैसा उस 35 हजार रुपए की सरकारी सहायता में से मांगा जा रहा है, जो गरीब नवविवाहित जोड़ों को दी जाती है।
आरोप है कि पूरे प्रदेश में यह खेल धड़ल्ले से चल रहा है। कहीं पैसा डालने से पहले नकद लिया जा रहा है। तो कहीं खाते में राशि आने के बाद वापस 5 हजार रुपए जमा करवाए जा रहे हैं। महिला एंव बाल विकास विभाग की डायरेक्टर रेणुका श्रीवास्तव मामले को देखने की बात कह रही हैं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने खोली पोल
इस कथित वसूली का मामला रायपुर से खुलकर सामने आया है। यहां 28 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने ही विभाग के पर्यवेक्षक के खिलाफ लिखित शिकायत की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन पर शादीशुदा जोड़ों से 5 हजार रुपए वसूलने का दबाव बनाया जा रहा था।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि बार-बार जोड़ों के घर जाकर पैसे मांगना पड़ रहा था। इससे वे मानसिक रूप से परेशान हो चुकी हैं। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधायक अनुज शर्मा से भी शिकायत की।
8 मई को शिकायत, कार्रवाई नहीं
सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई को लेकर उठ रहा है। यह शिकायत 8 मई को की गई थी। लेकिन इतने दिनों बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि विभाग मामले को दबाने में लगा रहा।
परेशान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ ने रायपुर डीपीओ के खिलाफ धरने की चेतावनी दी, तब जाकर हलचल शुरू हुई। अब एक जांच कमेटी बनाने की बात कही जा रही है।
कमीशन का तरीका नहीं बदला?
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना पहले अलग तरीके से चलती थी। उस समय गरीब जोड़ों को गृहस्थी का सामान दिया जाता था। सरकार प्रति जोड़ा 30 से 35 हजार रुपए खर्च करती थी। लेकिन उस व्यवस्था में भी शिकायतें आईं। आरोप लगे कि खरीदी में कमीशनखोरी हो रही है।
घटिया सामान बांटा जा रहा है। इसके बाद सरकार ने नियम बदला। तय किया गया कि अब सीधे दुल्हन के खाते में 35 हजार रुपए डाले जाएंगे। लेकिन अब आरोप है कि कमीशन का खेल बंद नहीं हुआ। बस तरीका बदल गया।
कहकर बनाया जा रहा दबाव?
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनसे कहा जा रहा था कि पैसा ऊपर तक जाता है। इसी वजह से वसूली जरूरी है। हालांकि इस पूरे मामले में विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग की डायरेक्टर रेणुका श्रीवास्तव सिर्फ इतना कह रही हैं कि मामले को देखा जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि यदि शिकायत लिखित में आ चुकी थी, तो जांच तुरंत क्यों नहीं हुई? और यदि आरोप गलत हैं, तो विभाग अब तक चुप क्यों है?
गरीब बेटियों की योजना पर दाग
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब परिवारों के लिए बनाई गई थी। ताकि शादी के समय आर्थिक मदद मिल सके। लेकिन अब उसी योजना पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। यदि आरोप सही हैं, तो इसका मतलब साफ है कि सरकारी मदद गरीबों तक पूरी नहीं पहुंच रही। बीच में कमीशन का नया नेटवर्क खड़ा हो गया है।
इस मामले ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या योजनाओं का फायदा जरूरतमंदों तक बिना कट के पहुंच पाता है? या हर योजना में सेटिंग का सिस्टम सक्रिय हो जाता है?
धरने की चेतावनी के बाद हरकत
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघ अब खुलकर सामने आ गया है। संघ ने साफ कहा है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। यानी मामला अब सिर्फ विभागीय शिकायत तक सीमित नहीं है। यह राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दा बनता जा रहा है। अब सबकी नजर जांच कमेटी पर है। क्या वसूली करने वालों पर कार्रवाई होगी? या यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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