शराब घोटाला : 1 हजार 800 की शराब दो हजार में बेची, आबकारी सब इंस्पेक्टर सस्पेंड

Aishwarya Dwivedi | Jul 29, 2026, 09:08 IST
रायपुर में शराब की ओवररेटिंग के कारण लाइसेंस सस्पेंड
छत्तीसगढ़ के अभनपुर में शराब दुकान पर डमी ग्राहक भेजकर ओवररेटिंग पकड़ी गई। मामले में आबकारी उप निरीक्षक सस्पेंड हुए, दो अफसरों को नोटिस जारी हुआ और ईओडब्ल्यू ने छापेमारी की।

समझें क्या है पूरा मामला

सरकारी शराब दुकानों में एमआरपी से अधिक कीमत वसूलने का मामला सामने आया है। अभनपुर की देशी शराब दुकान पर डमी ग्राहक भेजकर गड़बड़ी पकड़ी गई। 1 हजार 800 रुपए की बोतल दो हजार रुपए में बेची जा रही थी। मामले में आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को निलंबित कर दिया गया। सहायक आबकारी आयुक्त और मंडल प्रभारी को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।



शराब दुकानों में अवैध वसूली

छत्तीसगढ़ की सरकारी शराब दुकानों में ओवररेटिंग का खेल लगातार जारी है। सरकारी शराब दुकानों में तय दरों से ज्यादा कीमत वसूलने की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। लोगों से अवैध वसूली का यह पैसा निचले स्तर से लेकर ऊपर तक पहुंचने के आरोप लग रहे हैं। पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में भी ऐसा ही बड़ा घोटाला उजागर हो चुका है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आबकारी विभाग ने अब सख्ती दिखाना शुरू कर दिया है।



डमी ग्राहक भेजकर पकड़ा खेल

विभाग ने इस बार गड़बड़ी पकड़ने के लिए खास रणनीति बनाई। आबकारी विभाग की टीम ने अभनपुर की देशी शराब दुकान में छापा मारने से पहले एक डमी ग्राहक भेजा। डमी ग्राहक ने दुकान से शराब खरीदी, जहां 1 हजार 800 रुपए की शराब की बोतल दो हजार रुपए में बेची गई। इस तरह 200 रुपए की सीधी ओवररेटिंग रंगे हाथ पकड़ ली गई। इस कार्रवाई से पूरे विभाग में हड़कंप मच गया है।



उप निरीक्षक पर गिरी गाज

गड़बड़ी की पुष्टि होते ही विभाग ने तुरंत एक्शन लिया। अभनपुर की दुकान में पदस्थ आबकारी उप निरीक्षक नीलम स्वर्णकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन की यह कार्रवाई पर्यवेक्षण में लापरवाही बरतने और दुकान पर ओवररेटिंग नहीं रोक पाने के कारण की गई है।



दो बड़े अधिकारियों को नोटिस

शराब घोटाला में केवल निचले कर्मचारियों पर ही कार्रवाई नहीं हुई है, बल्कि दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा गया है। रायपुर के सहायक आबकारी आयुक्त डॉ. प्रवीण वर्मा और अभनपुर मंडल प्रभारी व एडीईओ डीडी पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने दोनों अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है।



तीन ठिकानों पर ईओडब्ल्यू के छापे

दूसरी तरफ, शराब घोटाले की जांच कर रही आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो यानी ईओडब्ल्यू की टीम भी पूरी तरह से एक्शन में है। ईओडब्ल्यू की टीमों ने जेल में बंद शराब कारोबारी अनवर ढेबर के तीन अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई रायपुर, अभनपुर और धमतरी स्थित मकानों और यार्डों में की गई। छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण और संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए हैं।



बेनामी संपत्ति में निवेश का दावा

जांच एजेंसियों का दावा है कि अनवर ढेबर ने घोटाले से कमाई गई अवैध रकम को दूसरे लोगों के नाम पर निवेश किया है। आबकारी विभाग से जुड़े मामलों में कुल मिलाकर करीब 3 हजार 200 करोड़ रुपए के घोटाले की जांच चल रही है। इसमें 182 करोड़ रुपये का ओवरटाइम घोटाला और 300 करोड़ रुपए से अधिक का ओवररेटिंग घोटाला शामिल है। इस मामले में अब तक लगभग 1 हजार 200 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी और अनिल टुटेजा से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश की जानकारी अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है।



FAQ

  1. छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग किस मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है?
    उत्तर: छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग राज्य शासन के वित्त एवं वाणिज्यिक कर (आबकारी) मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
  2. वित्तीय अपराधों और सरकारी घोटालों की जांच के लिए छत्तीसगढ़ में कौन सी एजेंसी काम करती है?
    उत्तर: राज्य स्तर पर आर्थिक अपराधों और भ्रष्टाचार की जांच EOW (Economic Offences Wing / आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो) द्वारा की जाती है।

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