खैरागढ़ नगर पालिका फाइलों से गायब हुई 35 लाख की गाड़ी, एडीएम ने सीएमओ से मांगा जवाब
NEWS IN SHORT
- 35 लाख की लागत से खरीदी गई फायर ब्रिगेड लापता।
- दुर्घटना के बाद मरम्मत हेतु गैरेज में खड़ी है गाड़ी।
- नगर पालिका कार्यालय से खरीद संबंधी फाइलें भी गायब।
- बीमा सेटलमेंट के बावजूद वाहन वापसी की पहल नहीं।
- गैरेज का किराया ही अब सात लाख रुपए पहुँचा।
NEWS IN DETAIL
जनता की सुरक्षा के लिए टैक्स के पैसों से खरीदी गई सुविधाएं जब सरकारी फाइलों और गैरेज के अंधेरों में खो जाएं, तो प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ नगर पालिका में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 35 लाख रुपए की लागत से खरीदी गई फायर ब्रिगेड गाड़ी पिछले कई वर्षों से लापता है। हैरानी की बात यह है कि न तो अधिकारियों के पास गाड़ी का पता है और न ही इससे जुड़ी महत्वपूर्ण फाइलें कार्यालय में मौजूद हैं।
कैसे गायब हुई जनता की सुरक्षा
जानकारी के मुताबिक, यह पूरा प्रकरण अविभाजित राजनांदगांव जिले के समय का है। गौण खनिज मद से नगर पालिका को दो किस्तों में राशि जारी की गई थी। पहली किस्त 13 लाख 13 हजार रुपए से वाहन का चेसिस खरीदा गया और दूसरी किस्त में 21 लाख रुपए खर्च कर उसे पूर्ण रूप से तैयार कराया गया। अक्टूबर 2020 में बड़े उत्साह के साथ इसे नगर पालिका को सौंपा गया था, लेकिन यह खुशी ज्यादा वक्त तक नहीं टिकी।
अमलीडीह के पास एक दुर्घटना के बाद वाहन को मरम्मत के लिए भेजा गया, जिसके बाद से वह कभी वापस नहीं लौटा। आलम यह है कि आज न शहर के पास फायर ब्रिगेड है और न ही नगर पालिका के पास उसका हिसाब।
लापरवाही का गणित
मामले में लीपापोती की कोशिशें भी कम नहीं हुईं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 में उपभोक्ता फोरम में बीमा कंपनी के खिलाफ दावा किया गया था, जिससे आठ लाख रुपए का सेटलमेंट भी हुआ। लेकिन विडंबना देखिए, जिस गैरेज में गाड़ी खड़ी है, वहां का किराया ही अब सात लाख रुपए के करीब पहुंच चुका है। सवाल यह उठता है कि जब बीमा राशि मिल गई थी, तो उसे गैरेज का भुगतान कर गाड़ी छुड़ाने में क्यों नहीं लगाया गया?
जिम्मेदारों की चुप्पी और प्रशासन का रुख
इस पूरे घोटाले पर नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारी बगलें झांक रहे हैं। गायब फाइलें इस बात की ओर इशारा करती हैं कि साक्ष्यों के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई है ताकि जवाबदेही तय न हो सके।
इस मामले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। सीएमओ खैरागढ़ से पूरी रिपोर्ट तलब की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि वाहन अब तक वापस क्यों नहीं आया। दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी।" — सुरेंद्र ठाकुर, एडीएम खैरागढ़
गंभीर सवाल जो जवाब मांगते हैं
35 लाख की सरकारी संपत्ति का रिकॉर्ड फाइलों से कैसे गायब हो गया?
क्या जानबूझकर गाड़ी को गैरेज में सड़ने के लिए छोड़ दिया गया है?
आपातकालीन सेवाओं के प्रति नगर पालिका इतनी लापरवाह कैसे हो सकती है?
अब देखना होगा कि एडीएम की जांच में क्या निकलकर सामने आता है या फिर यह मामला भी पुरानी फाइलों की तरह धूल फांकता रहेगा। जनता आज भी पूछ रही है— हमारी सुरक्षा के लिए आया फायर ब्रिगेड आखिर है कहां?
निष्कर्ष
यह मामला सरकारी धन के दुरुपयोग और प्रशासनिक घोर लापरवाही का जीवंत प्रमाण है। जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी संसाधन का गैरेज में सड़ना और उससे संबंधित दस्तावेजों का गायब होना एक बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। बिना कड़े दंड और जवाबदेही तय किए, ऐसी व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
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