महादेव ऐप: 72 आरोपियों पर चार्जशीट, करोड़ों के खेल में नए खुलासों की तैयारी

VINAY VERMA | Jul 09, 2026, 19:40 IST
महादेव ऐप केस 2026
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नई चार्जशीट अदालत में दाखिल की हैं। इनमें असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा को आरोपी बनाया गया है।

महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी घोटाले में CBI ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए छह नए आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिए हैं। इस कार्रवाई के साथ ही देश के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क पर शिकंजा और कस गया है। जांच एजेंसी ने छह प्रमुख आरोपियों को नामजद करते हुए भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश जैसी गंभीर धाराओं के तहत अदालत में मजबूत दस्तावेज पेश किए हैं।



मुख्य सरगना सहित 6 बड़े चेहरे

सीबीआई ने जिन छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है उनमें असीम दास, रोहित गुलाटी, विकास छापरिया, अनिल धम्मानी, विशाल आहूजा और धीरज आहूजा शामिल हैं। इन सभी पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के साथ भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच एजेंसी का दावा है कि इन लोगों ने पूरे सट्टा नेटवर्क को संचालित करने और आर्थिक अपराध को अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई।



सौरभ-रवि के खिलाफ और मजबूत हुए सबूत

सीबीआई ने केवल नए आरोपियों को ही नहीं घेरा, बल्कि महादेव ऐप के मुख्य सरगना सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ भी अतिरिक्त सबूत अदालत में पेश किए हैं। दोनों पहले से इस मामले में आरोपी हैं, लेकिन अब जांच एजेंसी ने नए दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जोड़कर केस को और मजबूत बना दिया है। इससे दोनों की कानूनी मुश्किलें और बढ़ना तय माना जा रहा है।



66 और लोगों पर भी कसा शिकंजा

जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। सीबीआई ने एक समानांतर जांच में 66 अन्य लोगों के खिलाफ पांच और आरोप पत्र दाखिल किए हैं। इनमें कथित 'सट्टेबाजी सिंडिकेट पैनल' के कई सदस्य शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि यही लोग अवैध कमाई को छिपाने, फर्जी लेन-देन कराने और धन शोधन की पूरी व्यवस्था संभालते थे।



ऐसे चलता था पूरा सट्टा साम्राज्य

जांच में सामने आया है कि महादेव ऑनलाइन बुक नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर में नए यूजर्स जोड़े जाते थे। अलग-अलग राज्यों में सट्टेबाजी पैनल बनाए गए थे और करोड़ों रुपये का अवैध कारोबार संचालित किया जाता था। यही वजह है कि इसे भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में गिना जा रहा है।



फर्जी खातों से विदेश पहुंचता था पैसा

सीबीआई के मुताबिक सट्टेबाजी से मिलने वाली रकम को पहले म्यूल अकाउंट यानी फर्जी बैंक खातों के जरिए घुमाया जाता था। इसके बाद इस पैसे को वैध दिखाकर विदेश भेज दिया जाता था। जांच एजेंसी का दावा है कि यह पूरा नेटवर्क मनी लॉन्ड्रिंग की सुनियोजित व्यवस्था पर आधारित था, जिसमें कई स्तरों पर आर्थिक लेन-देन किए जाते थे।



रिश्वत देकर मिलता था संरक्षण!

जांच में यह भी बड़ा दावा सामने आया है कि अवैध कमाई का एक हिस्सा कथित तौर पर लोक सेवकों और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण राशि तथा रिश्वत के रूप में दिया जाता था। एजेंसी इसी एंगल पर भी गहराई से जांच कर रही है कि आखिर इस सिंडिकेट को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण कैसे मिला और किन-किन लोगों तक इसकी पहुंच थी।



विदेश से चल रहा था पूरा ऑपरेशन

सीबीआई के अनुसार महादेव ऐप के प्रमोटर और उनके कई करीबी सहयोगी कुछ वर्ष पहले ही भारत छोड़कर पश्चिम एशियाई देशों में चले गए थे। वहीं से बैठकर पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। भारत में बैठी टीम केवल संचालन और लेन-देन का काम संभाल रही थी, जबकि असली कमांड विदेश से दी जा रही थी।



रेड कॉर्नर नोटिस से बढ़ा दबाव

विदेश भाग चुके चार प्रमुख आरोपियों के खिलाफ इंटरपोल पहले ही रेड कॉर्नर नोटिस जारी कर चुका है। साथ ही उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। ऐसा होने पर भारत में मौजूद उनकी संपत्तियों को जब्त करने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।



अभी और खुलेंगे राज

CBI ने साफ कर दिया है कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है। एजेंसी पूरे देश में फैले इस नेटवर्क, इसके आर्थिक तंत्र, राजनीतिक-प्रशासनिक संरक्षण और मनी ट्रेल की परतें खोलने में जुटी है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, वैसे-वैसे नए नाम सामने आने और पूरक चार्जशीट दाखिल होने की संभावना भी बढ़ती जाएगी। महादेव ऐप घोटाले की यह लड़ाई अब सिर्फ सट्टेबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि करोड़ों की काली कमाई और उसके पूरे नेटवर्क को बेनकाब करने की दिशा में पहुंच चुकी है।



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