महादेव बेटिंग सिंडिकेट पर DGGI का बड़ा वार, 40,603 करोड़ की GST मांग
Raipur। महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट पर अब टैक्स का सबसे बड़ा शिकंजा कसता नजर आ रहा है। DGGI रायपुर जोनल यूनिट ने जांच के बाद करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए के टैक्सेबल कारोबार पर 40,603.02 करोड़ रुपए से ज्यादा की GST मांग का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। 26 अगस्त को जारी किए गए दो बड़े नोटिसों में कुल 97 लोगों को पक्षकार बनाया गया है। इनमें प्रमोटर, पैनल ऑपरेटर और प्रमुख सहयोगी शामिल हैं।
दो नोटिस, 40 हजार करोड़ से ज्यादा मांग
जांच के बाद संयुक्त निदेशक शिवी सांगवान ने 26 अगस्त 2026 को दो शो कॉस नोटिस जारी किए। DGGI की जांच में सामने आए कारोबार का कुल टैक्सेबल वैल्यू ₹14,50,10,77,48,260 बताया गया है। यानी करीब 1.45 लाख करोड़ रुपए का कारोबार टैक्स के दायरे में आया है। विभाग ने इस पर 40,603 करोड़ रुपए से अधिक की GST देनदारी प्रस्तावित की है।
तीन साल में हुआ अरबों का खेल
नोटिस के मुताबिक 1 अप्रैल 2020 से 30 सितंबर 2023 तक की अवधि के लिए करीब ₹35,517.22 करोड़ की GST मांग प्रस्तावित है। इसके बाद 1 अक्टूबर 2023 से 31 मार्च 2024 तक की अवधि में ₹5,085.80 करोड़ की मांग सामने रखी गई है। दोनों अवधियों को मिलाकर रकम 40 हजार करोड़ रुपए के पार पहुंचती है।
2 हजार पैनल, रोज 99 करोड़
जांच में महादेव बुक के संचालन का बड़ा नेटवर्क सामने आने का दावा किया गया है। इसके लिए करीब 2,000 पैनल संचालित किए जाते थे। प्रत्येक पैनल पर रोजाना औसतन 5 से 10 लाख रुपए तक का लेनदेन होने की बात जांच में सामने आई। पूरे नेटवर्क में प्रतिदिन करीब 99 करोड़ रुपए तक जमा होने का अनुमान लगाया गया है।
70-80 फीसदी पैसा हेड ऑफिस
जांच एजेंसी के अनुसार इस नेटवर्क से होने वाले मुनाफे का बड़ा हिस्सा ऊपर तक पहुंचता था। करीब 70 से 80 प्रतिशत मुनाफा हेड ऑफिस तक भेजे जाने की बात सामने आई है। इससे नेटवर्क के संचालन और रकम के प्रवाह को लेकर जांच का दायरा और बड़ा हो गया।
चंद्राकर मुख्य प्रमोटर, उप्पल सहयोगी
जांच में सौरभ चंद्राकर को महादेव बुक का मुख्य प्रमोटर और मालिक तथा रवि उप्पल को सह-प्रमोटर और प्रमुख सहयोगी के रूप में चिन्हित किया गया है। विभाग ने पूरे नेटवर्क में प्रमोटरों के साथ पैनल ऑपरेटरों और अन्य प्रमुख सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रखी है।
97 लोगों को नोटिस
DGGI के दोनों नोटिसों में कुल 97 लोगों से जवाब मांगा है। पहले नोटिस में 66 और दूसरे में 31 लोगों को पक्षकार बनाया गया है। यानी विभाग ने कार्रवाई को सिर्फ कथित मुख्य प्रमोटरों तक सीमित नहीं रखा है। नेटवर्क से जुड़े ऑपरेटर और सहयोगी भी टैक्स कार्रवाई के घेरे में आ गए हैं।
Gameskraft फैसले का सहारा
विभाग ने कानूनी कार्रवाई के आधार में सुप्रीम कोर्ट के Gameskraft फैसले का भी उल्लेख किया है। इस फैसले को पुराने ऑनलाइन गेमिंग और बेटिंग लेनदेन के वैल्यूएशन तथा टैक्स निर्धारण से जुड़ी विभागीय कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। इसी कानूनी आधार पर पुराने लेनदेन को भी GST जांच के दायरे में लिया गया है।
अब जवाब देना होगा
शो कॉस नोटिस जारी होने के बाद संबंधित पक्षों को विभाग के सामने अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। इसके बाद टैक्स देनदारी और आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। फिलहाल DGGI की कार्रवाई ने महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क के सामने 40,603 करोड़ रुपए से ज्यादा की GST देनदारी का बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
FAQ
- महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट पर DGGI ने कितनी GST मांग की है?
DGGI ने करीब 40,603 करोड़ रुपए से ज्यादा की GST मांग प्रस्तावित की है। - महादेव बेटिंग मामले में कितने लोगों को नोटिस जारी हुआ है?
DGGI ने दो नोटिसों में कुल 97 लोगों को पक्षकार बनाया है। - महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क का मुख्य प्रमोटर कौन है?
जांच में सौरभ चंद्राकर को मुख्य प्रमोटर और रवि उप्पल को सह-प्रमोटर बताया गया है।
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