महासमुंद में पानी वाली शराब : आबकारी टीम ने कर्मचारियों को रंगे हाथों दबोचा
NEWS IN SHORT
- महासमुंद में शराब दुकान में पानी मिलाने का बड़ा खेल बेनकाब
- पिथौरा शराब दुकान के चार कर्मचारी रंगे हाथ पकड़े गए
- आबकारी विभाग ने तुरंत कार्रवाई कर मामला दर्ज किया
- लंबे समय से चल रहा था शराब में मिलावट का गोरखधंधा
- शराब दुकानों की निगरानी और उपभोक्ताओं की सुरक्षा पर सवाल
NEWS IN DETAIL
Mahasamund। महासमुंद में पानी वाली शराब : छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में शराब मिलावट का बड़ा खेल सामने आया है। पिथौरा स्थित एक कंपोजिट शराब दुकान में कर्मचारियों द्वारा शराब में पानी मिलाकर बेचा जा रहा था। आबकारी विभाग की टीम ने औचक निरीक्षण के दौरान चार कर्मचारियों को रंगे हाथों पकड़ा। इस घटना ने इलाके में हड़कंप मचा दिया है और शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शराब में पानी मिलाने का खेल
महासमुंद जिले के पिथौरा स्थित अंग्रेजी शराब दुकान में मैकडॉवेल नंबर-1 शराब की बोतलों में पानी मिलाने का मामला सामने आया। आबकारी विभाग की टीम ने 25 मई को औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान देखा गया कि कर्मचारी खुलेआम बोतलों का सील खोलकर शराब में पानी मिला रहे थे।
फिलहाल चार कर्मचारियों उमेश मन्नाडे, करन सोनटके, नारायण निषाद और हेमंत पटेल—को मौके पर पकड़ लिया गया। जांच में पानी मिली शराब की कई बोतलें बरामद हुई हैं।
लंबे समय से चल रहा था गोरखधंधा
प्रारंभिक जांच में पता चला कि यह खेल लंबे समय से चल रहा था। उमेश मन्नाडे और करन सोनटके लगभग दो साल से, जबकि नारायण निषाद और हेमंत पटेल 7–8 महीने से इस दुकान में काम कर रहे थे। लंबे समय से एक ही जगह पर काम करने के कारण कर्मचारियों के हौसले बढ़ गए थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुकान के खिलाफ पहले भी शिकायतें आ चुकी थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
ग्राहकों की सेहत से खिलवाड़
शराब में पानी मिलाने से उपभोक्ताओं की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। इस मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर लंबे समय तक इस खेल की जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं थी। इस तरह की मिलावट सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है।
चारों आरोपियों पर मामला दर्ज
आबकारी विभाग ने चारों कर्मचारियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 38(क) के तहत मामला दर्ज किया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शराब में मिलावट करना कानूनन अपराध है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस मिलावटखोरी में अन्य लोग भी शामिल थे।
विभागीय निगरानी पर सवाल
इस घटना के उजागर होने के बाद शराब दुकानों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय-समय पर सख्त निरीक्षण नहीं किया गया, तो इस तरह की मिलावटखोरी आम उपभोक्ताओं के साथ लगातार धोखा करती रहेगी। अब देखना होगा कि आबकारी विभाग इस मामले में और क्या कार्रवाई करता है।
FAQ
- यह घटना कब हुई?
25 मई को आबकारी विभाग ने पिथौरा स्थित शराब दुकान का निरीक्षण किया। - कितने कर्मचारी पकड़े गए?
चार कर्मचारी-उमेश मन्नाडे, करन सोनटके, नारायण निषाद और हेमंत पटेल-रंगे हाथ पकड़े गए। - किस शराब में मिलावट हो रही थी?
मैकडॉवेल नंबर-1 शराब में पानी मिलाया जा रहा था। - इस घटना से उपभोक्ताओं को क्या खतरा है?
पानी मिली शराब स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकती है और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है। - विभाग ने क्या कार्रवाई की?
चारों आरोपियों के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 38(क) के तहत मामला दर्ज किया गया और जांच शुरू की गई।
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