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जबलपुर क्रूज हादसा: पर्यटन, मौसम विभाग और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
Neel Tiwari | Jun 08, 2026, 15:23 IST
जबलपुर क्रूज हादसा
बरगी क्रूज हादसे की जांच के बीच आयोग के समक्ष दायर एक शपथ पत्र ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि क्रूज का बीमा ही नहीं था। साथ ही मौसम की चेतावनियों पर ध्यान नहीं दिया गया। न ही कई विभागों ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया।
समझें क्या है पूरा मामला...
- हादसे में शामिल क्रूज और यात्रियों के लिए कोई वैध बीमा नहीं होने का दावा किया गया है।
- बीमा कंपनी ने क्रूज के नाम पर पॉलिसी जारी होने से इनकार किया है।
- क्रूज का अनिवार्य सर्वेक्षण और सुरक्षा निरीक्षण नहीं होने का आरोप है।
- मौसम विभाग की चेतावनियों पर कार्रवाई न करने के भी गंभीर आरोप लगे हैं।।
- पर्यटन विभाग समेत कई एजेंसियों की जवाबदेही तय करने की मांग रखी गई है।
हादसा दुर्घटना नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी
शिकायतकर्ता अखिलेश त्रिपाठी ने आयोग के समक्ष प्रस्तुत अपने हलफनामे में कई विभागों की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।
यात्रियों और क्रूज का नहीं था बीमा
दावा किया गया है कि अंतर्देशीय जलयान अधिनियम के तहत ऐसे व्यावसायिक संचालन में बीमा अनिवार्य है। इसके बावजूद यात्रियों को सुरक्षा कवच नहीं दिया गया। हलफनामे के अनुसार घटना के समय क्रूज का बीमा प्रभावी नहीं था और वास्तव में उसका कभी बीमा कराया ही नहीं गया।
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बीमा कंपनी ने भी पल्ला झाड़ा
हलफनामे में यह भी कहा गया है कि जिस बीमा पॉलिसी का हवाला दिया गया, वह क्रूज की नहीं बल्कि मैकल रिसॉर्ट से जुड़ी प्रतीत होती है। यदि यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह जांच का एक महत्वपूर्ण बिंदु बन सकता है।
बिना सर्वे और फिटनेस जांच के चल रहा था क्रूज?
शिकायतकर्ता का कहना है कि मध्य प्रदेश अंतर्देशीय वाष्प जलयान नियम के तहत यात्रियों को ले जाने वाले जलयानों का सर्वेक्षण और निरीक्षण आवश्यक है। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने नियमों का पालन नहीं कराया और जलयान को संचालन की अनुमति दे दी।
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अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग
शिकायतकर्ता ने तर्क दिया है कि जिन अधिकारियों ने अपने वैधानिक दायित्वों का निर्वहन नहीं किया, वे भी इस घटना की जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
मौसम चेतावनियों को लेकर भी उठे सवाल
यदि प्रतिकूल मौसम को लेकर कोई चेतावनी जारी हुई थी और उस पर कार्रवाई नहीं की गई, तो संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
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पर्यटन विभाग पर भी लगाए गए गंभीर आरोप
यदि मौसम विभाग द्वारा चेतावनियां जारी की गई थीं। पर्यटन विभाग या अन्य जिम्मेदार एजेंसियों ने उन्हें नजरअंदाज किया, तो यह सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से समझौता माना जाएगा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ऐसी लापरवाही ने यात्रियों को संभावित खतरे के बीच छोड़ दिया।
गोवा, केरल और महाराष्ट्र के मॉडल का हवाला
गोवा, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में बीमा, फिटनेस प्रमाणपत्र जैसे सुरक्षा प्रोटोकॉल अनिवार्य किए गए हैं।
साथ ही स्थिरता परीक्षण, जीवन रक्षक उपकरण, प्रशिक्षित चालक दल और मौसम सुरक्षा प्रोटोकॉल भी अनिवार्य किए गए हैं। जबकि मध्य प्रदेश में इन मानकों का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
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हादसे की जांच में नए आयाम जुड़ने की संभावना
यदि आयोग इन आरोपों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करता है, तो आने वाले दिनों में कई विभागों और अधिकारियों की भूमिका पर महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।
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