करकाभाट बना भारत का स्टोनहेंज, विश्व धरोहर सूची में शामिल करने की मांग
समझें क्या है पूरा मामला
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में 5000 साल पुराना इतिहास दफन है। यहाँ का करकाभाट महापाषाणिक कब्र समूह अब वैश्विक सुर्खियां बटोर रहा है। दक्षिण कोरिया के वैज्ञानिकों की एक टीम हाल ही में यहाँ पहुँची थी। अद्भुत पाषाण संरचनाओं को देखकर विदेशी वैज्ञानिक भी दंग रह गए। विशेषज्ञ अब इस प्राचीन स्थल को भारत का स्टोनहेंज कह रहे हैं।
क्या है करकाभाट का इतिहास
छत्तीसगढ़ के बालोद जिला मुख्यालय से यह जगह 16 किलोमीटर दूर है। यह स्थान बालोद से धमतरी मार्ग पर स्थित है। पुरातत्वविदों के अनुसार यह समूचे एशिया का सबसे बड़ा महापाषाणिक कब्र समूह है। यहाँ करीब 5000 साल पुराना प्रागैतिहासिक इतिहास बिखरा पड़ा है। यह आदिम समाज की बेजोड़ इंजीनियरिंग का जीता-जागता प्रमाण है।
यहाँ पत्थरों की बनावट में एक खास तरह का विज्ञान छिपा हुआ है। इंग्लैंड के सुप्रसिद्ध स्टोनहेंज जैसी अनूठी संरचना यहाँ देखने को मिलती है। इसी वजह से देश-विदेश के वैज्ञानिक इस जगह की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। यह जगह प्राचीन काल के इंसानों की समझ को दर्शाती है।
विशालता में सबसे आगे है यह स्थल
इस तरह के पाषाण स्थल भारत के मणिपुर और नागालैंड में मिले हैं। इसके अलावा पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी ऐसे स्थल पाए गए हैं। लेकिन विशालता के मामले में छत्तीसगढ़ का करकाभाट सबसे आगे है। यहाँ एकल, सामूहिक और संयुक्त रूप से कब्रें बनाई गई हैं। कुल मिलाकर यहाँ 7 श्रेणियों की प्राचीन कब्रें पाई गई हैं।
यहाँ लगे हर पत्थर को एक तरफ से तराशा गया है। इन पत्थरों की एक खास विशेषता वैज्ञानिकों को बहुत चौंकाती है। पत्थरों का तराशा हुआ हिस्सा हमेशा उत्तर दिशा की ओर रहता है। इससे पता चलता है कि उस दौर में भी लोगों को दिशाओं का पूरा ज्ञान था।
खुदाई में मिले सोने के सिक्के
दिल्ली और रायपुर के पुरातत्व विभाग (Archaeology Department) ने यहाँ खुदाई की थी। यह खुदाई साल 1990-91 के दौरान की गई थी। इस खुदाई में लोहे के प्राचीन हथियार मिले थे। इसके साथ ही प्राचीन काल के काले और लाल मृदभांड भी मिले थे।
इसके बाद कुलिया-कनेरी गांव में भी पुरातत्व विभाग ने खुदाई की थी। वहाँ की खुदाई से 30 बहुमूल्य सोने के सिक्के प्राप्त हुए थे। इनमें से 25 सिक्के प्राचीन नल राजवंश के काल के बताए जाते हैं। इन सिक्कों से इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है।
यूनेस्को धरोहर बनाने की मांग
यह पूरा ऐतिहासिक स्थल 10 किलोमीटर के बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है। इस पूरे क्षेत्र में 5000 से अधिक प्रागैतिहासिक कब्रें मौजूद हैं। इतने बड़े ऐतिहासिक खजाने को सहेजने के लिए अब मांग उठने लगी है। स्थानीय विद्वान इस दिशा में लगातार प्रयास कर रहे हैं।
जिले के इतिहासकार अरमान अश्क ने इसके महत्व को रेखांकित किया है। साहित्यकार डॉ. अशोक आकाश ने भी इस स्थल को बचाने की बात कही है। इन दोनों ने इस स्थल को यूनेस्को (UNESCO – United Nations Educational, Scientific and Cultural Organization) की सूची में शामिल करने की मांग की है। इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के लिए प्रयास तेज हो गए हैं। अगर ऐसा होता है तो करकाभाट अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है। यहाँ दुनिया भर से पर्यटक आ सकते हैं।
FAQ
- 'भारत का स्टोनहेंज' कहे जाने वाले महापाषाणिक कब्र समूह 'करकाभाट' छत्तीसगढ़ के किस जिले में स्थित है?
उत्तर: बालोद जिला (मुख्यालय से 16 किमी दूर, बालोद-धमतरी मार्ग पर)। - एशिया का सबसे बड़ा महापाषाणिक कब्र समूह (Megalithic Burial Site) कहाँ स्थित है और यह कितना पुराना है?
उत्तर: यह छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के करकाभाट में है, जो लगभग 5000 साल पुराना (प्रागैतिहासिक काल) है। - करकाभाट में पाई जाने वाली प्राचीन कब्रों को कितनी श्रेणियों में बांटा गया है?
उत्तर: यहाँ कुल 7 अलग-अलग श्रेणियों (Categories) की प्राचीन कब्रें पाई गई हैं।
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