लाइसेंस वाली मिलावट; सरकारी अनुमति से परोसा जा रहा जहरीला पनीर , FDA की कार्रवाई सिर्फ दिखावा
छत्तीसगढ़ में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बीच नियमों के विरोधाभास ने आम जनता की सेहत को दांव पर लगा दिया है। एक तरफ FDA की टीम छापेमारी कर हजारों किलो 'एनालॉग पनीर' जब्त कर रही है। वहीं दूसरी तरफ वही फैक्ट्रियां सरकारी लाइसेंस की ढाल लेकर दोबारा खड़ी हो जा रही हैं। यह सवाल अब बड़ा होता जा रहा है कि जिसे विभाग 'जहर' बता रहा है, उसे बनाने की अनुमति आखिर सरकारी तंत्र ही क्यों दे रहा है?
जब लाइसेंस ही बन जाए कवच
सबसे हैरान करने वाला पहलू नियामक खामी (Regulatory Loophole) है। नियमानुसार, पनीर दूध से बनना चाहिए, लेकिन मिल्क पाउडर और पॉम ऑयल के मिश्रण से बने 'एनालॉग पनीर' को FSSAI ने एक 'खाद्य उत्पाद' के रूप में लाइसेंस दे रखा है।
FDA इसे सेहत के लिए खतरनाक मानकर जब्त करता है, लेकिन निर्माता कोर्ट या प्रशासन के सामने FSSAI का वैध लाइसेंस पेश कर देते हैं। इस तरह में सवाल उठता है की अगर यह हृदय रोगों और कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने का मुख्य कारण है, तो इसे 'पनीर' के विकल्प के रूप में बाजार में उतारने की कानूनी अनुमति क्यों दी गई है?
कई सालों चल रहा मिलावट का खेल
खबर की जमीनी हकीकत प्रशासनिक शिथिलता (Administrative Inertia) की पोल खोलती है।
सुस्त सिस्टम
छापेमारी के बाद लिए गए सैंपल की लैब रिपोर्ट आने में महीनों लग जाते हैं। रिपोर्ट आने से पहले ही फैक्ट्री संचालक कानूनी कमियों का फायदा उठाकर ताले खोल लेते हैं। बार-बार एक ही जगह छापेमारी होना यह दर्शाता है कि विभाग की कार्रवाई केवल 'जब्ती के आंकड़े' बढ़ाने तक सीमित है। सख्त दंडात्मक कार्रवाई और लाइसेंस निरस्तीकरण के अभाव में मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हैं।
क्या है समाधान?
खाद्य नियंत्रक अब FSSAI को पत्र लिखने की तैयारी में हैं, लेकिन सवाल यह है कि अब तक इस पर चुप्पी क्यों साधी गई थी? जब तक 'एनालॉग' को पनीर के नाम पर बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगता और फैक्ट्रियों को स्थायी रूप से बंद करने का प्रावधान नहीं होता, तब तक यह चूहे-बिल्ली का खेल जनता की जान के साथ चलता रहेगा।
निष्कर्ष
यह केवल पनीर फैक्टरीमिलावटखोरी का मामला नहीं, बल्कि एक बड़ी सिस्टमैटिक विफलता है। जहां एक सरकारी विभाग लाइसेंस बांट रहा है और दूसरा विभाग उसी उत्पाद को स्वास्थ्य के लिए घातक बताकर पकड़ रहा है। इस खींचतान में नुकसान केवल आम उपभोक्ता का हो रहा है।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में डेयरी प्रोडक्ट में मिलावटी जहर, दो हजार से ज्यादा सैंपल फेल, ग्वालियर सबसे आगे
MP में अब दूध बेचने वालों के लिए भी लाइसेंस जरूरी : मिलावट रोकने के लिए बड़ा कदम
एवरेस्ट मसालों में मिलावट का खुलासा, लैब टेस्ट में चार सैंपल फेल
तिरुपति लड्डू विवाद में बड़ा खुलासा: 5 साल में बंट गए मिलावटी घी से बनाए गए 20 करोड़ लड्डू