अमित शाह के सामने भी नहीं सुलझा महानदी विवाद, साय-माझी की बैठक में बात आगे बढ़ी, फैसला अब भी बाकी
समझें क्या है पूरा मामला
- अमित शाह के सामने भी नहीं सुलझा महानदी विवाद
- साय-माझी की बैठक में बातचीत आगे बढ़ी
- जल बंटवारे पर अंतिम फैसला अब भी बाकी
- महानदी विवाद में CWC की भूमिका हुई अहम
- आठ साल से ट्रिब्यूनल में लंबित है मामला
CM साय बोले, संवाद जारी
बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दोनों राज्य आपसी संवाद, सहयोग और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ समाधान की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। साय ने महानदी को दोनों राज्यों की जीवनधारा बताते हुए कहा कि इसका समाधान टकराव से नहीं, बल्कि सहयोग और सहमति से होना चाहिए। इससे साफ है कि फिलहाल बातचीत का रास्ता ही आगे की रणनीति है।
20 सितंबर के बाद दिल्ली तक पहुंची बात
यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब करीब दस दिन पहले 20 सितंबर को साय ओडिशा के दौरे पर गए थे। भुवनेश्वर में उनकी मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात हुई थी। दोनों मुख्यमंत्रियों ने महानदी विवाद समेत दोनों राज्यों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की थी। उस बैठक के बाद साय ने विवाद को जल्द सुलझने की उम्मीद जताई थी।
जुलाई में भी बनी थी सहमति
महानदी विवाद पर केंद्र पहले भी दोनों राज्यों को बातचीत की टेबल पर ला चुका है। 30 जुलाई को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में दोनों राज्यों ने समाधान की दिशा में तकनीकी सहयोग और बातचीत आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। दोनों राज्यों ने केंद्रीय जल आयोग के ऐसे फैसले को स्वीकार करने की लिखित सहमति दी थी, जो दोनों के व्यापक हित में हो।
आठ साल से ट्रिब्यूनल में मामला
महानदी जल बंटवारे का विवाद 2016 में तेज हुआ और बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद मार्च 2018 में महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन हुआ। ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में ऊपरी हिस्से में बने जल प्रोजेक्टों से गैर-मानसून सीजन में नीचे की ओर पानी का प्रवाह प्रभावित होता है। छत्तीसगढ़ का पक्ष है कि उसे सिंचाई, उद्योग और घरेलू जरूरतों के लिए अपने हिस्से के पानी का इस्तेमाल करने का अधिकार है।
अब CWC की भूमिका अहम
बैठक के बाद नजरें केंद्रीय जल आयोग की तकनीकी प्रक्रिया पर टिक गई हैं। विवाद का स्थायी समाधान तभी संभव होगा, जब पानी की उपलब्धता, उपयोग, मानसूनी और गैर-मानसूनी प्रवाह समेत तकनीकी आंकड़ों पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बने। जुलाई में दोनों राज्यों की ओर से CWC के निर्णय को स्वीकार करने की सहमति इस दिशा में महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
सवाल अब भी वही
अमित शाह की अध्यक्षता में दोनों मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी वाली बैठक के बाद भी सबसे बड़ा सवाल यही है कि महानदी का पानी आखिर किस फार्मूले से बांटा जाएगा? बातचीत जारी है, लेकिन अंतिम सहमति कब बनेगी और क्या दोनों राज्य तकनीकी आधार पर तय फार्मूले को पूरी तरह स्वीकार करेंगे, इसका जवाब अभी बाकी है।
महानदी सिर्फ पानी नहीं
महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों के लिए खेती, पेयजल, उद्योग और बिजली उत्पादन से जुड़ी है। इसलिए विवाद का असर सिर्फ दो सरकारों के बीच नहीं, बल्कि दोनों राज्यों के किसानों और जल-आधारित अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है। अब दिल्ली की बैठक के बाद उम्मीद बातचीत से समाधान की है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है।
FAQ
- महानदी विवाद का मुख्य मुद्दा क्या है?
महानदी विवाद का मुख्य मुद्दा ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच पानी के बंटवारे का है, जिसमें ओडिशा का आरोप है कि छत्तीसगढ़ में बने जल प्रोजेक्टों से पानी का प्रवाह प्रभावित होता है, जबकि छत्तीसगढ़ अपने हिस्से के पानी का उपयोग करने का अधिकार जताता है। - CWC की भूमिका इस विवाद में क्या है?
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की भूमिका विवाद के तकनीकी समाधान में है, जिसका ध्यान पानी की उपलब्धता, उपयोग, और प्रवाह के आंकड़ों पर सहमति बनाने पर होगा। CWC के निर्णय को दोनों राज्यों ने स्वीकार करने की सहमति दी है, जो समस्या का स्थायी समाधान खोजने में मदद कर सकता है। - इस विवाद का समाधान कब तक संभव है?
महानदी विवाद का समाधान अभी भी बातचीत में है, और अंतिम फैसला कब तक होगा, इसका कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं है। दोनों राज्य आपसी संवाद के माध्यम से सहयोग और सहमति के आधार पर समस्या का समाधान खोजने की कोशिश कर रहे हैं।