छत्तीसगढ़ में जमीन से लेकर बिल्डिंग तक के नियम बदले, सरकार की नई गाइडलाइन लागू
समझें क्या है पूरा मामला
- 42 साल पुराने भूमि विकास नियमों में बड़ा संशोधन।
- जमीन के उपयोग की नई श्रेणियां और कोड लागू।
- गलत लैंड यूज पर सख्त 'नेगेटिव लिस्ट' लागू।
- ऊंची इमारतों के लिए नए सेटबैक नियम अनिवार्य।
- पूरे प्रदेश में नई गाइडलाइन तत्काल प्रभाव से लागू।
छत्तीसगढ़ में अब जमीन खरीदने, मकान बनाने या कॉम्प्लेक्स खड़ा करने से पहले नए नियम समझना जरूरी होगा। राज्य सरकार ने 42 साल पुराने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में बड़ा बदलाव कर दिया है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग ने नई अधिसूचना जारी कर दी है। अब कौन सी जमीन पर क्या बनेगा, कितनी ऊंची बिल्डिंग बनेगी और कितनी जगह खाली छोड़नी होगी, सब कुछ नियमों में तय कर दिया गया है। यानी अब मनमर्जी का निर्माण करना आसान नहीं होगा।
हर जमीन की होगी अलग पहचान
सरकार ने पहली बार जमीन के उपयोग का विस्तृत वर्गीकरण किया है। आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, कृषि, परिवहन, सार्वजनिक उपयोगिता और मनोरंजन क्षेत्र अलग-अलग श्रेणियों में बांटे गए हैं। हर श्रेणी के लिए अलग कोड और अलग गतिविधियां तय की गई हैं। अब जिस जमीन का जैसा उपयोग तय होगा, उसी के मुताबिक निर्माण की अनुमति मिलेगी। इससे विवाद और अवैध निर्माण पर रोक लगाने की कोशिश की गई है।
गलत जगह गलत निर्माण किया तो सीधी कार्रवाई
नई गाइडलाइन में सबसे अहम बदलाव 'नेगेटिव लिस्ट' है। यानी सरकार ने साफ कर दिया कि किस जमीन पर क्या नहीं बन सकता। अब रिहायशी इलाके में भारी उद्योग, बड़े कमर्शियल हब, बड़े अस्पताल या कचरा प्रबंधन प्लांट नहीं बन सकेंगे।
वहीं व्यावसायिक क्षेत्रों में सामान्य आवासीय कॉलोनियों और भारी औद्योगिक गतिविधियों पर भी रोक रहेगी। कृषि भूमि पर भी बड़े निर्माण और उद्योगों को सीमित कर दिया गया है।
ऊंची बिल्डिंग बनानी है तो ज्यादा जगह छोड़नी होगी
सरकार ने बहुमंजिला इमारतों के लिए सेटबैक नियम भी सख्त कर दिए हैं। अब भवन जितना ऊंचा होगा, चारों तरफ उतनी ज्यादा खुली जगह छोड़नी होगी। सामने, पीछे और दोनों तरफ न्यूनतम दूरी तय की गई है। इसका मकसद फायर सेफ्टी, वेंटिलेशन और आपदा के समय राहत कार्यों को आसान बनाना बताया गया है। छोटे प्लॉट वालों को अब नक्शा बनाते समय ज्यादा सावधानी बरतनी होगी।
उद्योगों के लिए भी रंगों में बंटे नियम
नई नीति (land development rules) में उद्योगों का वर्गीकरण भी बदल दिया गया है। अब उद्योगों को व्हाइट, ग्रीन, ऑरेंज, रेड और ब्लू श्रेणियों में बांटा गया है। इनके लिए पर्यावरण संरक्षण मंडल के नियम लागू होंगे। वहीं शिक्षा, स्वास्थ्य, मैरिज हॉल, मल्टीप्लेक्स, होटल, मॉल, वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट नगर और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी अलग-अलग मानक तय किए गए हैं। इससे भविष्य में अनुमति प्रक्रिया ज्यादा स्पष्ट होगी।
बिल्डर ही नहीं, आम आदमी भी रहेगा सीधे असर में
सरकार का दावा है कि नए नियमों से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता आएगी। अवैध कॉलोनियों और गलत लैंड यूज पर रोक लगेगी। लेकिन इसका असर आम लोगों पर भी पड़ेगा। अब घर बनाने से पहले प्लॉट का लैंड यूज, सेटबैक और निर्माण मानकों की जांच जरूरी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर निर्माण अवैध माना जा सकता है और कार्रवाई भी हो सकती है।
अब हर नक्शे पर चलेगी नई गाइडलाइन
आवास एवं पर्यावरण विभाग की यह अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के साथ ही लागू हो गई है। यानी अब पूरे छत्तीसगढ़ में नए निर्माण इन्हीं नियमों के मुताबिक होंगे। सरकार का कहना है कि इससे शहरों का विकास व्यवस्थित होगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में बिल्डरों, कॉलोनाइजरों और आम लोगों को भी नई व्यवस्था के हिसाब से अपनी योजनाएं बदलनी होंगी।
FAQ
- भूमि विकास नियम क्या होता है?
भूमि विकास नियम वे सरकारी नियम होते हैं जिनके तहत किसी जमीन का उपयोग, निर्माण कार्य, भवन की ऊंचाई, सेटबैक, सड़क से दूरी और अन्य विकास गतिविधियों के मानक तय किए जाते हैं। - छत्तीसगढ़ में नए लैंड यूज नियम कब से लागू हुए हैं?
छत्तीसगढ़ के संशोधित भूमि विकास नियम राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के साथ ही पूरे प्रदेश में लागू हो गए हैं। अब सभी नए निर्माण इन्हीं नियमों के अनुसार होंगे।
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