मैत्री बाग की सफलता :देशभर के चिड़ियाघरों में गूंज रही भिलाई के टाइगर्स की दहाड़

Umeshwari Baghel | Jul 28, 2026, 17:39 IST
भिलाई मैत्री बाग की ऐतिहासिक सफलता
भिलाई के मैत्री बाग में 1999 में आई व्हाइट टाइगर की जोड़ी तापसी और तरुण ने सफेद बाघों का वंश बढ़ाया। अब तक यहां 13 व्हाइट टाइगर जन्म ले चुके हैं। इनकी पीढ़ियां देश के कई चिड़ियाघरों तक पहुंची हैं। कोविड के बाद फिर प्रजनन की तैयारी शुरू हो रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • भिलाई से देशभर में फैला व्हाइट टाइगरों का कुनबा
  • 1999 की जोड़ी ने लिखी संरक्षण की ऐतिहासिक कहानी
  • मैत्री बाग के सफेद बाघों की देशभर में पहचान
  • तापसी-तरुण से शुरू हुआ व्हाइट टाइगरों का सफर
  • 13 बाघों की वंश परंपरा ने बढ़ाया मैत्री बाग का गौरव

Bhilai। छत्तीसगढ़ के भिलाई स्थित मैत्री बाग जू ने व्हाइट टाइगर संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में अपनी खास पहचान बनाई है। यहां वर्ष 1999 में आई सफेद बाघों की एक जोड़ी ने ऐसा वंश शुरू किया, जो आज देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क, भुवनेश्वर से लाई गई व्हाइट टाइगर की जोड़ी तापसी और तरुण ने मैत्री बाग में सफेद बाघों की नई पीढ़ी की नींव रखी थी।



समय के साथ तापसी और तरुण अब दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी संतानों ने देश के अलग-अलग चिड़ियाघरों में व्हाइट टाइगर संरक्षण की कहानी को आगे बढ़ाया है। मैत्री बाग में जन्मे सफेद बाघों की संख्या अब तक 13 तक पहुंच चुकी है। इनमें से कई बाघों को देश के अलग-अलग जू में भेजा गया है।



भिलाई से कई राज्यों तक पहुंचा सफेद बाघों का परिवार

मैत्री बाग में जन्मे व्हाइट टाइगर आज गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई चिड़ियाघरों में मौजूद हैं। यहां से भेजे गए सफेद बाघ राजकोट, इंदौर, मुकुंदपुर, बोकारो, लखनऊ और रायपुर के जू में संरक्षण के साथ रखे गए हैं।



इससे मैत्री बाग का योगदान केवल भिलाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में व्हाइट टाइगर संरक्षण अभियान को मजबूती मिली है। सफेद बाघों की दुर्लभ प्रजाति को बचाने और उनकी संख्या बढ़ाने में मैत्री बाग की भूमिका अहम मानी जाती है।



भिलाई मैत्री बाग की ऐतिहासिक सफलता


अभी मैत्री बाग में मौजूद हैं पांच व्हाइट टाइगर

वर्तमान में मैत्री बाग में पांच सफेद बाघ हैं। इनमें चार नर और एक मादा बाघ शामिल हैं। नर बाघों के नाम रुस्तम, सिंघम, बाबी और विक्रम हैं, जबकि मादा बाघ का नाम गौरी है।



इन सभी की देखभाल विशेषज्ञों की निगरानी में की जाती है। समय-समय पर उनका स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। बाघों को उनकी जरूरत के अनुसार पौष्टिक भोजन दिया जाता है ताकि वे स्वस्थ रहें।



बेहतर देखभाल और अनुकूल माहौल बना सफलता का कारण

मैत्री बाग में व्हाइट टाइगरों के सफल संरक्षण के पीछे यहां का बेहतर वातावरण और विशेषज्ञों की लगातार निगरानी को बड़ी वजह माना जाता है।



बाघों के रहने वाले क्षेत्रों की नियमित सफाई की जाती है। मौसम के अनुसार उनके लिए विशेष व्यवस्था भी की जाती है। गर्मियों में तापमान नियंत्रित रखने के लिए कूलर लगाए जाते हैं, जबकि ठंड के दिनों में गर्माहट के इंतजाम किए जाते हैं।



इसके अलावा पशु चिकित्सकों की टीम लगातार उनकी सेहत पर नजर रखती है। यही वजह है कि मैत्री बाग में व्हाइट टाइगरों की वंश वृद्धि सफल रही है।



कोविड के दौरान रोक दी गई थी प्रजनन प्रक्रिया

कोरोना महामारी के दौरान वर्ष 2020 में मैत्री बाग में व्हाइट टाइगरों की प्रजनन प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। उस समय यहां सफेद बाघों की संख्या बढ़ने के कारण यह फैसला लिया गया था।



अब हालात सामान्य होने के बाद मैत्री बाग प्रबंधन दोबारा प्रजनन प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए जरूरी व्यवस्थाओं और परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है।



फिर बढ़ सकती है मैत्री बाग की पहचान

मैत्री बाग लंबे समय से वन्यजीव संरक्षण और खासकर व्हाइट टाइगर संरक्षण के लिए जाना जाता है। अगर दोबारा प्रजनन प्रक्रिया शुरू होती है तो आने वाले वर्षों में यहां सफेद बाघों की संख्या बढ़ सकती है।



1999 में तापसी और तरुण से शुरू हुआ सफेद बाघों का सफर आज देश के कई हिस्सों तक पहुंच चुका है। भिलाई का मैत्री बाग अब भी दुर्लभ व्हाइट टाइगर संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।



FAQ

  1. मैत्री बाग में व्हाइट टाइगरों की शुरुआत कब हुई थी?
    मैत्री बाग में व्हाइट टाइगरों की शुरुआत वर्ष 1999 में हुई थी। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से लाई गई जोड़ी तापसी और तरुण ने यहां सफेद बाघों के वंश की नींव रखी।
  2. मैत्री बाग से कितने व्हाइट टाइगर देश के दूसरे जू तक पहुंचे हैं?
    मैत्री बाग में जन्मे व्हाइट टाइगर गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई चिड़ियाघरों तक भेजे गए हैं।
  3. र्तमान में मैत्री बाग में कितने सफेद बाघ मौजूद हैं?
    वर्तमान में मैत्री बाग में पांच व्हाइट टाइगर हैं। इनमें चार नर बाघ रुस्तम, सिंघम, बाबी और विक्रम तथा एक मादा बाघ गौरी शामिल है।

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