रायपुर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई: खैर लकड़ी का गोदाम सील
समझें क्या है पूरा मामला
रायपुर के तेंदुआ गांव में वन विभाग ने छापेमारी की है। वहां से करीब 80 टन प्रतिबंधित खैर लकड़ी जब्त की गई। इस लकड़ी को हरियाणा भेजने की तैयारी की जा रही थी। आरोपी फर्जी ट्रांजिट परमिट का इस्तेमाल कर रहे थे। फिलहाल मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल फरार चल रहा है।
रायपुर में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई
रायपुर के तेंदुआ क्षेत्र में वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी। इसके बाद विभाग की टीम ने एक गोदाम में दबिश दी। वहां भारी मात्रा में खैर की लकड़ी का अवैध भंडारण मिला। टीम ने तत्काल गोदाम को पूरी तरह से सील कर दिया।
विभाग ने वहां से करीब 80 टन खैर लकड़ी जब्त की है। जब्त की गई लकड़ी की कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये है। इस मामले में पुलिस ने गोदाम के मुंशी इमरान खान को गिरफ्तार किया है। हालांकि, मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल अभी भी फरार है।
फर्जी टीपी से चल रहा था तस्करी का खेल
जांच में खैर लकड़ी की तस्करी का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। आरोपी फर्जी टीपी (TP – Transit Permit) का इस्तेमाल कर रहे थे। वे आंध्र प्रदेश और ओडिशा से लकड़ी छत्तीसगढ़ लाते थे। इसके बाद इसे देश के दूसरे राज्यों में भेजा जाता था।
तस्कर कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से असली जैसी दिखने वाली टीपी बनाते थे। इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर गाड़ियां चेकपोस्ट पार कर जाती थीं। इस फर्जीवाड़े से वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं।
क्यूआर कोड की जांच न होना बना वरदान
वर्तमान में एनटीपीएस (NTPS – National Transit Pass System) प्रणाली लागू है। इसके तहत कंप्यूटर आधारित डिजिटल टीपी जारी की जाती है। इन पास पर सुरक्षा के लिए क्यूआर कोड भी मौजूद होता है।
लेकिन चेकपोस्ट पर इस कोड को जांचने के लिए स्कैनर मौजूद नहीं हैं। इसके अलावा कई कर्मचारियों को कंप्यूटर प्रणाली की पूरी जानकारी नहीं है। तस्कर इसी कमी का फायदा उठाकर गाड़ियां पार करा देते थे।
पुराना अपराधी है आरोपी मनीष अग्रवाल
मुख्य आरोपी मनीष अग्रवाल बलौदाबाजार जिले के सरसीवां का रहने वाला है। उसने तेंदुआ गांव में गोदाम किराए पर लिया था। मनीष के खिलाफ पहले भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं।
उसके खिलाफ रायगढ़, जांजगीर, रायपुर और माना थानों में केस दर्ज हैं। वह अलग-अलग नौ मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था। कार्रवाई के समय उसके सभी नंबर बंद मिले। मुंशी के मोबाइल से फर्जी टीपी के चैट मिले हैं।
पहले भी जेल जा चुका है आरोपी
वन परिक्षेत्र अधिकारी दीपक कुमार तिवारी ने मनीष के बारे में बताया। मनीष का नाम पहले भी वन अपराधों में सामने आ चुका है। अक्टूबर 2020 में उसकी अवैध लकड़ी से भरी गाड़ी पकड़ी गई थी।
उस मामले में मनीष को जेल भी भेजा गया था। कुछ महीने पहले एक राइस मिल से भी अवैध लकड़ी मिली थी। उस मामले में भी मनीष अग्रवाल का नाम सामने आया था।
वन्यजीव तस्करी से भी जुड़े हैं तार
मनीष अग्रवाल पर वन्यजीवों की तस्करी का भी आरोप है। जुलाई 2021 में तेंदुए की खाल के अवैध व्यापार में उसका नाम आया था। वन विभाग वन्यजीव अपराधों के एंगल से भी जांच कर रहा है।
भारतीय वन अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई
भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act, 1927) के तहत सख्त नियम हैं। बिना अनुमति के प्रतिबंधित वन उपज का परिवहन और भंडारण अपराध है।
ऐसे मामलों में अवैध लकड़ी और गाड़ियां जब्त की जा सकती हैं। अपराध की गंभीरता के आधार पर जुर्माना और जेल का प्रावधान है। पुलिस आरोपी की संपत्ति की भी जांच कर सकती है।
FAQ
- रायपुर में वन विभाग ने कितनी लकड़ी जब्त की है?
Ans: वन विभाग ने रायपुर के तेंदुआ गांव से करीब 80 टन प्रतिबंधित खैर लकड़ी जब्त की है। इसकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। - खैर लकड़ी तस्करी के लिए आरोपी किस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे थे?
Ans: आरोपी तस्करी के लिए कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से फर्जी टीपी तैयार करते थे। चेकपोस्ट पर स्कैनर न होने के कारण यह फर्जी टीपी आसानी से असली मान ली जाती थी। - भारतीय वन अधिनियम किस वर्ष पारित किया गया था और इसके तहत क्या प्रावधान हैं?
Ans: भारतीय वन अधिनियम वर्ष 1927 में पारित किया गया था। यह कानून वनों के प्रबंधन, पारगमन (Transit) और वन उपज के अवैध परिवहन पर नियंत्रण लगाने के साथ-साथ उल्लंघन करने पर सख्त सजा और जब्ती का प्रावधान करता है।
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