जमीन लेने के लिए केदार कश्यप ने बदली जाति, आदिवासी से सामान्य वर्ग के बने वन मंत्री, करोड़ों का खेल!
इस जमीन के तीन हिस्से केदार कश्यप के नाम हैं। और इसमें जाति लिखी है सामान्य। केदार कश्यप आदिवासी मंत्री के कोटे से विष्णु मंत्रिमंडल में शामिल हैं। और वहां पर उनकी जाति आदिवासी है। तो फिर जमीन के लिए केदार कश्यप ने जाति क्यों बदली, यह बड़ा सवाल है। यह सारे दस्तावेज आरडीए की वेबसाइट पर अपलोड हैं। वहीं कांग्रेस नेता डॉ राकेश गुप्ता ने केदार कश्यप पर जमीन के फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। आरडीए ने मंत्री के दबाव में उनकी पत्नी की कंपनी के नाम पर दर्ज कौड़ियों की जमीन को एक किलोमीटर दूर करोड़ों की जमीन में बदल लिया। नक्शे में फाइनल प्लॉट 25 नंबर दिखाया गया जो रायपुर के सड्डू इलाके में है।
क्यों बदली जाति :
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आदिवासी मंत्री केदार कश्यप ने जमीन के लिए अपनी जाति बदलकर सामान्य क्यों लिखवाई।
कहीं ऐसा तो नहीं की मंत्री जी ने बाद में बेचने में दिक्कत न आए इसलिए सामान्य लिखवा दिया हो। बीजेपी प्रवक्ता उज्जवल दीपक का कहना है कि कंपनी के रेवेन्यू रिकॉर्ड में कंपनी कोई जाती नहीं होती इसीलिए उसे सामान्य लिखा जाता है।
जानकार कहते हैं कि जमीन में जाति का बड़ा रोल है। यदि इस जमीन पर आदिवासी लिखा जाता तो आदिवासी की जमीन को बेचने में बहुत दिक्कत होती है। कलेक्टर की परमिशन के साथ ही अन्य कानूनी प्रक्रियाएं भी पूरी करनी पड़ती है। आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी को बेचने में बहुत कानूनी अड़चनें आती हैं। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला कहते हैं कि आदिवासी होने के कारण केदार कश्यप को जमीन बेचने के कारण अभी भी कलेक्टर समेत अन्य कानूनी अनुमति लेनी होंगी।
क्या है पूरा मामला :
रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की नगर विकास योजना में भूखंडों के पुनर्गठन और आवंटन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी कंपनी को कचना की जमीन के बदले सड्डू में ऐसा भूखंड दिया जा रहा है, जिसकी संभावित कीमत करीब 20 करोड़ रुपए हो सकती है। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर योजना निरस्त करने और भूखंडों के पुनर्गठन व आवंटन की जांच कराने की मांग की गई है।
डॉ. राकेश गुप्ता के मुताबिक राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड को सड्डू में प्लॉट नंबर 25 दिए जाने का प्रस्ताव है। इसका क्षेत्रफल 2,168 वर्गमीटर यानी करीब 23,327 वर्गफीट बताया गया है। यह भूखंड प्रस्तावित 150 फीट चौड़ी एमआर-43 सड़क के पास स्थित है। सड़क बनने के बाद इस क्षेत्र में जमीन की कीमत करीब 10 हजार रुपए प्रति वर्गफीट तक पहुंच सकती है।
कचना में 1.33 एकड़ जमीन:
राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड के पास कचना के नालापारा क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन है। इस जमीन तक पहुंचने के लिए संकरी सड़क है और इसी वजह से इसकी बाजार कीमत कौड़ियों के मोल थी। नगर विकास योजना में जमीन को शामिल किए जाने के बाद कंपनी को मूल स्थान से अलग सड्डू में भूखंड दिया जा रहा है। कचना स्थित कंपनी की जमीन को योजना में प्लॉट नंबर 71 के तौर पर दर्शाया गया है और इसे सार्वजनिक सुविधा यानी पब्लिक एमेनिटी के लिए आरक्षित बताया गया है। सवाल है कि यदि मूल जमीन नगर विकास योजना में शामिल की गई है तो उसके बदले फाइनल प्लॉट किसी दूसरे क्षेत्र में क्यों दिया जा रहा है।
एक किलोमीटर दूर दिया प्लॉट :
छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50 के प्रावधानों के तहत भूखंड के पुनर्गठन की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। पुनर्गठन के बाद भू-स्वामी को दिया जाने वाला अंतिम भूखंड मूल भूमि या उससे लगे क्षेत्र में होना चाहिए। कचना स्थित जमीन के बदले सड्डू में प्लॉट दिया जा रहा है, जो मूल भूमि से करीब एक किलोमीटर दूर है। इसी दूरी और दोनों स्थानों की संभावित जमीन कीमतों में अंतर को लेकर पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग की जा रही है।
मंत्री की पत्नी की कंपनी में हिस्सेदारी :
राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में मंत्री की पत्नी शांति कश्यप की भूमिका का भी उल्लेख किया है। शांति कश्यप कंपनी की निदेशक हैं और उनके नाम कंपनी में 80 हजार रुपए के शेयर हैं। वर्ष 2023 के चुनावी शपथपत्र में मंत्री केदार कश्यप ने यह जानकारी दी है। सवाल केवल एक भूखंड को लेकर नहीं है। नगर विकास योजना में कुछ अन्य भू-स्वामियों को भी प्रमुख सड़क के आसपास की जमीन के बजाय अंदरूनी हिस्सों में भूखंड दिए गए हैं। कांग्रेस ने पूरी सूची और पुनर्गठन की प्रक्रिया की जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अलग-अलग भू-स्वामियों को भूखंड आवंटित करने में किन मानकों का पालन किया गया।
RDA ने कहा दावा-आपत्ति के बाद होगी जांच
मामले में RDA की ओर से कहा गया है कि नगर विकास योजना के तहत भूखंडों का आवंटन निर्धारित प्रक्रिया और नियमों के अनुसार किया गया है। RDA के मुताबिक आवंटन को लेकर दावा-आपत्ति मंगाई गई है। यदि किसी पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई जाती है तो संबंधित कमेटी उसकी जांच करेगी और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। RDA ने यह भी कहा है कि नगर विकास योजनाओं में बड़े भू-स्वामियों को प्रमुख सड़क के आसपास भूखंड मिलने का प्रावधान प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। फिलहाल मामला आरोप और आपत्तियों के स्तर पर है। मंत्री केदार कश्यप की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।