वक्फ बोर्ड अध्यक्ष ने सीएम को भेजा प्रस्ताव, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने की मांग
छत्तीसगढ़ में मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत मिले हैं। छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया है। इसके स्थान पर छत्तीसगढ़ अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित करने की सिफारिश की गई है। पत्र में कहा गया है कि नई व्यवस्था से अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा का भी लाभ मिल सकेगा।
उत्तराखंड मॉडल का दिया गया हवाला
अपने प्रस्ताव में डॉ. सलीम राज ने उत्तराखंड सरकार के फैसले का उल्लेख किया है। पत्र के अनुसार, उत्तराखंड ने उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम-2025 लागू कर मदरसा शिक्षा परिषद को समाप्त करते हुए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। इसी मॉडल को छत्तीसगढ़ में लागू करने का सुझाव देते हुए कहा गया है कि इससे शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी और समयानुकूल बनाई जा सकती है।
मौजूदा व्यवस्था पर उठाए सवाल
पत्र में वर्तमान मदरसा शिक्षा प्रणाली पर कई सवाल भी उठाए गए हैं। कहा गया है कि राज्य के अधिकांश मदरसों में दीनी तालीम तो दी जा रही है, लेकिन आधुनिक शिक्षा का समुचित समावेश नहीं है। इसके कारण मदरसों से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के सामने रोजगार और करियर के सीमित अवसर रह जाते हैं। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि राज्य सरकार हर वर्ष मदरसों को अनुदान देती है, लेकिन उसका अपेक्षित लाभ अल्पसंख्यक समाज तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है।
418 मदरसों की स्थिति पर चिंता
प्रस्ताव में दावा किया गया है कि छत्तीसगढ़ में लगभग 418 मदरसे संचालित हैं। इनमें कुछ मदरसे पूरी तरह छात्रविहीन हैं, जबकि कई स्थानों पर केवल प्राथमिक स्तर की धार्मिक शिक्षा ही दी जा रही है। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर नई शिक्षा नीति के अनुरूप सुधार किए जाने की जरूरत बताई गई है।
धार्मिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर और विज्ञान पर जोर
अध्यक्ष ने सुझाव दिया गया है कि मदरसों को विद्यालयी शिक्षा परिषद से जोड़ा जाए और पाठ्यक्रम तय करने के लिए विशेषज्ञ समिति बनाई जाए। यह समिति तय करे कि धार्मिक शिक्षा के साथ कंप्यूटर, विज्ञान और अन्य आधुनिक विषयों का कितना समावेश किया जाए। प्रस्ताव में केंद्र और राज्य सरकार के उस विजन का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें "एक हाथ में कुरआन और दूसरे हाथ में कंप्यूटर" की अवधारणा के जरिए विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने की बात कही गई है। पत्र में कहा गया है कि इससे मुस्लिम समुदाय के बच्चे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, वैज्ञानिक और अन्य पेशेवर क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना सकेंगे।
FAQ
- मदरसा बोर्ड क्या होता है?
मदरसा बोर्ड एक सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्था होती है जो मदरसों (इस्लामिक शैक्षणिक संस्थानों) में पढ़ाई, पाठ्यक्रम, परीक्षा और मान्यता (recognition) की व्यवस्था को नियंत्रित और संचालित करती है। - मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का प्रस्ताव किसने दिया है?
छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर यह प्रस्ताव दिया है।
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