रायगढ़ लोक सेवा केंद्र की आड़ में मैट्रिमोनियल ठगी का काला खेल, कई युवतियां गिरफ्तार
NEWS IN SHORT
- लोक सेवा केंद्र में चल रहे फर्जी मैट्रिमोनियल रैकेट का पर्दाफाश।
- रायगढ़ में शादी के नाम पर ठगी करने वाला कॉल सेंटर पकड़ा गया।
- 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर युवाओं को लूट रहा था फर्जी सेवा केंद्र।
- रायगढ़ के 'निधि केंद्र' से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद।
- पार्टनर दिलाने के नाम पर ठगी करने वाला गिरोह बेनकाब।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जो सरकारी सेवा केंद्र की आड़ में शादी का झांसा देकर लोगों से लाखों की ठगी कर रहा था। दरोगा पारा क्षेत्र में संचालित निधि परिवहन सुविधा केंद्र पर सोमवार को पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने अचानक छापा मारा, जहां मैट्रिमोनियल (शादी) के नाम पर एक हाई-टेक कॉल सेंटर चलाया जा रहा था।
गुप्त सूचना पर पुलिस की सर्जिकल स्ट्राइक
पुलिस को पिछले कुछ समय से इनपुट मिल रहे थे कि दरोगा पारा स्थित इस केंद्र में लोक सेवा के निर्धारित कार्यों के बजाय संदिग्ध गतिविधियां चल रही हैं। एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की टीम ने जब दोपहर में दबिश दी, तो नजारा चौंकाने वाला था। केंद्र के भीतर 10 से ज्यादा लड़कियां हेडफोन लगाकर कंप्यूटर के सामने बैठी थीं और अलग-अलग लोगों को फोन पर शादी के सुनहरे सपने दिखाकर जाल में फंसा रही थीं।
मैट्रिमोनियल ठगी का मॉडस ऑपरेंडी
प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे ऑनलाइन ठगी के एक सोचे-समझे पैटर्न की ओर इशारा करते हैं
प्रोसेसिंग फीस का जाल: गिरोह के सदस्य अविवाहित युवकों या उनके परिजनों को कॉल करते थे और उन्हें आकर्षक प्रोफाइल दिखाते थे।
फर्जी रजिस्ट्रेशन: बातचीत आगे बढ़ाने और पार्टनर से मिलवाने के नाम पर हजारों रुपये की 'प्रोसेसिंग फीस' और 'रजिस्ट्रेशन चार्ज' वसूला जाता था।
पैसे मिलते ही गायब: एक बार पैसे अकाउंट में आने के बाद, पीड़ितों को न तो कोई जानकारी दी जाती थी और न ही किसी संभावित साथी से बात कराई जाती थी।
मौके से मिले फर्जी दस्तावेज और सबूत
छापेमारी के दौरान पुलिस ने अपराध से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जब्त किए हैं, जिनमें शामिल हैं:
1. इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस: कॉल सेंटर में इस्तेमाल हो रहे लैपटॉप, सीपीयू और कई मोबाइल फोन।
2. रजिस्टर और डेटा: सैकड़ों लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और उनसे ली गई रकम का लेखा-जोखा।
3. फर्जी कागजात: लोक सेवा केंद्र की आड़ में इस्तेमाल किए जा रहे कई संदिग्ध और कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज।
एसएसपी का बयान
मामले की पुष्टि करते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया
"हमें सूचना मिली थी कि निधि परिवहन केंद्र में लोक सेवा के नाम पर एक बड़ा मैट्रिमोनियल रैकेट चल रहा है। शुरुआती जांच में भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और ठगी के प्रमाण मिले हैं। यह एक संगठित गिरोह की तरह काम कर रहा था। फिलहाल दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जा रही है और जल्द ही मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।"
जांच के घेरे में कई नाम
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस ठगी के तार छत्तीसगढ़ के बाहर किन राज्यों से जुड़े हैं और अब तक कितने लोग इस गिरोह का शिकार बन चुके हैं। जब्त किए गए बैंक खातों और ट्रांजेक्शन डिटेल्स के जरिए पुलिस मुख्य सरगना तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
निष्कर्ष
रायगढ़ पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए कड़ा संदेश है। लोक सेवा केंद्र जैसे भरोसेमंद नाम का सहारा लेकर मैट्रिमोनियल साइटठगी करना समाज के लिए गंभीर खतरा है। इस खुलासे से स्पष्ट है कि डिजिटल दौर में व्यक्तिगत जानकारी साझा करने और शुल्क चुकाने से पहले पूरी सावधानी बरतना अनिवार्य है।
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