महासमुंद गैस घोटाला : 92 टन LPG डकार गए खाद्य अधिकारी

Umeshwari Baghel | May 10, 2026, 18:31 IST
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महासमुंद एलपीजी गैस घोटाले में खाद्य अधिकारी अजय यादव मास्टरमाइंड है। पुलिस ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 2 फरार हैं। जांच में सामने आया कि 92 टन गैस को 3 दिनों में ट्रकों से खाली किया गया और उसे अवैध तरीके से बेचा गया।

NEWS IN SHORT

  • महासमुंद गैस घोटाले का खुलासा: खाद्य अधिकारी निकला मास्टरमाइंड
  • गैस चोरी में शामिल 4 गिरफ्तार, 2 आरोपी फरार
  • आरंग ढाबे में हुई गैस डील, 92 टन गैस गायब
  • गैस की कालाबाजारी 60 टन गैस बेची, बिना खरीदी के
  • पुलिस ने 15 दिनों में किया बड़ा खुलासा, जांच जारी

NEWS IN DETAIL

Mahasamund। महासमुंद जिले में एलपीजी गैस की चोरी का बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें पुलिस ने कई अहम आरोपियों का पर्दाफाश किया है। जांच के मुताबिक, खाद्य विभाग के एक अधिकारी, अजय यादव, ने गैस के बड़े घोटाले को अंजाम दिया। इस मामले में कई लोग शामिल थे, जिनमें गैस एजेंसी के संचालक और अन्य आरोपी शामिल हैं।



गैस की गड़बड़ी का खुलासा

पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना क्षेत्र में एलपीजी से भरे छह ट्रक जब्त किए गए थे। इन ट्रकों में करोड़ों रुपए की गैस भरी हुई थी। इस गैस को जब्त करने के बाद, कलेक्टर कार्यालय ने गैस को सुरक्षित रखने के लिए खाद्य विभाग को निर्देश दिए थे। लेकिन इस दौरान ही पूरे गैस गबन की योजना तैयार की गई थी।



आरंग ढाबे में हुआ बैठक का आयोजन

23 मार्च 2026 को खाद्य अधिकारी अजय यादव और पंकज चंद्राकर के बीच एक बैठक हुई, जिसमें गैस की डील तय की गई। इस बैठक में यह तय हुआ कि सिंघोड़ा थाने से गैस की ट्रांसफरिंग की जाएगी। इसके बाद, 26 मार्च को ट्रकों में भरी गैस का आंकलन किया गया और 30 मार्च को गैस की डील फाइनल की गई।



गैस निकालने का खेल शुरू हुआ

जांच के मुताबिक, 30 मार्च को गैस को प्लांट में ट्रांसफर किया गया और इसके बाद गैस निकालने का खेल शुरू हो गया। 31 मार्च को 2 कैप्सूल खाली किए गए और फिर 1 अप्रैल और 5 अप्रैल को अलग-अलग कैप्सूलों से गैस निकाली गई। तीन दिनों के भीतर लगभग 92 टन गैस को खाली कर दिया गया। गैस को प्लांट के स्थायी बुलेट, निजी टैंकरों और अन्य एजेंसियों में ट्रांसफर किया गया।



तौल में हुई देरी ने खोला राज

पुलिस ने जब जांच की तो पाया कि गैस के ट्रकों का वजन तुरंत क्यों नहीं कराया गया। सिंघोड़ा से अभनपुर तक 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे थे, लेकिन कहीं तौल नहीं हुई। यह देरी जानबूझकर की गई थी ताकि पहले गैस को खाली किया जा सके। जांच में यह भी सामने आया कि 6 ट्रकों में से 5 ट्रकों का वजन 6 अप्रैल को और आखिरी ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया था।



कालाबाजारी का खुलासा

जांच के दौरान पुलिस को कई दस्तावेज मिले, जिनसे यह साफ हुआ कि गैस की कालाबाजारी हो रही थी। ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल महीने में केवल 47 टन गैस खरीदी थी, लेकिन 107 टन गैस बेची गई। यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जिसकी कोई वैध खरीदी ही नहीं हुई थी।



आरोपियों की साजिश

पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने मामले को पुलिस के ऊपर डालने की साजिश रची थी। 20 अप्रैल को आरंग के ढाबे में आरोपियों ने एकजुट होकर एक जैसा बयान देने की योजना बनाई थी और जांच को भटकाने की कोशिश की थी। साथ ही, साक्ष्य मिटाने की भी कोशिश की गई।



महत्वपूर्ण तथ्य

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पुलिस ने किया बड़ा खुलासा

महासमुंद पुलिस की 40 सदस्यीय टीम ने 15 दिनों की जांच में कॉल डिटेल्स, दस्तावेज जांच और वैज्ञानिक विश्लेषण के बाद पूरे गैस घोटाले का पर्दाफाश किया। पुलिस ने अजय यादव, पंकज चंद्राकर और मनीष चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी आरोपियों की तलाश जारी है।



इस मामले में पुलिस ने बीएनएस और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धाराओं के तहत कार्रवाई की है। यह पूरी खबर अब पुलिस की जांच और कार्रवाई के साथ और भी विस्तृत हो गई है, जिसमें बड़े अधिकारियों की भूमिका सामने आई है और गैस की गड़बड़ी को लेकर गंभीर आरोप लग रहे हैं।



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