अव्यवस्था की भेंट चढ़ी नई शराब नीति ; सरकार को 500 करोड़ का घाटा
NEWS IN SHORT
15 दिनों में करीब 500 करोड़ का बड़ा घाटा।
मांग के मुकाबले मात्र एक-तिहाई शराब की आपूर्ति।
बिना तैयारी प्लास्टिक बॉटलिंग आदेश से उत्पादन ठप।
वैश्विक कारणों से कच्चे माल के दाम 70% बढ़े।
महंगी शराब और बीयर की बिक्री 50% तक बढ़ी।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग द्वारा बिना ठोस तैयारी के प्लास्टिक की बोतलों (PET) में शराब बेचने के फैसले ने राज्य की पूरी सप्लाई चेन को ध्वस्त कर दिया है। पिछले 15 दिनों में विभाग को देसी और किफायती श्रेणी (Cheap Range) की अंग्रेजी शराब से करीब 500 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। आलम यह है कि शादियों के सीजन में मांग चरम पर है, लेकिन दुकानों में स्टॉक खत्म है।
फैसले में दूरदर्शिता का अभाव, कोर्ट पहुँचा मामला
कैबिनेट ने चार महीने पहले ही प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग को मंजूरी दे दी थी, लेकिन विभाग ने इसे लागू करने के लिए सीधे 1 अप्रैल का आदेश जारी कर दिया। अचानक आए इस आदेश से डिस्टिलर्स और बॉटलर्स में हड़कंप मच गया। कांच की बोतलों के समर्थकों ने जहां अदालत का दरवाजा खटखटाया, वहीं प्लास्टिक बोतलों की बड़े पैमाने पर उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी।
विवाद बढ़ता देख विभाग को आनन-फानन में अपना आदेश संशोधित कर 31 मई तक पुनः कांच की बोतलों के उपयोग की अनुमति देनी पड़ी। इस खींचतान में प्रदेश की डिस्टिलरियों में करीब 10 दिनों तक उत्पादन पूरी तरह ठप रहा। 10 अप्रैल से उत्पादन दोबारा शुरू तो हुआ, लेकिन वह वर्तमान मांग की तुलना में केवल एक-तिहाई ही है।
आपूर्ति संकट: बिलासपुर समेत पूरे प्रदेश में हाहाकार
प्रदेश की 800 से अधिक दुकानों में रोजाना लगभग 45 करोड़ की देसी और 25 करोड़ की किफायती अंग्रेजी शराब की खपत होती है। आपूर्ति बाधित होने से सरकार को प्रतिदिन 40 से 50 करोड़ रुपए का सीधा चूना लग रहा है।
बिलासपुर का हाल: जिले की 42 दुकानों में रोजाना साढ़े 4 हजार पेटी की मांग है, लेकिन केवल 1500 पेटी ही मिल पा रही है।
दुकानों में अफरा-तफरी: देसी शराब का स्टॉक दोपहर तक खत्म हो रहा है, जिससे अंग्रेजी शराब और बीयर के काउंटरों पर 50% तक भीड़ बढ़ गई है। स्टॉक खत्म होने के कारण शाम ढलते ही कई दुकानों में ताले लटक रहे हैं।
वैश्विक युद्ध और बढ़ती लागत की दोहरी मार
नई शराब नीति के कार्यान्वयन में एक बड़ी बाधा कच्चा माल (Raw Material) भी बन गया है। ईरान-अमेरिका के बीच तनावपूर्ण माहौल के कारण प्लास्टिक निर्माण में प्रयुक्त होने वाले नैफ्था की कीमतों में 70% और पॉलीमर की कीमतों में 60% तक का उछाल आया है।
इसके अलावा, स्थानीय उद्योगों के पास फिलहाल इतनी बड़ी मात्रा में बोतलें सप्लाई करने का सेटअप तैयार नहीं है। अब बॉटलर्स स्वयं 7 से 8 करोड़ रुपए का निवेश कर प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें लंबा समय लगने की उम्मीद है।
मंत्री का पक्ष
इस भारी नुकसान और अव्यवस्था के बीच आबकारी मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्थिति को संभालने का भरोसा दिया है। उन्होंने कहा नई व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर में थोड़ा नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन इसकी भरपाई जल्द कर ली जाएगी। प्लास्टिक बॉटलिंग की इस नई व्यवस्था से शराब में होने वाली मिलावटखोरी पर पूरी तरह से लगाम लगेगी।
फिलहाल, विभाग के दावों और धरातल की हकीकत में बड़ा अंतर दिख रहा है। जब तक सप्लाई चेन पूरी तरह बहाल नहीं होती, तब तक शासन को राजस्व और जनता को किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
निष्कर्ष
आबकारी विभाग द्वारा बिना बुनियादी तैयारी के प्लास्टिक बोतल शराब नीति लागू करना जल्दबाजी भरा कदम साबित हुआ। इससे न केवल 500 करोड़ का राजस्व घाटा हुआ, बल्कि सप्लाई चेन भी ध्वस्त हो गई। जब तक कच्चे माल की उपलब्धता और बॉटलिंग प्लांट का सेटअप तैयार नहीं होता, तब तक यह संकट बना रहेगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
सोम डिस्टिलरीज की एक्सपायरी शराब खपाने की तैयारी, आबकारी विभाग पर भी लगे आरोप!
115 करोड़ के बाद अब छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग में दो नए वित्तीय घोटालों का हुआ खुलासा
सोम डिस्टिलरीज को हाईकोर्ट से एक और झटका, अब लाइसेंस पर फैसला करेगा आबकारी विभाग
एमपी आबकारी विभाग के अफसरों ने उड़ाई नियमों की धज्जियां, सरेआम जलाए सालों पुराने रिकॉर्ड